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Radha Ashtami 2026: पूजा 11:01 से 1:28 तक, अष्टमी 3:26 तक, क्या 1:28 पर व्रत खोलें या तिथि समाप्त होने तक रुकें?

Radha Ashtami 2026: राधा अष्टमी 2026 पर व्रत 1:28 बजे पूजा के बाद खोलें या 3:26 बजे अष्टमी तिथि समाप्त होने पर? जानें गृहस्थ और वैष्णव परंपरा के अनुसार पारण का सही समय और नियम.

Radha Ashtami 2026: राधा अष्टमी 2026 पर पूजा और व्रत के समय को लेकर कई श्रद्धालुओं के मन में भ्रम है. पंचांग के अनुसार, 19 सितंबर को नई दिल्ली में राधा रानी की मध्याह्न पूजा का समय सुबह 11:01 बजे से दोपहर 1:28 बजे तक रहेगा, जबकि अष्टमी तिथि दोपहर करीब 3:26 बजे तक रहेगी. ऐसे में सवाल उठता है कि क्या 1:28 बजे पूजा समाप्त होते ही व्रत खोल देना चाहिए या अष्टमी तिथि समाप्त होने तक प्रतीक्षा करनी चाहिए?

इसका उत्तर समझने के लिए पूजा के मुहूर्त और तिथि की समाप्ति, इन दोनों को अलग-अलग समझना जरूरी है.

पूजा का समय और तिथि की समाप्ति अलग-अलग होती है

मध्याह्न पूजा का समय वह अवधि होती है, जिसमें राधा रानी का मुख्य पूजन, अभिषेक, श्रृंगार, भोग और आरती की जाती है. इसका यह अर्थ नहीं है कि 1:28 बजे अष्टमी तिथि भी समाप्त हो जाएगी. 1:28 बजे के बाद भी अष्टमी तिथि लगभग दो घंटे तक जारी रहेगी.

यह भी पढ़ें- Radha Ashtami 2026: राधे-राधे रटो...राधा अष्टमी पर अपनों को भेजें ये भक्तिमय शुभकामना संदेश

इसलिए केवल पूजा का समय देखकर व्रत खोलने का निर्णय नहीं लेना चाहिए. पारण का नियम आपके संप्रदाय, पारिवारिक परंपरा और स्थानीय मान्यताओं पर निर्भर करता है.

गृहस्थ श्रद्धालु 1:28 बजे क्या कर सकते हैं?

सामान्य गृहस्थ परंपरा में राधा अष्टमी का व्रत मध्याह्न पूजा पूरी होने के बाद खोला जाता है. इस परंपरा का पालन करने वाले श्रद्धालु 1:28 बजे पूजा, भोग और आरती पूरी करने के बाद चरणामृत या प्रसाद ग्रहण कर सकते हैं. इसके बाद फलाहार या हल्का सात्विक भोजन किया जा सकता है.

हालांकि, पूजा समाप्त होते ही भारी भोजन करना उचित नहीं माना जाता. पहले राधा-कृष्ण को भोग लगाएं, फिर प्रसाद ग्रहण करें और अपनी क्षमता के अनुसार फल, दूध, मखाना, साबूदाना या अन्य मान्य फलाहारी सामग्री लें.

किन लोगों को 3:26 बजे तक प्रतीक्षा करनी चाहिए?

यदि आपके परिवार या वैष्णव परंपरा में अष्टमी तिथि समाप्त होने के बाद पारण करने का नियम है, तो 3:26 बजे तक अन्न या भोजन ग्रहण न करें. कुछ श्रद्धालु तिथि समाप्त होने के बाद ही व्रत खोलते हैं, जबकि कुछ लोग अगले दिन पारण करते हैं. इसलिए किसी दूसरे परिवार की परंपरा को अपने ऊपर लागू करना उचित नहीं होगा.

जो लोग निर्जल या कठोर व्रत रखते हैं, उन्हें अपने गुरु, आचार्य या स्थानीय पंचांग में दिए गए नियमों का पालन करना चाहिए. इंटरनेट पर उपलब्ध किसी एक समय को अंतिम नियम मानना उचित नहीं है.

प्रसाद या फलाहार लेकर व्रत खोल सकते हैं?

यदि आप सामान्य गृहस्थ व्रत रख रहे हैं, तो 19 सितंबर को मध्याह्न पूजा पूरी होने के बाद, यानी 1:28 बजे के बाद प्रसाद या फलाहार लेकर व्रत खोल सकते हैं. यदि आपकी पारिवारिक या संप्रदायगत परंपरा तिथि समाप्त होने के बाद पारण करने की है, तो 3:26 बजे के बाद व्रत खोलें.

इसलिए 1:28 बजे व्रत खोलना अपने आप में गलत नहीं है और 3:26 बजे तक प्रतीक्षा करना भी हर व्यक्ति के लिए अनिवार्य नहीं है. आपके लिए सही नियम वही होगा, जो आपकी परंपरा और स्वास्थ्य के अनुकूल हो.

बच्चे, बुजुर्ग, गर्भवती महिलाएं, बीमार व्यक्ति और नियमित रूप से दवा लेने वाले लोग निर्जल व्रत न रखें. राधा रानी की पूजा में भक्ति सबसे महत्वपूर्ण है, शरीर को कष्ट देना नहीं.

Disclaimer: यहां मुहैया सूचना सिर्फ मान्यताओं और जानकारियों पर आधारित है. यहां यह बताना जरूरी है कि ABPLive.com किसी भी तरह की मान्यता, जानकारी की पुष्टि नहीं करता है. किसी भी जानकारी या मान्यता को अमल में लाने से पहले संबंधित विशेषज्ञ से सलाह लें.

हृदेश कुमार सिंह । Hirdesh Kumar Singh 

Senior Vedic Astrologer । Head – Religion & Astrology, ABP Live । Lead – ABP Dharma LIVE

हृदेश कुमार सिंह वरिष्ठ वैदिक ज्योतिषाचार्य और मीडिया पेशेवर हैं. उन्हें ज्योतिष, धर्म और मीडिया के क्षेत्र में 17 साल से अधिक का अनुभव है. वर्तमान में वे ABP Live में Religion & Astrology वर्टिकल का नेतृत्व करते हैं. साथ ही ABP Dharma LIVE की कंटेंट और डिजिटल रणनीति की जिम्मेदारी संभालते हैं.

उनके काम में ज्योतिषीय लेखन, संपादन, वेबसाइट और वीडियो के लिए विषय चयन तथा संपादकीय योजना शामिल है. वे Search, Google Discover और सोशल मीडिया पर पाठकों की रुचि को ध्यान में रखकर धर्म और ज्योतिष की कवरेज तय करते हैं.

पंचांग, राशिफल, ग्रह गोचर, व्रत-त्योहार और धार्मिक परंपराएं उनके लेखन के प्रमुख विषय हैं. वे करियर, विवाह, शिक्षा और व्यापार से जुड़े सवालों पर भी लिखते हैं. राजनीति और सामाजिक घटनाओं पर उनके ज्योतिषीय विश्लेषण वैदिक गणना, गोचर और मेदिनी ज्योतिष पर आधारित होते हैं. इनमें ग्रह स्थितियों को संभावित संकेतों के रूप में प्रस्तुत किया जाता है.

उन्होंने Indian Institute of Mass Communication (IIMC), नई दिल्ली से पत्रकारिता और IIMT University, मेरठ से ज्योतिष शास्त्र एवं वास्तु शास्त्र की शिक्षा ग्रहण की है. वे AstroSage और Astrotalk जैसे प्लेटफॉर्म के साथ भी काम कर चुके हैं. उन्होंने Semrush Academy से 'Content Marketing Essentials for SEO and AI Search with Semrush' सर्टिफिकेशन प्राप्त किया है.

नई पीढ़ी के पाठकों के लिए उन्होंने 'Gen-Z Horoscope' जैसे प्रारूप पर काम किया है. इसमें पढ़ाई, नौकरी, रिश्तों और रोजमर्रा के फैसलों से जुड़े सवालों को राशिफल में जगह दी गई है. उनके लेख धार्मिक परंपराओं से जुड़े उन प्रश्नों पर भी केंद्रित होते हैं, जो बदलती जीवनशैली में सामने आते हैं.

वैदिक ज्योतिष, होरा शास्त्र, संहिता, मेदिनी ज्योतिष, अंक ज्योतिष, शकुन शास्त्र और वास्तु उनके अध्ययन एवं लेखन के विषय हैं. उनका मानना है, 'ज्योतिष केवल भविष्य बताने की विद्या नहीं, बल्कि समय को समझने की कला है.'

ज्योतिष और मीडिया के अलावा उन्हें सिनेमा, संगीत, साहित्य, राजनीति, पर्यावरण, ग्रामीण जीवन और यात्राओं में विशेष रुचि है.

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