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Indira Ekadashi 2026: श्राद्ध कर लिया, तो क्या व्रत भी जरूरी है?

Indira Ekadashi 2026: पितृ पक्ष में श्राद्ध करने के बाद क्या इंदिरा एकादशी का व्रत भी रखना जरूरी है? पद्म पुराण के आधार पर समझें श्राद्ध, विष्णु उपासना और पितरों को पुण्य समर्पित करने में अंतर.

Indira Ekadashi 2026: पितरों की तिथि पर श्राद्ध हो चुका है. घर में उनके पसंद का भोजन बना. ब्राह्मण भोजन और दान भी किया गया. अब कल, 6 अक्टूबर को इंदिरा एकादशी है. इस व्रत को भी पितरों की सद्गति से जोड़ा जाता है. ऐसे में सवाल सीधा है कि पितरों के लिए श्राद्ध कर लिया, तो क्या व्रत भी रखना जरूरी है? नहीं रखा तो क्या कोई कमी रह जाएगी?

श्राद्ध के बाद इंदिरा एकादशी का व्रत रख सकते हैं. लेकिन इस व्रत को न रखने भर से किया हुआ श्राद्ध अधूरा हो गया, ऐसा नहीं है. दोनों अलग धार्मिक कर्म हैं.

श्राद्ध के बाद व्रत रखने का उद्देश्य क्या है?

श्राद्ध में पितरों के निमित्त निर्धारित कर्म और अर्पण किए जाते हैं. एकादशी व्रत में श्रद्धालु संयम रखकर भगवान विष्णु की उपासना करता है. इंदिरा एकादशी में इस उपासना का पुण्य दिवंगत पूर्वजों के कल्याण के लिए समर्पित करने का भाव जुड़ता है.

इसलिए इसे श्राद्ध दोबारा करना नहीं समझें. आपने पितरों के निमित्त श्राद्ध किया. अब व्रत रखते हैं, तो विष्णु उपासना के माध्यम से उनके कल्याण की प्रार्थना करते हैं. यही दोनों के बीच समझने वाला अंतर है.

पद्म पुराण में क्या प्रमाण मिलता है?

पद्म पुराण के में इंदिरा एकादशी का वर्णन मिलता है. देवर्षि नारद राजा इंद्रसेन को उनके दिवंगत पिता का संदेश देते हैं. पिता चाहते हैं कि पुत्र इंदिरा एकादशी का व्रत करके उसका पुण्य उन्हें अर्पित करे.

नारद जी इसकी विधि बताते हैं. दशमी पर श्राद्ध और एक बार भोजन, एकादशी पर उपवास तथा विष्णु पूजा, फिर द्वादशी पर श्राद्ध और भोजन का उल्लेख मिलता है.

यहां ध्यान देने वाली बात है कि विधान में श्राद्ध और उपवास, दोनों मौजूद हैं. व्रत को श्राद्ध की जगह रखकर बाकी कर्म छोड़ देने की बात नहीं कही गई है. यही इस सवाल का शास्त्रीय आधार है.

क्या व्रत से छूटा हुआ श्राद्ध पूरा हो जाएगा?

केवल व्रत रखकर यह मान लेना कि छूटा हुआ श्राद्ध भी हो गया, उचित नहीं. इंदिरा एकादशी की कथा में व्रत, विष्णु पूजा और पितरों के निमित्त कर्म साथ बताए गए हैं.

यदि निर्धारित श्राद्ध नहीं कर पाए हैं, तो उसके लिए अपनी पारिवारिक परंपरा के अनुसार विधि जानें. व्रत रखने का निर्णय अलग लें. दोनों को एक-दूसरे का विकल्प बना देने से धार्मिक कर्म का उद्देश्य ही बदल जाता है.

पुण्य पितरों को समर्पित करने का अर्थ क्या है?

इसका अर्थ है अपनी साधना के फल को पूर्वजों के कल्याण के निमित्त अर्पित करने का संकल्प. राजा इंद्रसेन की कथा का केंद्र भी यही है कि व्रत पुत्र करता है और पुण्य पिता को समर्पित करता है. इसे धार्मिक विश्वास के रूप में समझें.

व्रत रखना चाहते हैं, तो अपनी क्षमता और परंपरा के अनुसार स्वरूप चुनें. शास्त्र भी संकल्प में शारीरिक क्षमता का ध्यान रखने की बात करते हैं.

श्राद्ध कर चुके हैं, तो इंदिरा एकादशी का व्रत एक्स्ट्रा पूजा के रूप में रख सकते हैं. इसे अपने किए हुए श्राद्ध की वैधता की परीक्षा न बनाएं. और व्रत रखा है, तो उसे निर्धारित श्राद्ध पूरा होने का प्रमाण भी न मानें.

Disclaimer: यहां मुहैया सूचना सिर्फ मान्यताओं और जानकारियों पर आधारित है. यहां यह बताना जरूरी है कि ABPLive.com किसी भी तरह की मान्यता, जानकारी की पुष्टि नहीं करता है. किसी भी जानकारी या मान्यता को अमल में लाने से पहले संबंधित विशेषज्ञ से सलाह लें.

हृदेश कुमार सिंह । Hirdesh Kumar Singh 

Senior Vedic Astrologer । Head – Religion & Astrology, ABP Live । Lead – ABP Dharma LIVE

हृदेश कुमार सिंह वरिष्ठ वैदिक ज्योतिषाचार्य और मीडिया पेशेवर हैं. उन्हें ज्योतिष, धर्म और मीडिया के क्षेत्र में 17 साल से अधिक का अनुभव है. वर्तमान में वे ABP Live में Religion & Astrology वर्टिकल का नेतृत्व करते हैं. साथ ही ABP Dharma LIVE की कंटेंट और डिजिटल रणनीति की जिम्मेदारी संभालते हैं.

उनके काम में ज्योतिषीय लेखन, संपादन, वेबसाइट और वीडियो के लिए विषय चयन तथा संपादकीय योजना शामिल है. वे Search, Google Discover और सोशल मीडिया पर पाठकों की रुचि को ध्यान में रखकर धर्म और ज्योतिष की कवरेज तय करते हैं.

पंचांग, राशिफल, ग्रह गोचर, व्रत-त्योहार और धार्मिक परंपराएं उनके लेखन के प्रमुख विषय हैं. वे करियर, विवाह, शिक्षा और व्यापार से जुड़े सवालों पर भी लिखते हैं. राजनीति और सामाजिक घटनाओं पर उनके ज्योतिषीय विश्लेषण वैदिक गणना, गोचर और मेदिनी ज्योतिष पर आधारित होते हैं. इनमें ग्रह स्थितियों को संभावित संकेतों के रूप में प्रस्तुत किया जाता है.

उन्होंने Indian Institute of Mass Communication (IIMC), नई दिल्ली से पत्रकारिता और IIMT University, मेरठ से ज्योतिष शास्त्र एवं वास्तु शास्त्र की शिक्षा ग्रहण की है. वे AstroSage और Astrotalk जैसे प्लेटफॉर्म के साथ भी काम कर चुके हैं. उन्होंने Semrush Academy से 'Content Marketing Essentials for SEO and AI Search with Semrush' सर्टिफिकेशन प्राप्त किया है.

नई पीढ़ी के पाठकों के लिए उन्होंने 'Gen-Z Horoscope' जैसे प्रारूप पर काम किया है. इसमें पढ़ाई, नौकरी, रिश्तों और रोजमर्रा के फैसलों से जुड़े सवालों को राशिफल में जगह दी गई है. उनके लेख धार्मिक परंपराओं से जुड़े उन प्रश्नों पर भी केंद्रित होते हैं, जो बदलती जीवनशैली में सामने आते हैं.

वैदिक ज्योतिष, होरा शास्त्र, संहिता, मेदिनी ज्योतिष, अंक ज्योतिष, शकुन शास्त्र और वास्तु उनके अध्ययन एवं लेखन के विषय हैं. उनका मानना है, 'ज्योतिष केवल भविष्य बताने की विद्या नहीं, बल्कि समय को समझने की कला है.'

ज्योतिष और मीडिया के अलावा उन्हें सिनेमा, संगीत, साहित्य, राजनीति, पर्यावरण, ग्रामीण जीवन और यात्राओं में विशेष रुचि है.

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