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बेचने हैं अपने पुराने कृषि यंत्र, जानिए कहां है इनका सबसे बड़ा मार्केट?

Old Agricultural Machines Selling Market: पुराने कृषि यंत्रों को अच्छी कीमत पर बेचने के लिए सही बाजार की तलाश है? जानें देश में कहां खरीदे और बेचे जाते हैं पुराने कृषि यंत्र.

Old Agricultural Equipments Selling Market: खेती में मशीनों का इस्तेमाल लगातार बढ़ रहा है. ट्रैक्टर, रोटावेटर, कल्टीवेटर, थ्रेसर, सीड ड्रिल जैसे कृषि यंत्र किसानों का काम आसान करते हैं और समय भी बचाते हैं. लेकिन कई साल इस्तेमाल होने के बाद जब मशीन पुरानी पड़ने लगती है. तब उसे बेचने की जरूरत महसूस होती है. सबसे बड़ी परेशानी सही खरीदार खोजने को लेकर आती है. गांव में मशीन बेचने पर कई बार किसान को उसकी सही कीमत नहीं मिलती. लोकर व्यापारी कम दाम लगाते हैं और किसान के पास खरीदार तलाशने के कम ऑप्शन रहते हैं. 

लेकिन अब देश में बढ़ते डिजिटाइजेशन की वजह से इस काम में मोबाइल और इंटरनेट का सहारा लिया जा रहा है. अब पुराने कृषि यंत्रों को ऑनलाइन बेचना काफी आसान हो गया है. कई डिजिटल प्लेटफॉर्म किसानों को सीधे खरीदारों से जोड़ रहे हैं. यहां मशीन की फोटो, मॉडल, कंडीशन और कीमत की जानकारी डालकर लिस्टिंग बनाई जा सकती है. इससे मशीन की पहुंच एक गांव तक ही नहीं रहती. दूसरे जिलों से लेकर दूसरे राज्यों तक खरीदारों से बातचीत कर के मशीनें बेची जा रही हैं. यही वजह है कि सेकंड हैंड कृषि मशीनरी का ऑनलाइन बाजार तेजी से बड़ा हो रहा है.

ऑनलाइन मार्केट सबसे ज्यादा खरीददार

पुराने कृषि यंत्र बेचने का तरीका अब काफी बदल चुका है. पहले किसान मशीन बेचने के लिए लोकर डीलर, व्यापारी, रिश्तेदारों और आसपास के किसानों के भरोसे रहते थे. अब ऑनलाइन मार्केट से तरीका बदल गया है. सरकार की FARMS ऐप पर कृषि मशीनरी की खरीद बिक्री से जुड़ी सर्विस मौजूद है. इसके अलावा प्राइवेट डिजिटल प्लेटफॉर्म भी सेकंड हैंड ट्रैक्टर और कृषि उपकरणों की लिस्टिंग का ऑप्शन देते हैं. किसान मशीन की फोटो खींचकर उसके साथ मॉडल, इस्तेमाल की अवधि, कंडीशन और कीमत की जानकारी डाल सकता है. 

खरीदार इन जानकारियों को देखकर सीधे काॅन्टेक्ट कर सकता है. इससे बातचीत सीधे दोनों के बीच होती है. ऑनलाइन लिस्टिंग का एक बड़ा फायदा ज्यादा खरीदारों तक पहुंच बनना है. गांव में दस लोग मशीन देखने पहुंचें इसका इंतजार करने की जरूरत नहीं रहती. इंटरनेट के जरिए कई जगहों से इंक्वायरी आ सकती है. अच्छी कंडीशन वाली मशीन के लिए कंपटीशन बढ़ने पर बेहतर रेट मिलने के चांस भी रहते है. किसान को बस मशीन की जानकारी बिल्कुल सही देनी चाहिए.


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इन प्लेटफॉर्म पर मिल सकते हैं खरीदार

पुरानी कृषि मशीनरी के लिए MYHAL, TractorBazar और KhetiGaadi जैसे प्लेटफॉर्म बढ़िया हैं. इन जगहों पर ट्रैक्टर के साथ रोटावेटर, कल्टीवेटर, थ्रेसर और दूसरे कृषि उपकरणों की लिस्टिंग देखने को मिलती है. किसान अपनी मशीन की जानकारी डालकर जो इन मशीनों को खरीदने में दिलचस्पी दिखा रहे हैं उनसे बातचीत शुरू कर सकते है. खरीदार भी अपनी जरूरत, बजट और लोकेशन के हिसाब से मशीन खोज सकता है. इसका सीधा फायदा किसानों के हुआ है क्योंकि इससे उनके लिए मार्केट और बढ़ा हो गया है.

मान लीजिए किसी किसान के जिले में उसके पुराने रोटावेटर का खरीदार नहीं मिल रहा है. ऑनलाइन लिस्टिंग के जरिए दूसरे जिले का किसान उसी मशीन में दिलचस्पी दिखा सकता है. इससे बिक्री का मौका बढ़ जाता है. हालांकि ऑनलाइन सौदा करते समय सावधानी भी जरूरी है. खरीदार की पहचान, पेमेंट का तरीका और मशीन के कागजात से जुड़ी जानकारी पहले जांच लें. आपको बता दें ऑनलाइन मार्केट के अलावा देश के कुछ शहरों में आपको इस तरह के छोटे-छोटे बाजार भी मिल जाएंगे जहां आप खुद जाकर अपनी मशीनें बेच सकते हैं या खरीद सकते हैं.


बेचने हैं अपने पुराने कृषि यंत्र, जानिए कहां है इनका सबसे बड़ा मार्केट?

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बेचने से पहले मशीन की कीमत ऐसे तय करें

पुराना कृषि यंत्र बेचते समय सबसे पहले उसकी हालिया कंडीशन देखें. मशीन की सफाई कराएं और छोटी खराबियां मौजूद हैं तो उन्हें भी ठीक कराएं. इसके बाद मशीन की साफ तस्वीरें अलग अलग एंगल से खींचें. लिस्टिंग में मॉडल, खरीद का साल, कितना इस्तेमाल की गई, सर्विस रिकॉर्ड जैसी जानकारी जरूर दें. मशीन के साथ बिल, रजिस्ट्रेशन और दूसरे जरूरी कागजात हैं तो उन्हें भी तैयार रखें. कीमत तय करने से पहले उसी मॉडल की पुरानी मशीनों की ऑनलाइन कीमत देखना समझदारी है. 

इससे बाजार का मौजूदा रेट समझने में मदद मिलेगी. बहुत ज्यादा कीमत रखने पर खरीदार कम मिल सकते हैं. बहुत कम कीमत पर बेचने से किसान को नुकसान हो सकता है. इसलिए बाजार के हिसाब से सही कीमत रखना बेहतर रहेगा. ऐसे आपकी मशीन जल्दी बिक सकती है. 

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About the author नीलेश ओझा

नीलेश ओझा पिछले पांच साल से डिजिटल पत्रकारिता में सक्रिय हैं. उनकी लेखन शैली में तथ्यों की सटीकता और इंसानी नजरिए की गहराई दोनों साथ-साथ चलती हैं.पत्रकारिता उनके लिए महज़ खबरें इकट्ठा करने या तेजी से लिखने का काम नहीं है. वह मानते हैं कि हर स्टोरी के पीछे एक सोच होनी चाहिए.  

कुछ ऐसा जो पाठक को सिर्फ जानकारी न दे बल्कि सोचने के लिए भी मजबूर करे. यही वजह है कि उनकी स्टोरीज़ में भाषा साफ़ होती है.लिखने-पढ़ने का शौक बचपन से रहा है. स्कूल की नोटबुक से शुरू हुआ यह सफर धीरे-धीरे पेशेवर लेखन और पत्रकारिता तक पहुंचा. आज भी उनके लिए लेखन सिर्फ पेशा नहीं है यह खुद को समझने और दुनिया से संवाद करने का ज़रिया है.

पत्रकारिता के अलावा वह साहित्य और समकालीन शायरी से भी गहराई से जुड़े हुए हैं. कभी भीड़ में तो कभी अकेले में ख्यालों को शायरी की शक्ल देते रहते हैं. उनका मानना है कि पत्रकारिता का काम सिर्फ घटनाएं गिनाना नहीं है. बल्कि पाठक को उस तस्वीर के उन हिस्सों तक ले जाना है. जो अक्सर नजरों से छूट जाते हैं.

उन्होंने स्पोर्ट्सविकी, क्रिकेट एडिक्टर, इनशॉर्ट्स और जी हिंदुस्तान जैसे प्रमुख प्लेटफॉर्म्स के साथ काम किया है.

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