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क्या है राष्ट्रीय खाद्य तेल मिशन, जानें इस स्कीम से किसानों को कैसे मिलेगा बंपर मुनाफा?

National Mission on Edible Oils (NMEO): देश को खाद्य तेलों के उत्पादन में आत्मनिर्भर बनाने के लिए शुरू किया गया यह मिशन बेहद खास है. इससे तिलहन की खेती करने वाले किसानों की आमदनी भी काफी बढ़ जाएगी.

National Mission on Edible Oils (NMEO): भारत को खाद्य तेलों के मामले में पूरी तरह आत्मनिर्भर बनाने के लिए केंद्र सरकार ने राष्ट्रीय खाद्य तेल मिशन की शुरुआत की है. वर्तमान में भारत अपनी जरूरत का एक बड़ा हिस्सा विदेशों से इम्पोर्ट करता है. जिससे देश का भारी-भरकम पैसा बाहर चला जाता है. इसी निर्भरता को खत्म करने और घरेलू स्तर पर प्रोडक्शन को बढ़ावा देने के लिए यह मास्टर प्लान तैयार किया गया है. 

सरकार का फोकस देश में तिलहन फसलों जैसे सरसों, मूंगफली, सोयाबीन, सूरजमुखी और खास तौर पर पाम ऑयल की खेती को सातवें आसमान पर ले जाना है. इस मिशन के जरिए न सिर्फ देश का इम्पोर्ट बिल कम होगा, बल्कि ग्राउंड लेवल पर काम कर रहे किसानों की किस्मत भी पूरी तरह चमकने वाली है. चलिए आपको डिटेल में समझाते हैं कि यह स्कीम आखिर क्या है और कैसे यह किसानों की जेब भरने का काम करेगी.

तिलहन की खेती को मिलेगा तगड़ा बूस्ट

इस मिशन के तहत सरकार किसानों को तिलहन फसलों की तरफ शिफ्ट करने के लिए हर संभव मदद दे रही है. स्कीम का सबसे बड़ा फायदा यह है कि इसके जरिए किसानों को हाई-क्वालिटी के बीज, मॉडर्न एग्रीकल्चरल टूल्स और बेहतरीन टेक्नोलॉजी बहुत ही रियायती दरों पर प्रोवाइड कराई जाएगी. इतना ही नहीं किसानों को पारंपरिक खेती छोड़कर तिलहन अपनाने के लिए स्पेशल आर्थिक मदद भी दी जा रही है. 

किसानों के लिए खास ट्रेनिंग प्रोग्राम

सरकार का टारगेट देश में ऑइलसीड्स का रकबा बढ़ाना है, जिसके लिए क्लस्टर डेमोंस्ट्रेशन और किसानों के लिए खास ट्रेनिंग प्रोग्राम चलाए जा रहे हैं. इन सब सहूलियतों की वजह से किसानों की इनपुट कॉस्ट काफी कम हो जाएगी और वे बेहद कम लागत में एक शानदार और मुनाफे वाली फसल खड़ी कर सकेंगे.

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इन तरीकों से किसानों को मिलेगा बंपर मुनाफा

राष्ट्रीय खाद्य तेल मिशन के अंदर पाम ऑयल यानी ताड़ के तेल पर सबसे ज्यादा फोकस किया जा रहा है. खासकर हमारे उत्तर-पूर्वी राज्यों और अंडमान-निकोबार द्वीप समूह में जहां का मौसम इसके लिए एकदम परफेक्ट है. सरकार पाम की खेती करने वाले किसानों को चार साल तक प्रति हेक्टेयर के हिसाब से बड़ी सब्सिडी दे रही है. जिससे वे बिना किसी आर्थिक तंगी के इस लंबी अवधि की फसल को संभाल सकें. 

मिलेगा फसलों का सही दाम

इसके अलावा इस मिशन के तहत किसानों को मार्केट से सीधे जोड़ने और उनकी फसल का सही दाम (MSP) दिलाने की पूरी गारंटी दी जा रही है. जब प्रोडक्शन बढ़ेगा और सीधे कंपनियों से लिंकेज होगा, तो बिचौलियों का खेल पूरी तरह खत्म हो जाएगा जिससे किसानों को अपनी फसल का सीधा और बंपर मुनाफा मिलेगा.

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About the author नीलेश ओझा

नीलेश ओझा पिछले पांच साल से डिजिटल पत्रकारिता में सक्रिय हैं. उनकी लेखन शैली में तथ्यों की सटीकता और इंसानी नजरिए की गहराई दोनों साथ-साथ चलती हैं.पत्रकारिता उनके लिए महज़ खबरें इकट्ठा करने या तेजी से लिखने का काम नहीं है. वह मानते हैं कि हर स्टोरी के पीछे एक सोच होनी चाहिए.  

कुछ ऐसा जो पाठक को सिर्फ जानकारी न दे बल्कि सोचने के लिए भी मजबूर करे. यही वजह है कि उनकी स्टोरीज़ में भाषा साफ़ होती है.लिखने-पढ़ने का शौक बचपन से रहा है. स्कूल की नोटबुक से शुरू हुआ यह सफर धीरे-धीरे पेशेवर लेखन और पत्रकारिता तक पहुंचा. आज भी उनके लिए लेखन सिर्फ पेशा नहीं है यह खुद को समझने और दुनिया से संवाद करने का ज़रिया है.

पत्रकारिता के अलावा वह साहित्य और समकालीन शायरी से भी गहराई से जुड़े हुए हैं. कभी भीड़ में तो कभी अकेले में ख्यालों को शायरी की शक्ल देते रहते हैं. उनका मानना है कि पत्रकारिता का काम सिर्फ घटनाएं गिनाना नहीं है. बल्कि पाठक को उस तस्वीर के उन हिस्सों तक ले जाना है. जो अक्सर नजरों से छूट जाते हैं.

उन्होंने स्पोर्ट्सविकी, क्रिकेट एडिक्टर, इनशॉर्ट्स और जी हिंदुस्तान जैसे प्रमुख प्लेटफॉर्म्स के साथ काम किया है.

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