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डोनाल्ड ट्रंप के शपथ से पहले अपशकुन और दुर्योधन के जन्म के समय की स्थिति...क्या इन दोनों में कोई समानता है?

विशेषज्ञों ने डोनाल्ड ट्रंप की नीतियों को भारत-अमेरिका रिश्तों का पिछले दो दशकों का सबसे बड़ा संकट बताया है. भारतीयों में अब यह धारणा गहराती जा रही है कि ट्रंप मित्र नहीं, बल्कि अशुभ संकेतक हैं.

इतिहास जब स्वयं को दोहराता है, तो वह सीधे तथ्य नहीं लाता, वह प्रतीकों, अपशकुनों और घटनाओं की छायाओं में अपनी गूंज सुनाता है. महाभारत में दुर्योधन का जन्म जिस प्रकार महायुद्ध का शंखनाद बन गया था, उसी प्रकार ट्रंप की शपथ से पहले लगी जंगल की आग और आज भारत-पाक को लेकर दिए जा रहे उनके बयान एक ही पंक्ति में खड़े दिखाई देते हैं, क्या ये सब मात्र संयोग हैं या सत्ता की वही पुरानी नियति?

दुर्योधन जन्म का भयावह आरंभ

महाभारत में वर्णन है, कि जब दुर्योधन का जन्म हुआ तो आकाश से उल्का-पिंड बरसे. गिद्ध, कौवे और गीदड़ अशुभ ध्वनि करने लगे. धरती कांप उठी और नगर में भय फैल गया.

उस समय इन स्थितियों को देखते हुए महर्षि व्यास और ब्राह्मणों ने धृतराष्ट्र से कहा था कि- त्याग दीजिए इस बालक को, अन्यथा यह युद्ध की ज्वाला में समस्त वंश को भस्म कर देगा.

लेकिन मोह ने निर्णय पर पर्दा डाल दिया. नतीजा वही हुआ, महाभारत का युद्ध. यह प्रसंग हमें बताता है कि जब सत्ता की शुरुआत अपशकुनों से होती है, तो अंत में समाज महाविनाश की ओर धकेल दिया जाता है. इसे पढ़ें- 'डोनाल्ड ट्रंप' की शपथ से पहले अमेरिका में लगी आग किसी अपशकुन का संकेत तो नहीं?

इसे लेकर शास्त्र क्या कहता है?

शकुनाः स्युर्विनाशाय, शुभाय च शुभाशुभाः
यानी शकुन-अपशकुन कभी व्यर्थ नहीं होते; वे आने वाले समय की दिशा बताते हैं.

महाभारत (आदि पर्व, अध्याय 115–116)

“जज्ञे तु तस्मिन्नेव दिने कुरुपुंगवः, तदा चापि महाभागा विनाशं जगतः स्मृतम्
दुर्योधन का जन्म होते ही विद्वानों ने इसे विश्व-विनाश का कारण बताया.

ट्रंप की शपथ और आधुनिक अपशकुन

20 जनवरी 2017 को डोनाल्ड ट्रंप का शपथग्रहण था. लेकिन यह कोई सामान्य सत्ता परिवर्तन नहीं था. लेकिन इससे पूर्व कैलिफ़ोर्निया और लॉस एंजेलिस में लगी भयंकर जंगल की आग ने लाखों पक्षियों और पशुओं की जान ले ली.

वॉशिंगटन डी.सी. में शपथ से पहले ही दंगे और आगजनी हुई, मानो लोकतंत्र का उत्सव एक युद्धभूमि में बदल गया हो. मौसम ने भी संकेत दिया, अचानक बारिश और बादलों की स्थिति में अजीब सी हलचल देखी गई, जो अमूमन कम ही देखने को मिलती है.

ज्योतिषीय दृष्टि से भी शनि संधिकाल, राहु-केतु दोष और मंगल-सूर्य तनाव जैसे योग उस क्षण को घेरे हुए थे. यह सब एक ही बात की ओर इशारा कर रहे थे, सत्ता का यह आरंभ शांति का नहीं, विभाजन का दूत होगा.

भारत-पाक पर ट्रंप के बयान: कूटनीति या अशुभ हस्तक्षेप?

आज, आठ वर्ष बाद, ट्रंप जब भारत-पाक संबंधों पर दावा करते हैं कि उन्होंने युद्ध रोका, विमान गिराए जाने की स्थिति को शांत किया और ट्रेड को हथियार की तरह इस्तेमाल किया, तो भारतीय जनमानस में यह कथन किसी अपशकुन की पुनरावृत्ति सा प्रतीत होता है.

व्हाइट हाउस और ट्रंप का दावा कि हमने भारत-पाक युद्ध रोका, भारत ने सख्ती से इसे खारिज किया.

विदेश मंत्री एस. जयशंकर ने स्पष्ट कहा कि संघर्ष को विराम भारत की सैन्य कार्रवाई (ऑपरेशन सिंदूर) से मिला, किसी तीसरे की दखल से नहीं.

शशि थरूर ने तीखी टिप्पणी की थी कि शांति का कारण ट्रंप नहीं, बल्कि भारत की सफल स्ट्राइक्स थीं.

यहां भी वही प्रतीक दोहराया जाता है, दूसरे की सत्ता अपने अहंकार में अपशकुन को नज़रअंदाज़ कर देती है, और असल कारण को छिपाने का प्रयास करती है.

भारतीय धारणा: मित्रता का अंत?

2014–19 के बीच मोदी और ट्रंप की तस्वीरें हाउडी मोदी से लेकर नमस्ते ट्रंप तक मित्रता का प्रतीक बनीं. लेकिन 2025 में यह संबंध तीव्र असंतोष और अविश्वास में बदल चुका है. कैसे समझते हैं-

  • टैरिफ और आर्थिक नीतियां, भारत के लिए संकट.
  • रूस से तेल आयात पर अमेरिकी आपत्ति, भारत की संप्रभुता पर सवाल.
  • ट्रंप के लगातार बयान, भारतीय समाज में आक्रोश और असंतोष.

The Washington Post ने हाल में इसे the worst crisis in two decades कहा. भारतीयों में अब यह धारणा बन रही है कि ट्रंप मित्र नहीं, बल्कि एक अशुभ संकेतक हैं, जैसे दुर्योधन का जन्म कुरु वंश के लिए था.

2025 में फिर वही संकेत दिखाई दे रहे हैं, शनि मीन राशि में प्रवेश कर जल-सुरक्षा, समुद्री संघर्ष और वैश्विक आपूर्ति-शृंखला पर संकट का इशारा कर रहा है.

राहु कुंभ और केतु सिंह से जनआन्दोलन, ऑनलाइन असंतोष और नेतृत्व की छवि पर दबाव है. गुरु मिथुन और अर्द्रा नक्षत्र में रहते हुए सूचना-युद्ध, मीडिया-नैरेटिव और कूटनीतिक तनाव को तीव्र कर रहा है, जबकि मंगल सिंह में प्रवेश कर सीमा-पार सैन्य तनाव का सूचक है.

इसका अर्थ यह है कि आने वाले महीनों में भारत-अमेरिका संबंधों में दरार गहरी हो सकती है, भारत-पाक सीमा पर झड़पें या हवाई संघर्ष की स्थिति बन सकती है और आर्थिक-सामाजिक स्तर पर अस्थिरता का दौर तेज हो सकता है.

यानी महाभारत काल के अपशकुन और आज के ग्रहयोग दोनों एक ही दिशा में संकेत करते हैं, जब सत्ता अहंकार और विभाजन से घिरी हो, तो भविष्य शांति का नहीं बल्कि संघर्ष का दूत बनता है.

शकुन और अपशकुन केवल घटनाएं नहीं होते, वे भविष्य की छाया होते हैं.
दुर्योधन का जन्म एक युद्ध का सूचक था. डोनाल्ड ट्रंप का शपथग्रहण और अब उनके बयान, भारत-पाक युद्ध और कूटनीतिक संकट के बीच, वही संदेश दोहरा रहे हैं, सत्ता जब अहंकार और असत्य पर टिकी हो, तो उसके आरंभ के अशुभ संकेत समाज को महाविनाश की ओर ले जाते हैं.

Disclaimer: यहां मुहैया सूचना सिर्फ मान्यताओं और जानकारियों पर आधारित है. यहां यह बताना जरूरी है कि ABPLive.com किसी भी तरह की मान्यता, जानकारी की पुष्टि नहीं करता है. किसी भी जानकारी या मान्यता को अमल में लाने से पहले संबंधित विशेषज्ञ से सलाह लें.

----समाप्त------

About the author Hirdesh Kumar Singh

हृदेश कुमार सिंह, Senior Vedic Astrologer | Astro Media Editor | Digital Strategy Leader

"ज्योतिष केवल भविष्य बताने की विद्या नहीं, बल्कि समय को समझने की कला है."

हृदेश कुमार सिंह लंबे समय से ज्योतिष, धर्म, अध्यात्म और डिजिटल मीडिया के क्षेत्र में सक्रिय हैं. वे उन चुनिंदा लोगों में माने जाते हैं जिन्होंने पारंपरिक ज्योतिष को आज की बदलती दुनिया, डिजिटल संस्कृति और नई पीढ़ी की सोच से जोड़ने का प्रयास किया है. उनके लिए ज्योतिष केवल ग्रहों की गणना नहीं, बल्कि मानव व्यवहार, सही समय और जीवन के निर्णयों को समझने का माध्यम है.

वर्तमान में वे ABP Live में Astro, Religion और Dharma LIVE से जुड़े कंटेंट और डिजिटल रणनीति का नेतृत्व कर रहे हैं. यहां उनका फोकस ज्योतिष और धर्म को ऐसे रूप में प्रस्तुत करना है, जो आज के पाठकों और दर्शकों की जिंदगी से सीधे जुड़ सके. यही कारण है कि उनके लेखन और विश्लेषण में केवल पारंपरिक बातें नहीं, बल्कि करियर, रिश्ते, मानसिक तनाव, सामाजिक बदलाव, तकनीक और बदलती जीवनशैली जैसे विषय भी दिखाई देते हैं.

उन्होंने Indian Institute of Mass Communication (IIMC), New Delhi से पत्रकारिता और IIMT University Meerut से ज्योतिष शास्त्र व वास्तु शास्त्र की पढ़ाई की है और Astrosage व Astrotalk जैसे प्लेटफॉर्म्स के साथ भी काम किया है. मीडिया, ऑडियंस बिहेवियर, डिजिटल पब्लिशिंग और कंटेंट रणनीति की समझ ने उनके काम को अलग पहचान दी है.

हृदेश कुमार सिंह के कई ज्योतिषीय और सामाजिक विश्लेषण समय-समय पर चर्चा में रहे हैं. राजनीति, शेयर बाजार, मनोरंजन जगत, AI और बदलते सामाजिक माहौल जैसे विषयों पर उनके आकलनों ने लोगों का ध्यान आकर्षित किया है. उनके विश्लेषण वैदिक गणना, गोचर, मेदिनी ज्योतिष और समाज की बदलती मानसिकता की समझ पर आधारित होते हैं.

वे वैदिक ज्योतिष, होरा शास्त्र, संहिता, मेदिनी ज्योतिष, अंक ज्योतिष और वास्तु शास्त्र जैसे विषयों पर अध्ययन और लेखन करते रहे हैं. करियर, विवाह, व्यापार, शिक्षा और जीवन के महत्वपूर्ण फैसलों से जुड़े विषयों पर वे पारंपरिक ज्योतिष को आधुनिक जीवन की वास्तविक परिस्थितियों से जोड़कर देखने का प्रयास करते हैं.

डिजिटल दौर में ज्योतिष को नई पीढ़ी तक पहुंचाने के लिए उन्होंने 'Gen-Z Horoscope' जैसे कॉन्सेप्ट पर भी काम किया, जिसमें राशिफल को केवल भाग्य या डर से जोड़कर नहीं, बल्कि career pressure, relationship confusion, emotional wellbeing और real-life decision making जैसी बातों से जोड़ा गया.

उनका मानना है कि आज के समय में सबसे बड़ी चुनौती जानकारी की कमी नहीं, बल्कि सही समझ की कमी है. वे ज्योतिष को ऐसा माध्यम मानते हैं, जो व्यक्ति को डराने के बजाय उसे बेहतर निर्णय लेने और खुद को समझने में मदद कर सकता है.

श्रीमद्भगवद्गीता के कर्म सिद्धांत, भगवान बुद्ध के संतुलन के विचार, सूफी चिंतन और आधुनिक मनोविज्ञान से प्रभावित उनकी सोच उनके लेखन में भी दिखाई देती है. यही वजह है कि उनका काम केवल भविष्यवाणी तक सीमित नहीं रहता, बल्कि लोगों को सोचने और अपने जीवन को नए नजरिए से देखने के लिए प्रेरित करता है.

ज्योतिष और मीडिया के अलावा उन्हें सिनेमा, संगीत, साहित्य, राजनीति, बाजार, पर्यावरण, ग्रामीण जीवन और यात्राओं में विशेष रुचि है. इन अनुभवों का असर उनके विषय चयन और लेखन शैली में साफ दिखाई देता है.

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