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जैविक खेती अपनाकर बनें स्मार्ट किसान, सरकार से इस योजना में मिल रही आर्थिक मदद और ट्रेनिंग

Paramparagat Krishi Vikas Yojana: सरकार परंपरागत कृषि विकास योजना के जरिए किसानों को जैविक खेती के लिए 50,000 रुपये की मदद और ट्रेनिंग दे रही है. जान लीजिए कैसे मिलेगा फायदा.

Paramparagat Krishi Vikas Yojana: आज के दौर में जहां हर कोई अपनी सेहत को लेकर सजग हो रहा है. वहां जैविक यानी ऑर्गेनिक प्रोडक्ट्स की डिमांड आसमान छू रही है. इसी डिमांड को देखते हुए सरकार परंपरागत कृषि विकास योजना (PKVY) के जरिए किसानों को केमिकल फ्री खेती अपनाने के लिए प्रोत्साहित कर रही है. 

यह योजना मृदा स्वास्थ्य सुधार और पर्यावरण संरक्षण की दिशा में एक बड़ा कदम है. जिसका उद्देश्य क्लस्टर आधारित विकास के जरिए ऑर्गेनिक फार्मिंग को बढ़ावा देना है. अगर आप भी मिट्टी की उर्वरता बचाते हुए अपनी इनकम बढ़ाना चाहते हैं. तो यह योजना आपके लिए एक शानदार मौका है जो आर्थिक सहायता और टेक्निकल ट्रेनिंग दोनों मुहैया कराती है.

परंपरागत कृषि विकास योजना 

इस योजना का मुख्य फोकस उन किसानों पर है जो केमिकल वाले खाद और कीटनाशकों को छोड़कर प्राकृतिक तरीकों की तरफ मुड़ना चाहते हैं. सरकार का लक्ष्य इसके जरिए मिट्टी की सेहत में सुधार करना और सस्टेनेबल एग्रीकल्चर को गांव-गांव तक पहुँचाना है.

  • यह योजना क्लस्टर बेस्ड है. जहां कम से कम 20 हेक्टेयर जमीन वाले 50 या उससे अधिक किसानों का एक समूह बनाया जाता है.
  • यह सॉइल हेल्थ कार्ड योजना का ही एक विस्तार है. जो किसानों को मिट्टी की जांच के बाद सही जैविक उर्वरकों के इस्तेमाल की सलाह देती है.

इस मॉडल के जरिए न केवल खेती की लागत कम होती है. बल्कि किसान अपनी उपज का सर्टिफिकेशन कराके उसे ऊंचे दामों पर बेच सकते हैं.

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किसानों को मिलती है आर्थिक सहायता 

PKVY योजना के तहत किसानों को जैविक खेती की शुरुआत करने के लिए सीधे आर्थिक मदद दी जाती है. जिससे उन्हें बजट की कमी महसूस न हो. सरकार इसके लिए 3 साल के लिए प्रति हेक्टेयर 50000 रुपये की आर्थिक मदद प्रदान करती है.

  • कुल सहायता राशि में से 31000 रुपये (62%) सीधे किसानों को जैविक खाद, कीटनाशक और बीजों की खरीद के लिए दिए जाते हैं.
  • बाकी की राशि का इस्तेमाल क्लस्टर बनाने, ट्रेनिंग देने, सर्टिफिकेशन की फीस भरने और फसल की मार्केटिंग के लिए किया जाता है.

यह पैसा सीधे किसानों के खातों में ट्रांसफर किया जाता है. जिससे बिचौलियों का डर खत्म होता है और पूरी पारदर्शिता बनी रहती है.

ट्रेनिंग और पीजीएस सर्टिफिकेशन 

सिर्फ खेती करना ही काफी नहीं है. अपनी फसल को ऑर्गेनिक साबित करने के लिए सर्टिफिकेशन बहुत जरूरी है और PKVY इसमें किसानों की पूरी मदद करती है. इसके तहत किसानों को पार्टिसिपेटरी गारंटी सिस्टम (PGS) के जरिए सर्टिफिकेशन की सुविधा दी जाती है.

  • सरकार विशेषज्ञों के माध्यम से किसानों को जैविक खाद बनाने, कीट नियंत्रण के देसी तरीकों और फसल चक्र (Crop Rotation) की ट्रेनिंग देती है.
  • पीजीएस सर्टिफिकेशन मिलने के बाद किसान अपने उत्पादों पर जैविक भारत का लोगो लगा सकते हैं, जिससे ग्राहकों का भरोसा बढ़ता है.

योजना का जोर ऑर्गेनिक इनपुट्स के स्थानीय उत्पादन और मार्केटिंग पर है. जिससे किसानों को बड़े बाजारों और एक्सपोर्ट के अवसरों से जोड़ा जा सके.

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About the author नीलेश ओझा

नीलेश ओझा पिछले पांच साल से डिजिटल पत्रकारिता में सक्रिय हैं. उनकी लेखन शैली में तथ्यों की सटीकता और इंसानी नजरिए की गहराई दोनों साथ-साथ चलती हैं.पत्रकारिता उनके लिए महज़ खबरें इकट्ठा करने या तेजी से लिखने का काम नहीं है. वह मानते हैं कि हर स्टोरी के पीछे एक सोच होनी चाहिए.  

कुछ ऐसा जो पाठक को सिर्फ जानकारी न दे बल्कि सोचने के लिए भी मजबूर करे. यही वजह है कि उनकी स्टोरीज़ में भाषा साफ़ होती है.लिखने-पढ़ने का शौक बचपन से रहा है. स्कूल की नोटबुक से शुरू हुआ यह सफर धीरे-धीरे पेशेवर लेखन और पत्रकारिता तक पहुंचा. आज भी उनके लिए लेखन सिर्फ पेशा नहीं है यह खुद को समझने और दुनिया से संवाद करने का ज़रिया है.

पत्रकारिता के अलावा वह साहित्य और समकालीन शायरी से भी गहराई से जुड़े हुए हैं. कभी भीड़ में तो कभी अकेले में ख्यालों को शायरी की शक्ल देते रहते हैं. उनका मानना है कि पत्रकारिता का काम सिर्फ घटनाएं गिनाना नहीं है. बल्कि पाठक को उस तस्वीर के उन हिस्सों तक ले जाना है. जो अक्सर नजरों से छूट जाते हैं.

उन्होंने स्पोर्ट्सविकी, क्रिकेट एडिक्टर, इनशॉर्ट्स और जी हिंदुस्तान जैसे प्रमुख प्लेटफॉर्म्स के साथ काम किया है.

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