Sugarcane Farmers: कर्नाटक में चीनी की MSP को लेकर विवाद, क्या मांग कर रहे किसान?
Sugarcane Farmers: कर्नाटक में गन्ना किसान चीनी की MSP 31 रुपये से बढ़ाकर 60 रुपये प्रति किलो करने की मांग कर रहे हैं. इसके साथ ही गन्ने का भाव 5,500 रुपये प्रति टन करने की मांग भी उठाई गई है.

Sugarcane Farmers Protest: गन्ना किसानों और चीनी मिलों के बीच कीमतों को लेकर विवाद बढ़ता ही जा रहा है. कर्नाटक में किसान गन्ने का उचित दाम और चीनी की न्यूनतम बिक्री कीमत यानी MSP बढ़ाने की मांग पर अड़े हैं. किसानों का कहना है कि, खेती की लागत लगातार बढ़ रही है, लेकिन उन्हें मिलने वाला पैसा उस हिसाब से नहीं बढ़ा है. इसी मांग को लेकर किसान कई दिनों से प्रदर्शन कर रहे हैं. हालात ऐसे बने कि, कई जगहों पर सड़कें जाम की गईं और बंद का भी असर देखने को मिला.
किसानों की सबसे बड़ी मांग है कि, चीनी की न्यूनतम बिक्री कीमत 31 रुपये प्रति किलो से बढ़ाकर 60 रुपये प्रति किलो की जाए. चीनी की यह कीमत फरवरी 2019 से नहीं बदली है. किसानों का कहना है कि, पिछले कई सालों में गन्ने की खेती, मजदूरी, खाद, बिजली और सिंचाई का खर्च काफी बढ़ गया है. ऐसे में चीनी की बिक्री कीमत पुरानी रहने से मिलों की कमाई और किसानों को मिलने वाले दाम के बीच संतुलन बिगड़ रहा है.
गन्ने का भाव 5,500 रुपये प्रति टन करने की मांग
किसान सिर्फ चीनी की कीमत नहीं, बल्कि गन्ने का दाम भी बढ़वाना चाहते हैं. फिलहाल 2026-27 सीजन के लिए केंद्र सरकार ने गन्ने का उचित और लाभकारी मूल्य यानी FRP 3,650 रुपये प्रति टन तय किया है. किसान इसे बढ़ाकर 5,500 रुपये प्रति टन करने की मांग कर रहे हैं. उनका कहना है कि मौजूदा भाव से खेती का खर्च निकालना मुश्किल हो रहा है.
इथेनॉल और भुगतान को लेकर भी नाराजगी
किसानों की मांग है कि गन्ने के रस, सिरप और बी-हैवी शीरे से बनने वाले इथेनॉल की सरकारी खरीद को लेकर नियमों में बदलाव किया जाए. उनका कहना है कि अगर मिलों को इथेनॉल बेचने का पूरा मौका मिलेगा, तो उनकी कमाई बढ़ेगी और वे किसानों को बेहतर दाम दे पाएंगी.
इसके अलावा किसान चाहते हैं कि गन्ने का भुगतान 14 दिनों के भीतर किया जाए. तौल में पारदर्शिता हो और चीनी की रिकवरी के हिसाब से गन्ने का दाम तय करने में किसानों को नुकसान न हो. कुछ किसान संगठनों ने राज्य सरकार से गन्ने पर 1,000 रुपये प्रति टन अतिरिक्त मदद देने की मांग भी उठाई है.
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सरकार से बातचीत के बाद भी जारी है दबाव
किसानों की मांगों पर विचार करने के लिए केंद्र सरकार ने चार सदस्यीय समिति बनाई है. अक्टूबर में बातचीत के बाद किसानों ने 26 नवंबर तक मांगें पूरी करने का समय दिया था. लेकिन नवंबर की शुरुआत में भी कई इलाकों में प्रदर्शन और सड़क जाम की खबरें सामने आईं. अब किसानों की नजर सरकार के अगले फैसले पर है. अगर उनकी मांगों पर सहमति नहीं बनी, तो आंदोलन फिर तेज हो सकता है.
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