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किसानों को मालामाल कर देगी स्वीट कॉर्न की खेती, जानें कैसे कमाएं मक्के से 3 गुना दाम

Sweet Corn Farming Tips: स्वीट कॉर्न की खेती आज के दौर की स्मार्ट फार्मिंग है जो साधारण मक्के जैसी मेहनत में तीन गुना मुनाफा देती है. मात्र 70 से 90 दिनों की यह फसल बाजार में महंगे दाम पर बिकती है.

Sweet Corn Farming Tips: आज के दौर में पारंपरिक खेती के साथ-साथ अगर किसान थोड़े स्मार्ट तरीके अपनाएं. तो कमाई को कई गुना बढ़ाया जा सकता है. स्वीट कॉर्न यानी मीठा मक्का इसका सबसे बेहतरीन उदाहरण है. दिखने में यह बिल्कुल साधारण मक्के जैसा ही होता है और इसे उगाने का तरीका भी लगभग वैसा ही है. लेकिन जब बात मुनाफे की आती है. तो यह साधारण मक्के को कोसों पीछे छोड़ देता है.

स्वीट कॉर्न की मांग शहरों के बड़े मॉल्स, पिज्जा आउटलेट्स और सिनेमाघरों में साल भर बनी रहती है. इसकी सबसे बड़ी खासियत यह है कि यह कम समय में तैयार होने वाली फसल है. जिससे किसान साल में कई बार पैदावार ले सकते हैं. अगर आप भी कम मेहनत में अपनी स्वीट इनकम शुरू करना चाहते हैं. तो जान लीजिए सबसे बेस्ट तरीका.

स्वीट कार्न उगाने का बेस्ट तरीका

स्वीट कॉर्न की अच्छी पैदावार के लिए सही समय और सही बीज का चुनाव करना सबसे जरूरी कदम है. इसे उगाने के लिए दोमट मिट्टी सबसे अच्छी मानी जाती है और खेत में जल निकासी का पूरा इंतजाम होना चाहिए ताकि जड़ों में पानी न रुके.

  • जून-जुलाई या फरवरी-मार्च का महीना इसकी बुवाई के लिए सबसे बेहतरीन माना जाता है.
  • कतार से कतार की दूरी 60 सेंटीमीटर और पौधे से पौधे की दूरी 20 सेंटीमीटर रखने से ग्रोथ अच्छी होती है.

शुरुआती समय में सही खाद और नियमित हल्की सिंचाई से पौधे तेजी से बढ़ते हैं और भुट्टों का साइज भी काफी शानदार निकलता है.

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मुनाफा तीन गुना ज्यादा

स्वीट कॉर्न की खेती की सबसे अच्छी बात यह है कि इसके लिए किसानों को किसी बहुत अलग या कठिन तकनीक की जरूरत नहीं पड़ती. जैसे साधारण मक्का बोया जाता हैय वैसे ही स्वीट कॉर्न के बीज लगाए जाते हैं. हालांकि, साधारण मक्का पकने में ज्यादा समय लेता है और उसका भाव भी कम मिलता है.

जबकि स्वीट कॉर्न सिर्फ 70 से 90 दिनों में तैयार हो जाता है. बाजार में इसकी कीमत साधारण मक्के के मुकाबले तीन से चार गुना ज्यादा होती है. कम समय में फसल तैयार होने की वजह से खेत जल्दी खाली हो जाते हैं, जिससे किसान अगली फसल की प्लानिंग भी जल्दी कर सकते हैं.

बाजार की डिमांड 

आजकल फिटनेस और बदलती लाइफस्टाइल के कारण लोग स्वीट कॉर्न को काफी पसंद कर रहे हैं. यही वजह है कि मंडियों के अलावा यह फ्रोजन फूड के रूप में भी बहुत महंगे दामों पर बिकता है. सरकार भी अब किसानों को पारंपरिक फसलों से हटकर ऐसी नकदी फसलों की ओर प्रोत्साहित कर रही है.

  • उद्यान विभाग द्वारा किसानों को सब्सिडी और अच्छी क्वालिटी के बीज उपलब्ध कराए जा रहे हैं.
  • सिंचाई की कम जरूरत और कंपनियों से डायरेक्ट कॉन्ट्रैक्ट का विकल्प लागत कम कर मुनाफा बढ़ाता है.

यह फसल किसानों को बिचौलियों के चंगुल से निकालकर सीधे बड़े रिटेल मार्केट और फूड इंडस्ट्री से जोड़ती है.

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About the author नीलेश ओझा

नीलेश ओझा पिछले पांच साल से डिजिटल पत्रकारिता में सक्रिय हैं. उनकी लेखन शैली में तथ्यों की सटीकता और इंसानी नजरिए की गहराई दोनों साथ-साथ चलती हैं.पत्रकारिता उनके लिए महज़ खबरें इकट्ठा करने या तेजी से लिखने का काम नहीं है. वह मानते हैं कि हर स्टोरी के पीछे एक सोच होनी चाहिए.  

कुछ ऐसा जो पाठक को सिर्फ जानकारी न दे बल्कि सोचने के लिए भी मजबूर करे. यही वजह है कि उनकी स्टोरीज़ में भाषा साफ़ होती है.लिखने-पढ़ने का शौक बचपन से रहा है. स्कूल की नोटबुक से शुरू हुआ यह सफर धीरे-धीरे पेशेवर लेखन और पत्रकारिता तक पहुंचा. आज भी उनके लिए लेखन सिर्फ पेशा नहीं है यह खुद को समझने और दुनिया से संवाद करने का ज़रिया है.

पत्रकारिता के अलावा वह साहित्य और समकालीन शायरी से भी गहराई से जुड़े हुए हैं. कभी भीड़ में तो कभी अकेले में ख्यालों को शायरी की शक्ल देते रहते हैं. उनका मानना है कि पत्रकारिता का काम सिर्फ घटनाएं गिनाना नहीं है. बल्कि पाठक को उस तस्वीर के उन हिस्सों तक ले जाना है. जो अक्सर नजरों से छूट जाते हैं.

उन्होंने स्पोर्ट्सविकी, क्रिकेट एडिक्टर, इनशॉर्ट्स और जी हिंदुस्तान जैसे प्रमुख प्लेटफॉर्म्स के साथ काम किया है.

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