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10 बीघा खेत में कितना मुनाफा देगी गन्ने की फसल? जान लें हिसाब-किताब

10 बीघा में गन्ने की बुवाई से क्या कितना मुनाफा कमाया जा सकता है. इस सीजन आप गन्ने की खेती में लागत निकालकर कितना मुनाफा घर ले जा सकते हैं? जान लीजिए इसका पूरा गणित.

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  • गन्ने की 10 बीघा खेती में शुरुआती कुल लागत 1.35 लाख तक हो सकती है.
  • औसत 750 क्विंटल उत्पादन से 2.85 लाख रुपये की इनकम कमा सकते हैं.
  • सभी लागत घटाकर किसान को कुल मुनाफा 1.5 से 1.6 लाख तक पहुंचता है.

खेती-किसानी में आज के दौर का किसान सिर्फ पुराने तरीकों से खेती करना सही नहीं है. अब बहुत से किसान खेती में जितनी मेहनत कर रहे हैं उतना ही मुनाफा हासिल कर रहे हैं. देश में एक बड़े पैमाने पर गन्ने की खेती की जाती है. अगर आप इस सीजन में गन्ने की खेती करने का मन बना रहे हैं. तो यह फैसला आपके लिए बेहद फायदेमंद सौदा साबित हो सकता है. गन्ने की खेती अगर 10 बीघा में की जाए तो मुनाफा और भी ज्यादा होता है. उत्तर भारत के राज्यों में 10 बीघा यानी करीब 2 एकड़ जमीन बनती है जो कि काफी जमीन मानी जाती है. 

गन्ना एक ऐसी कैश क्रॉप है. जिसमें मौसम का थोड़ा बहुत उतार-चढ़ाव झेलने की ताकत होती है और सबसे बड़ी राहत यह कि इसका खरीदार तय होता है. हालांकि गन्ना पूरे एक साल की मेहनत मांगता है इसलिए हाथ में कितना पैसा बचेगा यह समझना सबसे ज्यादा जरूरी है. बीज की खरीद से लेकर मिल के कांटे तक की लागत और उसके बाद मिलने वाला प्रॉफिट सब कुछ सही प्लानिंग पर डिपेंड करता है. चलिए आपको बताते हैं  कि10 बीघा में गन्ने का पूरा गणित क्या बैठता है.

10 बीघे गन्ने में शुरूआती कुल लागत

10 बीघा खेत में गन्ना बोने का आपको पहले दिन से ही पूरा बजट लेकर चलना होगा. इसकी खेती के लिए सबसे पहले आपको खेत की तीन-चार बार गहरी जुताई, पाटा और लेजर लेवलर का खर्च निकालना होगा. जो कि करीब 15000 से 18000 रुपये तक आ जाता है. इसके बाद बारी आती है बीज की 10 बीघा जमीन के लिए लगभग 40 से 50 क्विंटल ट्रेंच विधि या फिर सामान्य कटिंग वाले बीज की जरूरत पड़ती है. जिसकी लागत 18000 से 20000 रुपये बैठती है. 

डीएपी, यूरिया, पोटाश, जिंक और कीटनाशक मिलाकर खाद-दवाइयों का खर्च 30000 से 35000 रुपये के आसपास पहुंच जाता है. गन्ने को पूरे सीजन में 6 से 8 बार पानी चाहिए होता हैं. जिसका सिंचाई खर्च करीब 20000 रुपये मानकर चलिए. इसके अलावा बंधाई, निराई-गुड़ाई और आखिर में कटाई और ढुलाई की लेबर सबसे बड़ा हिस्सा लेती है. जो 40000 रुपये तक जा सकती है. यानी 10 बीघे में बीज से लेकर मिल तक पहुंचाने का कुल खर्च करीब 1.25 लाख से 1.35 लाख रुपये तक आ जाता है.


10 बीघा खेत में कितना मुनाफा देगी गन्ने की फसल? जान लें हिसाब-किताब

इतनी हो सकती है कमाई

गन्ने की फसल में कमाई पूरी तरह इस बात पर टिकी होती है कि आपने वैरायटी कौन सी चुनी है और खेत का रख-रखाव कैसा रहा है. अगर आप सामान्य पारंपरिक तरीके से खेती करते हैं. तो 10 बीघे में औसतन 600 से 700 क्विंटल गन्ना निकलता है. वहीं अगर ट्रेंच विधि अपनाई जाए और अच्छी रोगरोधी किस्म हो तो यह उत्पादन 800 से 900 क्विंटल तक आराम से पहुंच जाता है. अगर हम एक एवरेज आंकड़ा लें तो भी 750 क्विंटल आ सकता है.

तो मौजूदा राज्य समर्थित मूल्य यानी एसएपी SAP के हिसाब से जो लगभग 370 से 390 रुपये प्रति क्विंटल चल रहा है.  तो 750 क्विंटल गन्ने को 380 रुपये के औसत भाव से मिल को बेचने पर आपको सीधे-सीधे 285000 रुपये की इनकम मिलती है. अगर पैदावार 850 क्विंटल छू गई तो यही आंकड़ा सवा तीन लाख रुपये के पार निकल जाता है.

यह भी पढ़ें: टाइगर रिजर्व क्षेत्र में करते हैं खेती? इन बातों का रखें ख्याल

हाथ में कितना बचेगा मुनाफा?

अब आते हैं सबसे अहम सवाल पर कि सालभर की पसीना बहाने के बाद किसान के बैंक खाते में क्या बचा. अगर आपकी कुल कमाई 285000 रुपये हुई और उसमें से 1.30 लाख रुपये का पूरा खर्च घटा दिया जाए. तो 10 बीघे से आपका लगभग 150000 से 160000 रुपये का मुनाफा बचता है. अगर मैनेजमेंट बढ़िया रहा और पैदावार अच्छी हुई तो यह बचत 2 लाख रुपये तक जा सकती है. 


10 बीघा खेत में कितना मुनाफा देगी गन्ने की फसल? जान लें हिसाब-किताब

गन्ने का एक और बड़ा फायदा है इंटरक्रॉपिंग. गन्ने की दो लाइनों के बीच खाली पड़ी जगह में आप सरसों, आलू, धनिया, उड़द या लहसुन जैसी छोटी फसलें लगा सकते हैं. इससे खेत का खाद-पानी का खर्च उन फसलों की बिक्री से ही निकल आता है और गन्ने का पूरा का पूरा पैसा सीधे आपकी बचत बन जाता है. 

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About the author नीलेश ओझा

नीलेश ओझा पिछले पांच साल से डिजिटल पत्रकारिता में सक्रिय हैं. उनकी लेखन शैली में तथ्यों की सटीकता और इंसानी नजरिए की गहराई दोनों साथ-साथ चलती हैं.पत्रकारिता उनके लिए महज़ खबरें इकट्ठा करने या तेजी से लिखने का काम नहीं है. वह मानते हैं कि हर स्टोरी के पीछे एक सोच होनी चाहिए.  

कुछ ऐसा जो पाठक को सिर्फ जानकारी न दे बल्कि सोचने के लिए भी मजबूर करे. यही वजह है कि उनकी स्टोरीज़ में भाषा साफ़ होती है.लिखने-पढ़ने का शौक बचपन से रहा है. स्कूल की नोटबुक से शुरू हुआ यह सफर धीरे-धीरे पेशेवर लेखन और पत्रकारिता तक पहुंचा. आज भी उनके लिए लेखन सिर्फ पेशा नहीं है यह खुद को समझने और दुनिया से संवाद करने का ज़रिया है.

पत्रकारिता के अलावा वह साहित्य और समकालीन शायरी से भी गहराई से जुड़े हुए हैं. कभी भीड़ में तो कभी अकेले में ख्यालों को शायरी की शक्ल देते रहते हैं. उनका मानना है कि पत्रकारिता का काम सिर्फ घटनाएं गिनाना नहीं है. बल्कि पाठक को उस तस्वीर के उन हिस्सों तक ले जाना है. जो अक्सर नजरों से छूट जाते हैं.

उन्होंने स्पोर्ट्सविकी, क्रिकेट एडिक्टर, इनशॉर्ट्स और जी हिंदुस्तान जैसे प्रमुख प्लेटफॉर्म्स के साथ काम किया है.

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