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बंजर जमीन को हरा भरा कर देंगी ये तकनीकें, बेहद आसान है इनका इस्तेमाल

देश में लाखों हेक्टेयर जमीन ऐसी है, जहां मिट्टी खराब होने के कारण खेती करना मुश्किल हो जाता है. लेकिन कुछ आसान तरीकों और खास फसलों की मदद से बंजर जमीन को दोबारा उपजाऊ बनाया जा सकता है. जानिए..

Soil Fertility Improvement: देश में कई किसान ऐसे हैं, जिनके पास जमीन तो है, लेकिन मिट्टी खराब होने की वजह से वे ठीक से खेती नहीं कर पाते. कहीं जमीन में नमक की मात्रा बढ़ गई है, तो कहीं मिट्टी में जरूरी पोषक तत्वों की कमी हो गई है. ऐसे में फसल उगाना किसानों के लिए मुश्किल हो जाता है. 

लेकिन अच्छी बात यह है कि कुछ आसान तरीकों को अपनाकर ऐसी जमीन को फिर से खेती के लायक बनाया जा सकता है. इसके लिए खेत में कुछ खास फसलें उगाने से लेकर मिट्टी में प्राकृतिक खाद मिलाने तक के उपाय काम आ सकते हैं. आइए जानते हैं कि किसान अपनी बंजर जमीन को दोबारा उपजाऊ बनाने के लिए क्या कर सकते हैं.

मिट्टी की जांच

अगर खेत की मिट्टी खराब हो गई है, तो सबसे पहले उसकी जांच कराना जरूरी है. इससे पता चलता है कि जमीन में किस चीज की कमी है और मिट्टी में नमक की मात्रा ज्यादा तो नहीं है. मिट्टी में नाइट्रोजन, फास्फोरस, पोटेशियम, जिंक और आयरन जैसे पोषक तत्वों की कमी होने पर फसल की बढ़त पर असर पड़ सकता है. जांच की रिपोर्ट के आधार पर किसान खाद और दूसरी चीजों का इस्तेमाल कर सकते हैं. इससे बिना जरूरत खाद डालने पर होने वाला खर्च भी बच सकता है.

खेत में नमक जमा है तो क्या करें?

कई बार जमीन की ऊपरी सतह पर नमक जमा हो जाता है. इससे पौधों की जड़ों को पानी और पोषण लेने में परेशानी होती है. ऐसी जमीन को सुधारने के लिए पहले यह पता करना जरूरी है कि मिट्टी में नमक कितना है और पानी की निकासी कैसी है. जरूरत के मुताबिक खेत में पानी की निकासी का इंतजाम किया जा सकता है. जहां पानी की अच्छी निकासी हो, वहां साफ पानी से नमक को जड़ों की गहराई से नीचे पहुंचाने में मदद मिल सकती है. लेकिन बिना जांच के नमक वाली मिट्टी को इधर-उधर फेंकना या नाले में बहाना सही तरीका नहीं है.
बंजर जमीन को हरा भरा कर देंगी ये तकनीकें, बेहद आसान है इनका इस्तेमाल

यह भी पढ़ें: फसल खराब होने पर बीमा का पैसा कैसे मिलेगा? किसान ऐसे करें क्लेम

ढैंचा की फसल से बढ़ेगी मिट्टी की ताकत

बंजर जमीन को सुधारने के लिए ढैंचा की फसल मददगार हो सकती है. इसे हरी खाद वाली फसल कहा जाता है. किसान इसे खाली खेत में उगा सकते हैं और करीब 30 से 45 दिन बाद, फसल की बढ़त के हिसाब से, मिट्टी में मिला सकते हैं. इसके पौधे गलकर खाद का काम करते हैं और मिट्टी में जैविक पदार्थ बढ़ाने में मदद करते हैं. इससे मिट्टी की बनावट सुधर सकती है और आगे बोई जाने वाली फसल को फायदा मिल सकता है.

सनई उगाकर भी सुधार सकते हैं जमीन

ढैंचा की तरह सनई भी हरी खाद के रूप में इस्तेमाल की जाती है. यह तेजी से बढ़ने वाली फसल है. किसान इसे खाली खेत में उगाकर उचित समय पर मिट्टी में मिला सकते हैं. इसके पौधे गलने के बाद मिट्टी में जैविक पदार्थ बढ़ाते हैं. इससे मिट्टी नरम बनाने और उसकी पानी रोकने की क्षमता सुधारने में मदद मिल सकती है. हालांकि, बुवाई का सही समय इलाके, मौसम और खेत की हालत के हिसाब से तय करना चाहिए. कई किसान फसल कटने के बाद खेत में बचे डंठल और पत्तियां जला देते हैं. इसके बजाय फसल के अवशेषों को मिट्टी में मिलाया जा सकता है या उनसे कंपोस्ट खाद तैयार की जा सकती है. 

यह भी पढ़ें: फसल नुकसान पर राहत का ऐलान, 3 महीने बिजली बिल भरने से भी छुटकारा!

मनस्वी चौहान एबीपी नेटवर्क के साथ इंटर्न के तौर पर काम कर रही हैं, जहां वह एग्रीकल्चर बीट पर खबरें लिखती हैं. खेती, किसानों और एग्रीकल्चर से जुड़ी स्टोरीज लिखते हुए उनकी कोशिश रहती है कि खबर की जानकारी आसान और साफ भाषा में लोगों तक पहुंचे.

मनस्वी अपने कॉलेज की मीडिया टीम का हिस्सा रह चुकी हैं. इस दौरान उन्हें लाइव इवेंट्स की कवरेज, एंकरिंग और रिपोर्टिंग का मौका प्राप्त हुआ. यहां उन्हें खबरों पर रिसर्च करने, कंटेंट लिखने और किसी स्टोरी को सही तरीके से लोगों तक पहुंचाने का एक्सपीरियंस मिला.

पढ़ाई की बात करें तो मनस्वी मंदसौर यूनिवर्सिटी से Bachelor’s in Journalism and Mass Communication की पढ़ाई कर रही हैं. राइटिंग और मीडिया में लगातार कुछ नया सीखते हुए वह अपनी राइटिंग को और बेहतर बनाने पर काम कर रही हैं.

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