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PM Modi का तोहफा 'दृष्टसहस्त्रचन्द्रो' क्यों है इतना ख़ास, ये क्या होता है और किसे दिया जाता है? जानें

Pm Modi US Visit: पीएम मोदी ने अमेरिकी राष्ट्रपति जो बाइडेन को कई तोहफे दिए. लेकिन एक खास तोहफा 'दृष्टसहस्त्रचन्द्रो' की खूब चर्चा हो रही है. ये क्या होता है और इसकी क्या विशेषता है, जानते हैं.

PM Modi Gift To Joe Biden: पीएम नरेंद्र मोदी ने बुधवार को अमेरिका में व्हाइट हाउस पहुंचकर राष्ट्रपति जो बाइडेन (Joe Biden) और फर्स्ट लेडी जिल बाइडेन को कई तोहफे दिए. इसमें एक तोहफा बेहद विशेष था. इस तोहफे की जबरदस्त चर्चा हो रही है. लोग इस विशेष उपहार के बारे में जानना चाहते हैं कि आखिर ये क्या होता है और किसे दिया जाता है.

'दृष्टसहस्त्रचन्द्रो' क्या होता है (What is meant by Sahasra Chandra Darshan?)
जैसा कि नाम से ही पता चल रहा है सहस्त्र चंद्र दृष्टो (Sahasra Chandra Darshan) का मतलब है कि वह व्यक्ति जिसने अपने जीवन में सहस्त्रों चंद्रमा का दर्शन किया हो. इसका सीधा सा तात्पर्य है कि भारतीय हिंदू परंपरा के अनुसार यदि कोई व्यक्ति लगभग 80 वर्ष की आयु पूर्ण कर लेता है तो इसका मतलब है कि वह अपने जीवन में हजारों चंद्रमा देख चुका है और चंद्र दर्शन का साक्षी बना है, इसलिए सहस्त्र चंद्र दर्शन अनुष्ठान करता है. ऐसा करने से उसे अपने जीवित रहने की अंतिम सांस तक बल मिलता है और उसके अहंकार में कमी आ जाती है. केवल इतना ही नहीं ऐसा भी माना जाता है कि ऐसा व्यक्ति अगले जन्म में भी मजबूत व्यक्तित्व के तौर पर जन्म लेता है. 

सहस्र चन्द्र दर्शन किस उम्र में होता है? (At what age is Sahasra Chandra Darshan?)
हिंदू धर्म में विभिन्न संस्कारों को बहुत महत्व दिया गया है लेकिन आजकल के आधुनिकता के योग में लोगों अपने संस्कारों में पिछड़ते चले रहे हैं और लोगों को इनके बारे में ज्ञात भी नहीं है.ऐसा ही एक पर्व और होता है जिसे षष्टिपूर्ति कहा जाता है. वह व्यक्ति के 60 वर्ष की आयु पूर्ण करने के लिए के उपरांत किया जाता है. उसके बाद जब व्यक्ति 80 वर्ष की आयु पूर्ण कर लेता है तो उसे लगभग एक‌ हजार चंद्र दर्शन का सौभाग्य मिल चुका होता है जिसका तात्पर्य है कि उसके जीवन में यश और समृद्धि की प्राप्ति होती है और इस अनुष्ठान के द्वारा वह अपने जीवित रहने तक शक्तिशाली और मजबूत व्यक्तित्व के तौर पर अपना नाम और पहचान बनाने में कामयाब रहता है.

यह एक‌ ऐसा अनुष्ठान है जिसे धार्मिक और सामाजिक रुप से मान्यता प्राप्त है. जब कोई व्यक्ति अपने जीवन में लगभग एक‌ हजार पूर्णिमा अर्थात् पूर्णचंद्र के दर्शन कर लेता है तो सहस्त्र चंद्र दर्शन समारोह किया जाता है जिसमें परिवार के महत्वपूर्ण व्यक्तियों, रिश्तेदारों, मित्रों, आदि को बुलाकर होम अर्थात् हवन आदि अनुष्ठान किए जाते हैं. इस दिन उस व्यक्ति की भी पूजा की जाती है जिसने एक हजार चंद्रमा का दर्शन किया हो और फिर दान किए जाते हैं.

81 वर्षों में कितनी पूर्णिमाएं होती हैं? (How many full moons in 81 years?)
सहस्त्र चंद्र दर्शन का तात्पर्य यह नहीं कि उस व्यक्ति ने सभी चंद्रमा देखे हों. सीधा सा मतलब यह है कि उसने अपने जीवन में इतनी पूर्णिमा को घटित होते हुए देखा है. 1 वर्ष में लगभग 12 पूर्णिमा आती हैं. 80 वर्ष में लगभग 960 पूर्णिमा आती हैं. अधिक मास वगैरह लगाकर 32 पूर्णिमा और हो जाती हैं जिस प्रकार लगभग 992 पूर्णिमा होती हैं. इसके बाद 8 महीने के उपरांत 1000 चंद्र दर्शन का सुख मिलता है जो लगभग 80 वर्ष के बाद 81 वर्ष में पूर्ण होता है व्यक्ति की 80 वर्ष की आयु पूर्ण होने के बाद यह सहस्त्र चंद्र दर्शन अनुष्ठान किया जा सकता है.

वैदिक ऋषियों ने प्राचीन काल में स्वास्थ्य को ही सबसे बड़ा धन माना था और उसी को सबसे ज्यादा महत्व दिया था. कुछ समय पूर्व स्वर्गीय लता मंगेशकर के लिए भी सहस्त्र चंद्र दर्शन अनुष्ठान किया गया था. वास्तव में यह एक ऐसा अनुष्ठान है जो उस व्यक्ति की प्रसन्नता के लिए मनाया जाता है जिसने इतना लंबा जीवन जी कर स्वयं को एक मजबूत व्यक्तित्व के रूप में उभरा है और हम यही कामना करते हैं कि वह आगे भी जीवित रहकर मजबूती के साथ अपनी सभी जिम्मेदारियों को भली प्रकार निभा कर एक उच्च व्यक्तित्व के रूप में अपनी पहचान बना पाए.

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रुचि शर्मा एक कुशल एस्ट्रोलॉजर हैं, दैनिक राशिफल और कुंडली विश्लेषण में इन्हें विशेष महारत प्राप्त है. इन्हें 10 साल का अनुभव है. ज्योतिष और अध्यात्म की किताबें पढ़ना इनका शौक है, खाली समय में इन्हें संगीत सुनना अच्छा लगता है.
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