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New Fruit Orchards: पेड़ों पर फल नहीं पैसे उगेंगे, इस तरीके से करें नये बागों की तैयारी

Fruit Gardening: सरकार की योजनाओं के तहत नये बागों की तैयारी और पुराने बागों के जीर्णोंद्धार के लिये किसानों को आर्थिक मदद भी दी जा रही है.

Fruit Gardening Technique:आज विदेशी बाजारों में भारत के फल और सब्जियों की मांग बढ़ती जा रही है. इसलिये सरकार और कृषि वैज्ञानिक लगातार बागवानी क्षेत्र के विकास-विस्तार पर जोर दे रहे हैं. सरकार की योजनाओं के तहत नये बागों की तैयारी और पुराने बागों के जीर्णोंद्धार के लिये किसानों को आर्थिक मदद भी दी जा रही है. इसलिये किसान जून-सितंबर तक अपने बागों की उचित देखभाल कर सकते हैं. इसके अलावा नये बागों की तैयारी भी कर सकते हैं. विदेशों में बढ़ती आम की मांग को पूरा करने के लिये किसान आम के नये बाग लगा सकते हैं.  कृषि विशेषज्ञों का मानना है कि आम के बागों में निवेश करने से किसानों को लंबे समय तक के लिये आमदनी का स्थाई जरिया मिल जाता है. इसलिये जरूरी है कि सभी सावधानियों को ध्यान में रखते हुये विशेषज्ञों की सलाह अनुसार नये बागों की तैयारी की जाये.

कहां लगायें आम के बाग
भारत के आंध्र प्रदेश, उत्तर प्रदेश, महाराष्ट्र, बिहार, कर्नाटक, तमिलनाडु, ओडिशा, पश्चिम बंगाल और गुजरात आदि राज्यों में आम की बागवानी बड़े पैमाने पर की जाती है. आम के बाग लगाने के लिये उस खेत को चुनें, जो बाजार और सड़क के आस-पास हो, इससे फलों की बिक्री और देखभाल में आसानी रहेगी. अच्छी पैदावार लेने के लिये सिंचाई की सुविधा, जलवायु और अच्छी मिट्टी वाली जमीन पर बाग की तैयारी करना लाभकारी रहता है.

ऐसे करें बाग की तैयारी
नये बाग को तैयार करने के लिये सबसे पहले खेत में मिट्टी के भुरभुरा होने तक गहरी जुताई का काम करते रहें. इसके अलावा खेतों में लगे अनावश्यक खरपतवारों को उखाड़ फेंके, इससे फलों की पैदावार काफी प्रभावित होती है. नये बागों में जल निकासी का प्रबंधन अवश्य करें, जिससे अधिक सिंचाई होने पर या बारिश के मौसम में पानी को खेतों से बाहर निकाला जा सके. पौधे लगाने से पहले बागों का सौरीकरण होना बेहद जरूरी है, तेज धूप के कारण जून-जुलाई के महिना सौरीकरण के लिये बेहतर रहता है. इससे बागों से कीड़े-मकौड़े निकल जाते हैं. 

गड्ढ़ों की खुदाई
बागों के लिये जमीन तैयार करने के बाद खेतों में गड्ढों की खुदाई करें, जिसमें पौधों की रोपाई की जा सके. इसके लिये अन-उपजाऊ मिट्टी में 1मी. ×1मी.×1मी. के आकार के गड्ढे खोदें. जबकि उपजाऊ जमीन में गड्ढों की खुदाई 30 सेमी. × 30 सेमी. × 30 सेमी. के आधार पर करें. 

  • खुदाई के दौरान मिट्टी को गड्ढे के चारों तरफ फैला दें और 2-4 हफ्तों तक इनमें सीधी धूप की तपिश लगने दें.
  • हर गड्ढे में 25 किलो सड़ी हुई गोबर की खाद, सुपर फास्फेट 250 ग्राम, क्यूनाल्फोस 1.5 फीसदी 50 ग्राम, नीम की खली 2 किलोग्राम, क्षारीय जमीन हो तो 250 ग्राम जिप्सम के साथ मिट्टी भर दें.
  • गड्ढों में उर्वरक डालने के बाद हल्की सिंचाई का काम कर देना चाहिये.

पौधों का रोपाई
गड्ढों को खाद-उर्वरक भरकर ठीक प्रकार से तैयार करने से पौधों की अच्छी बढ़वार होती है. इन गड्ढों में सावधानीपूर्वक फलों की पौध की रोपाई करें.

  • पौधों की रोपाई के 2 महिने तक हर 2-3 दिन में शाम के समय सिंचाई का काम जरूर करें. क्योंकि पौधों को बढ़ने के लिये पोषण और पानी की काफी जरूरत होती है.
  • अगर समय पर बारिश होती रहे तो सिंचाई की मात्रा में कमी कर दें.  
  • गर्मी के मौसम में हर 7-10 दिनों में सिंचाई अवश्य करनी चाहिये.
  • वहीं सर्दी के मौसम में 10-15 दिन के अंतराल पर पौधों को पानी दे सकते हैं.

 

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