गांव में कैसे खोलें ट्रैक्टर की एजेंसी? कितना आएगा कुल खर्च
गांव में खुद का बड़ा कारोबार शुरू करने की सोच रहे हैं. तो ट्रैक्टर एजेंसी आज के समय का सबसे मुनाफे वाला बिजनेस बन चुका है. सही जमीन और बजट से लेकर डीलरशिप हासिल करने का पूरा खर्चा कितना होगा जान लें.

- इसमें 50 लाख से 1 करोड़ रुपये तक का निवेश लग सकता है.
गांव में खेती में फसल उगाकर ही नहीं बल्कि उसको एक कारोबार के तौर पर भी देखा जा सकता है. खेती में अब किसानों की शारीरिक मेहनत के अलावा मशीनों का भी इस्तेमाल काफी होने लगा है. खेती में अब ट्रैक्टर हर किसान की जरूरत है. चाहे खेत की जुताई करनी हो या फसल मंडी तक पहुंचानी हो. इसलिए अगर आप अपने ग्रामीण इलाके और नजदीकी तहसील में एक लंबे समय तक चलने वाला बिजनेस तलाश रहे हैं. तो ट्रैक्टर की डीलरशिप लेना एक बढ़िया मौका है.
महिंद्रा, सोनालीका, स्वराज, जॉन डियर और मैसी फर्ग्यूसन जैसे बड़े ब्रांड्स हर साल अपने डीलरशिप नेटवर्क को ग्रामीण इलाकों तक बढ़ा रहे हैं. अगर आपके पास थोड़ी जमीन, सही प्लानिंग और जरूरी निवेश के लिए पैसे हैं. तो आप गांव में ही रहकर हर महीने लाखों रुपये का टर्नओवर आसानी से निकाल सकते हैं. चलिए आपको बताते हैं कि कैसे खोल सकते हैं गांव में ट्रैक्टर की एजेंसी.
इस तरह करें शुरुआत
गांव में ट्रैक्टर एजेंसी खोलने के लिए सबसे पहले सही लोकेशन और सही जगह की होना जरूरी है . आपकी शॉप या शोरूम ऐसी जगह होना चाहिए जो मेन सड़क या हाईवे से सीधे जुड़ा हो जहां ट्रॉलियां और बड़े ट्रेलर्स बिना किसी परेशानी के आ-जा सकें. सामान्य तौर पर किसी भी मान्यता प्राप्त कंपनी की एजेंसी शुरू करने के लिए लगभग 3000 से 4000 वर्ग फुट जगह की जरूरत पड़ती है. इस पूरे स्पेस को आपको तीन अलग हिस्सों में बांटना होता है.
पहला हिस्सा आपका मेन डिस्प्ले शोरूम और कस्टमर लाउंज बनेगा. जहां किसान बैठकर बात कर सकें. दूसरा हिस्सा स्टॉकयार्ड होगा. जहां नए ट्रैक्टर और खेती के उपकरण सुरक्षित खड़े किए जा सकें. तीसरा और सबसे जरूरी हिस्सा एक पूरी तरह से सर्विस वर्कशॉप के लिए होगा. जहां टूल्स, लिफ्ट और स्पेयर पार्ट्स की प्रॉपर व्यवस्था हो जिससे किसानों को आफ्टर-सेल्स सर्विस में कोई दिक्कत न आए.

एजेंसी शुरू करने में कुल कितना आएगा खर्च?
अब बात करते हैं सबसे जरूरी पहलू यानी बजट की. गांव जैसे इलाके में एक अधिकृत ट्रैक्टर डीलरशिप सेटअप करने के लिए कुल बजट लगभग 50 लाख से 1 करोड़ रुपये के बीच बैठता है. इस पूरे खर्च को आप चार मुख्य हिस्सों में समझ सकते हैं. सबसे पहले कंपनी की फ्रेंचाइजी फीस और सिक्योरिटी डिपॉजिट आता है. जो ब्रांड के हिसाब पर डिपेंड करता है जो कि 5 से 10 लाख रुपये तक हो सकता है.
इसके बाद शोरूम की ब्रांडिंग, इंटीरियर, ऑफिस सेटअप और वर्कशॉप टूल्स में लगभग 10 से 15 लाख रुपये का खर्च आता है. सबसे बड़ा हिस्सा इन्वेंटरी का होता है. जहां शोरूम पर डिस्प्ले के लिए 4 से 6 नए ट्रैक्टर और जरूरी स्पेयर पार्ट्स रखने में 30 से 40 लाख रुपये लगते हैं. बाकी 8 से 10 लाख रुपये वर्किंग कैपिटल के तौर पर रखने चाहिए. जिससे स्टाफ की सैलरी, बिजली बिल और शुरुआती लोकल मार्केटिंग का खर्च आसानी से संभाला जा सके.

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कैसे मिलती है एजेंसी?
डीलरशिप लेने के लिए सबसे पहले अपने इलाके की मिट्टी और फसलों के हिसाब से तय करें कि किसानों को किस हॉर्सपावर और ब्रांड के ट्रैक्टर ज्यादा पसंद हैं. ब्रांड तय होने के बाद आप सीधे कंपनी के रीजनल सेल्स ऑफिस या आधिकारिक पोर्टल के जरिए डीलरशिप फॉर्म भर सकते हैं. कंपनी की टीम आपकी लोकेशन, सिविल बैकग्राउंड और फाइनेंशियल कैपेसिटी को वेरिफाई करने के बाद एग्रीमेंट साइन कराती है.
इसके लिए जीएसटी नंबर, ट्रेड लाइसेंस, पैन और जमीन के पुख्ता कागजात जरूरी होते हैं. कमाई की बात करें तो ट्रैक्टर डीलरशिप में मार्जिन सिर्फ गाड़ी की सीधी बिक्री तक सीमित नहीं रहता. हर ट्रैक्टर की सेल पर अच्छा कमीशन तो मिलता ही है. इसके साथ ही इंप्लीमेंट्स जैसे रोटावेटर, कल्टीवेटर, इंजन ऑयल, जेनुइन स्पेयर पार्ट्स, रूटीन सर्विसिंग और बैंक लोन या इंश्योरेंस फाइनेंसिंग से लगातार हर महीने रेगुलर कमाई होती रहती है.
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