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Shani Sade Sati: साढ़ेसाती चल रही है तो क्या नौकरी पर खतरा है? सिर्फ शनि देखकर न निकालें नतीजा

Shani Sade Sati: क्या शनि की साढ़ेसाती में नौकरी जाने का खतरा होता है? जानें ज्योतिष में दशम भाव, दशमेश, दशा और गोचर से करियर की स्थिति कैसे समझी जाती है.

ऑफिस में काम का दबाव बढ़ा, प्रमोशन अटका या बॉस से अनबन हुई तो साढ़ेसाती से गुजर रहे लोगों के मन में अक्सर एक सवाल उठता है कि कहीं नौकरी तो नहीं चली जाएगी? कंपनी में छंटनी की चर्चा इस डर को और बढ़ा देती है. लेकिन हर परेशानी को शनि से जोड़ देना सही नहीं है.

ज्योतिषीय मान्यताओं के अनुसार भी नौकरी पर संकट का आकलन केवल साढ़ेसाती देखकर नहीं किया जा सकता.

साढ़ेसाती के दौरान किसी का करियर मुश्किल दौर से गुजर सकता है, तो किसी को बड़ी जिम्मेदारी मिल सकती है. इस अंतर को समझने के लिए जन्मकुंडली में करियर से जुड़े भाव, ग्रहों की स्थिति और चल रही दशा को साथ देखना पड़ता है.

साढ़ेसाती से नौकरी का फैसला क्यों नहीं होता?

जन्म के समय चंद्रमा जिस राशि में होता है, उससे बारहवीं, उसी राशि और दूसरी राशि में शनि के गोचर की अवधि साढ़ेसाती कहलाती है. यह लगभग साढ़े सात वर्ष चलती है.

इसकी गणना चंद्र राशि से होती है. लेकिन एक ही चंद्र राशि वाले लोगों का लग्न, दशा और ग्रहों की स्थिति अलग हो सकती है. इसलिए साढ़ेसाती चलने के बावजूद उनके करियर में एक जैसे बदलाव नहीं आते. किसी पर काम का बोझ बढ़ना, किसी का तबादला होना और किसी का नौकरी बदलना अलग-अलग स्थितियां हैं. इन्हें एक ही नतीजे से जोड़ना गलत होगा.

नौकरी के सवाल में दशम भाव की अहमियत

ज्योतिष में दशम भाव से कामकाज, पद और प्रतिष्ठा का विचार किया जाता है. इस भाव के स्वामी को दशमेश कहते हैं. बृहत्पाराशर होराशास्त्र में दशम भाव के फल बताते समय दशमेश के बल, उसकी स्थिति और दूसरे ग्रहों से संबंध को महत्व दिया गया है. यानी करियर के अध्ययन में जन्मकुंडली की मूल स्थिति को अनदेखा नहीं किया जा सकता.

इसके साथ छठे भाव से नौकरी और प्रतिस्पर्धा, दूसरे भाव से संचित धन तथा ग्यारहवें भाव से आय और लाभ का अध्ययन किया जाता है. इससे यह समझने की कोशिश होती है कि बदलाव केवल जिम्मेदारी में होगा या आमदनी भी प्रभावित हो सकती है.

किन ग्रह स्थितियों में बढ़ती है चिंता?

दशम भाव और दशमेश की कमजोरी: ज्योतिषीय व्याख्या में दशमेश का कमजोर होना और दशम भाव पर एक साथ कई प्रतिकूल प्रभाव होना कामकाज में बाधा से जोड़ा जाता है. हालांकि दशमेश के छठे, आठवें या बारहवें भाव में होने भर से नौकरी जाने का निष्कर्ष नहीं निकलता. ग्रह का बल, भावों का स्वामित्व और सहायक योग भी देखने होते हैं.

प्रतिकूल दशा-अंतर्दशा: करियर से जुड़ी कठिन ग्रह स्थिति की चर्चा करते समय यह देखना जरूरी माना जाता है कि संबंधित ग्रह की दशा भी चल रही है या नहीं. केवल शनि, राहु या केतु का नाम देखकर उनकी दशा को नौकरी के लिए खराब बताना उचित नहीं है. अलग-अलग लग्नों में इनकी भूमिका बदल जाती है.

दशा और गोचर में एक जैसे संकेत: यदि जन्मकुंडली में करियर की बाधाएं हों, संबंधित दशा सक्रिय हो और गोचर भी कठिन माना जा रहा हो, तो ज्योतिषीय अध्ययन में उस अवधि की अधिक बारीकी से जांच की जाती है. फिर भी इससे यह तय नहीं हो जाता कि व्यक्ति को निकाला जाएगा. विभाग बदलना, तबादला, मनमाफिक काम न मिलना या अपनी इच्छा से नौकरी छोड़ना भी करियर में बदलाव के रूप हैं.

क्या मजबूत योग राहत दे सकते हैं?

प्रतिकूल संकेतों के साथ अनुकूल स्थितियों को देखना भी उतना ही जरूरी है. मजबूत दशमेश, सहायक दशा और आय से जुड़े अच्छे संबंधों की अनदेखी करके केवल संकट बताना अधूरा आकलन होगा.

विस्तृत अध्ययन में जन्मकुंडली के साथ दशांश यानी D10 भी देखा जाता है. इसके लिए जन्मसमय की शुद्धता जरूरी है. जन्म विवरण संदिग्ध हो तो बहुत सटीक तारीख या निश्चित परिणाम बताने वाले दावों पर सवाल करना चाहिए.

नौकरी का डर हो तो क्या करें?

साढ़ेसाती के नाम पर घबराने से पहले अपने कार्यस्थल की स्थिति समझें. कंपनी की आर्थिक हालत, प्रदर्शन की लिखित समीक्षा, जिम्मेदारियों में लगातार कटौती और प्रबंधन से मिले स्पष्ट संकेत नौकरी के जोखिम को समझने के ठोस आधार हैं.

अपना बायोडाटा अपडेट रखें, काम का रिकॉर्ड संभालें और नए अवसरों पर नजर रखें. केवल ग्रहों के डर से इस्तीफा देना या अच्छी नौकरी का प्रस्ताव छोड़ देना समझदारी नहीं है.

Disclaimer: यहां मुहैया सूचना सिर्फ मान्यताओं और जानकारियों पर आधारित है. यहां यह बताना जरूरी है कि ABPLive.com किसी भी तरह की मान्यता, जानकारी की पुष्टि नहीं करता है. किसी भी जानकारी या मान्यता को अमल में लाने से पहले संबंधित विशेषज्ञ से सलाह लें.

हृदेश कुमार सिंह । Hirdesh Kumar Singh 

Senior Vedic Astrologer । Head – Religion & Astrology, ABP Live । Lead – ABP Dharma LIVE

हृदेश कुमार सिंह वरिष्ठ वैदिक ज्योतिषाचार्य और मीडिया पेशेवर हैं. उन्हें ज्योतिष, धर्म और मीडिया के क्षेत्र में 17 साल से अधिक का अनुभव है. वर्तमान में वे ABP Live में Religion & Astrology वर्टिकल का नेतृत्व करते हैं. साथ ही ABP Dharma LIVE की कंटेंट और डिजिटल रणनीति की जिम्मेदारी संभालते हैं.

उनके काम में ज्योतिषीय लेखन, संपादन, वेबसाइट और वीडियो के लिए विषय चयन तथा संपादकीय योजना शामिल है. वे Search, Google Discover और सोशल मीडिया पर पाठकों की रुचि को ध्यान में रखकर धर्म और ज्योतिष की कवरेज तय करते हैं.

पंचांग, राशिफल, ग्रह गोचर, व्रत-त्योहार और धार्मिक परंपराएं उनके लेखन के प्रमुख विषय हैं. वे करियर, विवाह, शिक्षा और व्यापार से जुड़े सवालों पर भी लिखते हैं. राजनीति और सामाजिक घटनाओं पर उनके ज्योतिषीय विश्लेषण वैदिक गणना, गोचर और मेदिनी ज्योतिष पर आधारित होते हैं. इनमें ग्रह स्थितियों को संभावित संकेतों के रूप में प्रस्तुत किया जाता है.

उन्होंने Indian Institute of Mass Communication (IIMC), नई दिल्ली से पत्रकारिता और IIMT University, मेरठ से ज्योतिष शास्त्र एवं वास्तु शास्त्र की शिक्षा ग्रहण की है. वे AstroSage और Astrotalk जैसे प्लेटफॉर्म के साथ भी काम कर चुके हैं. उन्होंने Semrush Academy से 'Content Marketing Essentials for SEO and AI Search with Semrush' सर्टिफिकेशन प्राप्त किया है.

नई पीढ़ी के पाठकों के लिए उन्होंने 'Gen-Z Horoscope' जैसे प्रारूप पर काम किया है. इसमें पढ़ाई, नौकरी, रिश्तों और रोजमर्रा के फैसलों से जुड़े सवालों को राशिफल में जगह दी गई है. उनके लेख धार्मिक परंपराओं से जुड़े उन प्रश्नों पर भी केंद्रित होते हैं, जो बदलती जीवनशैली में सामने आते हैं.

वैदिक ज्योतिष, होरा शास्त्र, संहिता, मेदिनी ज्योतिष, अंक ज्योतिष, शकुन शास्त्र और वास्तु उनके अध्ययन एवं लेखन के विषय हैं. उनका मानना है, 'ज्योतिष केवल भविष्य बताने की विद्या नहीं, बल्कि समय को समझने की कला है.'

ज्योतिष और मीडिया के अलावा उन्हें सिनेमा, संगीत, साहित्य, राजनीति, पर्यावरण, ग्रामीण जीवन और यात्राओं में विशेष रुचि है.

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