इस यूनिवर्सिटी ने 10 लाख किसानों को पहुंचाया फायदा, जानिए क्या किया खास?
BAU Krishi Vigyan Kendra: बिहार कृषि विश्वविद्यालय के 22 KVK ने 10 लाख किसानों तक पहुंच बनाई. अब किसान लाइब्रेरी, तालाब जीर्णोद्धार और 'प्रोफेसर फार्मर' जैसी नई पहलें शुरू होंगी.

BAU Krishi Vigyan Kendra: बिहार कृषि रोडमैप के तहत बिहार कृषि विश्वविद्यालय ने एक बड़ा मुकाम हासिल किया है. भागलपुर स्थित इस विश्वविद्यालय के 22 कृषि विज्ञान केंद्रों के नेटवर्क ने आधुनिक कृषि तकनीकों और जानकारियों के जरिए अब तक करीब 10 लाख किसानों तक अपनी पहुंच बना ली है, जिससे ग्रामीण अर्थव्यवस्था को नई मजबूती मिल रही है.
BAU के कुलपति डॉ. डीआर सिंह के मुताबिक, विश्वविद्यालय अब किसानों के सहयोग से पुराने तालाबों के जीर्णोद्धार के लिए एक विशेष अभियान शुरू करने जा रहा है, जिसका मकसद जल संरक्षण और टिकाऊ खेती को बढ़ावा देना है. उन्होंने साफ कहा कि मौजूदा दौर में जल संरक्षण सबसे बड़ी जरूरत बन चुका है, इसलिए सभी किसान विज्ञान केंद्र को इस दिशा में विशेष अभियान चलाने के निर्देश दिए गए हैं.
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हर इलाके में बनेगी 'किसान लाइब्रेरी'
किसानों को आधुनिक खेती की जानकारी से लैस करने के मकसद से बिहार कृषि विश्वविद्यालय अब सभी किसान विज्ञान केंद्र क्षेत्रों में 'फार्मर लाइब्रेरी' यानी किसान पुस्तकालय स्थापित करने पर काम कर रहा है, ताकि किसानों को कृषि साहित्य और तकनीकी जानकारी आसानी से मिल सके. इसके साथ ही एक 'फार्मर्स प्रॉब्लम बैंक' भी बनाया जाएगा, जिसमें किसानों की समस्याओं को वैज्ञानिक तरीके से दर्ज और विश्लेषित किया जाएगा, ताकि रिसर्च के जरिए निकले समाधान सीधे किसानों तक पहुंचाए जा सके.
किसानों को मिलेगी 'प्रोफेसर फार्मर' की उपाधि
विश्वविद्यालय ने 'वन स्टूडेंट वन फार्मर वन सॉल्यूशन' कार्यक्रम भी शुरू किया है, जिसके तहत किसानों का व्यापक डेटाबेस तैयार किया जाएगा. उनके अनुभवों को दस्तावेज के रूप में संकलित किया जाएगा और एक नॉलेज शेयरिंग प्लेटफॉर्म तैयार किया जाएगा. इस पहल के जरिए पहचाने गए उत्कृष्ट किसानों को 'प्रोफेसर फार्मर' की उपाधि से सम्मानित किया जाएगा, जो किसानों के लिए एक बड़ा प्रोत्साहन साबित हो सकता है.
जरदालू आम से लेकर एग्री स्टार्टअप तक कई योजनाएं भी शामिल
प्रस्तावित योजनाओं में सभी 22 किसान विज्ञान केंद्र परिसरों में GI टैग प्राप्त जरदालू आम के पौधे लगाना भी शामिल है, ताकि जैविक खेती को बढ़ावा मिल सके. इसके अलावा स्मार्ट न्यूट्री किचन गार्डन का विकास, एग्रीकल्चर एक्सटेंशन इम्पैक्ट कार्ड तैयार करना और हर किसान विज्ञान केंद्र के माध्यम से कम से कम एक एग्री स्टार्टअप स्थापित करने की भी योजना है, जिससे किसानों को खेती के साथ साथ रोजगार के नए अवसर भी मिल सकें. विश्वविद्यालय का मानना है कि इन सभी पहलों को एक साथ जमीन पर उतारने से न सिर्फ किसानों की आय बढ़ेगी, बल्कि गांव गांव तक वैज्ञानिक खेती की पहुंच भी मजबूत होगी. आने वाले महीनों में इन योजनाओं को चरणबद्ध तरीके से लागू किए जाने की तैयारी चल रही है, जिससे बिहार के कृषि क्षेत्र को दीर्घकालिक फायदा मिलने की उम्मीद जताई जा रही है.
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