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गाजर, मटर और सरसों की करें बुआई, सर्दी आते ही शुरू हो जाएगी कमाई

रबी सीजन में मोटी कमाई का यह समय हाथ से न जाने दें. अगेती गाजर, मटर और सरसों की बुआई से किसान निकाल सकते हैं रिकॉर्ड मुनाफा. जानें किन खास वैरायटी और स्मार्ट तकनीकों से लागत होगी आधी और पैदावार डबल?

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  • सितंबर-अक्टूबर में अगेती गाजर, मटर, सरसों उगाकर किसान तगड़ी कमाई कर सकते हैं.
  • गाजर के लिए मेड़ जरूर बनाएं और मटर को राइजोबियम से उपचारित करें.
  • सरसों बुआई में सल्फर तेल प्रतिशत बढ़ा सकता है.

खरीफ की फसलों की कटाई के बाद खेतों का खाली होना किसानों के लिए कमाई का सबसे सही मौका होता है. यह वह टाइम होता है जो पूरे अगले सीजन की कमाई का पूरा बजट तय कर देता है. अगर आप भी पारंपरिक फसलों  से हटकर रबी सीजन में जल्दी प्रॉफिट कमाना चाहते हैं. तो गाजर, मटर और सरसों की खेती आपके लिए बेस्ट ऑप्शन है. सितंबर के आखिरी हफ्ते से लेकर अक्टूबर के शुरुआती दिनों का मौसम इन तीनों फसलों की बुआई के लिए बिल्कुल परफेक्ट माना जाता है. 

मौसम में आ रही हल्की ठंडक बीजों के अंकुरण और पौधों की शुरुआती ग्रोथ को काफी तेज कर देती है. मंडियों का हिसाब बड़ा ही सीधा होता है जो किसान सीजन की अगेती फसल सबसे पहले पहुंचाता है. उसे रेट सबसे ज्यादा मिलते हैं. ऐसे में अगर अभी से खेत तैयार करके सही बीजों का चुनाव कर लिया जाए. तो ठंड शुरू होते ही किसानों की जेब में मोटी कमाई आने लगेगी. जान लीजिए पूरी खबर.

अगेती गाजर की खेती

अगेती गाजर लगाने का यही सबसे सही टाइम है. क्योंकि शुरुआत में मार्केट में पहुंचने वाली लाल और नारंगी गाजर के रेट आसमान छूते हैं. गाजर की बढ़िया क्वालिटी और पैदावार के लिए भुरभुरी और रेतीली दोमट मिट्टी सबसे अच्छी मानी जाती है जिसमें पानी निकलने का सही सिस्टम हो. खेत की दो से तीन बार अच्छी तरह जुताई करके मिट्टी को बारीक बना लें और प्रति एकड़ 4 से 5 टन सड़ी गोबर की खाद मिक्स कर दें. हमेशा ध्यान रखें कि गाजर की बुआई कभी भी प्लेन खेत में छिड़काव करके न करें.

बल्कि 15 से 20 सेंटीमीटर ऊंची मेड़ें यानी रिजेस बनाकर ही करें. मेड़ों पर बीज लगाने से जड़ों को नीचे गहराई तक फैलने की पूरी जगह मिलती है, जिससे गाजर टेढ़ी नहीं होती और उसका कलर और साइज एक बराबर शानदार निकलता है. बुआई से पहले बीज का फंगीसाइड से ट्रीटमेंट जरूर करें. हल्की सिंचाई और समय पर घास-फूस साफ रखने से लगभग 75 से 90 दिनों में फसल कटाई के लिए रेडी हो जाती है.


गाजर, मटर और सरसों की करें बुआई, सर्दी आते ही शुरू हो जाएगी कमाई

अगेती हरी मटर कम समय में खेती

सब्जी मंडी में ठंड की शुरुआत में हरी मटर की जो डिमांड होती है. वह किसी दूसरी फसल में देखने को नहीं मिलती. अगर आप अभी अगेती वैरायटी की बुआई करते हैं. तो नवंबर के बीच तक पहली तुड़ाई शुरू हो जाएगी. जब मार्केट में फ्रेश मटर 80 से 100 रुपये किलो तक बिकती है. मटर की खेती के लिए काशी मुक्ति, काशी अगेती या अर्ली विस्कॉन्सिन जैसी मॉडर्न और सर्टिफाइड वैरायटी का ही चुनाव करें. 

बुआई से पहले खेत में सिंगल सुपर फास्फेट और पोटाश का सही बैलेंस रखें. क्योंकि मटर की जड़ों में नाइट्रोजन बनाने वाले नोड्यूल्स अपने आप बन जाते हैं. बीजों को राइजोबियम कल्चर से ट्रीट करके लगाने से पौधों की ग्रोथ काफी फास्ट होती है. लाइनों के बीच 30 सेंटीमीटर और पौधों में 10 सेंटीमीटर का गैप रखें. मटर की फसल सिर्फ 60 दिनों में पैदावार देना शुरू कर देती है. 


गाजर, मटर और सरसों की करें बुआई, सर्दी आते ही शुरू हो जाएगी कमाई

यह भी पढ़ें: गांव में कैसे खोल सकते हैं पशु औषधि केंद्र, कितना पढ़ा-लिखा होना जरूरी?

अगेती सरसों की बुआई

सब्जियों के साथ-साथ रबी सीजन में कैश क्रॉप के तौर पर अगेती सरसों लगाना किसानों के लिए सबसे सही और मुनाफेवाला बिजनेस है. अक्टूबर के पहले पखवाड़े में बोई गई सरसों में माहू कीड़े और बीमारियों का रिस्क लगभग जीरो रहता है. जिससे कीटनाशकों का बड़ा खर्च बच जाता है. सरसों की खेती के लिए पूसा सरसों, आरएच-30 या गिरिराज जैसी हाई-यील्ड और ज्यादा ऑयल कंटेंट वाली वैरायटी को सेलेक्ट करें. 

बुआई के वक्त जमीन में सही नमी होना बहुत जरूरी है. प्रति एकड़ लगभग 1.5 से 2 किलोग्राम बीज काफी होता है. बेहतर प्रोडक्शन के लिए सल्फर का इस्तेमाल बिल्कुल न भूलें क्योंकि सल्फर दानों में तेल का परसेंट 2 से 3 फीसदी तक बढ़ा देता है. लाइनों के बीच 30 से 45 सेंटीमीटर का स्पेस रखें जिससे पौधों को पूरी धूप और हवा मिले. अगेती सरसों टाइम पर कट जाती है. जिससे किसान इसके तुरंत बाद जायद की तीसरी फसल भी आसानी से ले सकते हैं.

यह भी पढ़ें:  अपने खेत में करें परिसीमन फल की खेती, होगी तगड़ी कमा

About the author नीलेश ओझा

नीलेश ओझा पिछले पांच साल से डिजिटल पत्रकारिता में सक्रिय हैं. उनकी लेखन शैली में तथ्यों की सटीकता और इंसानी नजरिए की गहराई दोनों साथ-साथ चलती हैं.पत्रकारिता उनके लिए महज़ खबरें इकट्ठा करने या तेजी से लिखने का काम नहीं है. वह मानते हैं कि हर स्टोरी के पीछे एक सोच होनी चाहिए.  

कुछ ऐसा जो पाठक को सिर्फ जानकारी न दे बल्कि सोचने के लिए भी मजबूर करे. यही वजह है कि उनकी स्टोरीज़ में भाषा साफ़ होती है.लिखने-पढ़ने का शौक बचपन से रहा है. स्कूल की नोटबुक से शुरू हुआ यह सफर धीरे-धीरे पेशेवर लेखन और पत्रकारिता तक पहुंचा. आज भी उनके लिए लेखन सिर्फ पेशा नहीं है यह खुद को समझने और दुनिया से संवाद करने का ज़रिया है.

पत्रकारिता के अलावा वह साहित्य और समकालीन शायरी से भी गहराई से जुड़े हुए हैं. कभी भीड़ में तो कभी अकेले में ख्यालों को शायरी की शक्ल देते रहते हैं. उनका मानना है कि पत्रकारिता का काम सिर्फ घटनाएं गिनाना नहीं है. बल्कि पाठक को उस तस्वीर के उन हिस्सों तक ले जाना है. जो अक्सर नजरों से छूट जाते हैं.

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