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उपज की ऑनलाइन बिक्री में कैसे काम करता है E-NEM का नेटवर्क, यहां आसान शब्दों में समझें किसान

Benefits from E-NAM: किसानों के पास उपज को बेचने के लिये कई ऑपशन होते हैं. ई-नाम के ऑनलाइन ट्रेडिंग पोर्टल पर सारा काम किसानों के सामने ही होता है, इसलिये शोषण का मुद्दा ही नहीं रहता.

National Agriculture Market: देश में खरीफ फसलों की कटाई (Crop Harvesting) का काम शुरू हो चुका है. किसान को भी पूरी उम्मीद है कि उनकी फसलों को मंडी (Agriculture Market) में सही दाम मिलेगा, लेकिन बिचौलियों और आढ़तियों के हस्तक्षेप के कारण अच्छी क्वालिटी की फसल भी सही दामों पर बिकती और किसानों को नुकसान झेना पड़ जाता है. ये समस्या जागरुकता की कमी के कारण आती.

बेशक केंद्र सरकार ने किसानों और व्यापारियों की सहूलियत के लिये ई-नाम प्लेटफॉर्म (E-NAM Platform) लॉन्च किया है, लेकिन जानकारी के अभाव के चलते किसान अभी-भी अपनी उपज की ऑनलाइन खरीद-बिक्री (Online Marketing of Crop) करने में कतरा रहे हैं. अगर किसान भी आसान शब्दों में ई-नाम पर खरीद-बिक्री और इसके काम करने का तरीका समझ जायें और फसलों के बाजिव दाम मिलेंगे ही, साथ ही अपनी उपज को देश के किसी भी मंडी में बेच पायेंगे. इससे बिचौलियों  को दिये जाने वाला पैसा बचेगा.

पहले किसान आढ़तियों के पास जाकर फसलों की बोली लगाते थे. इस दौरान आढ़ती भी फसल की क्वालिटी को जांचे बिना ही अपने हिसाब से, अपनी दर पर और अपने ही लोगों के बीच सांठ-गांठ करके उपज बिकवा देता है. इस प्रक्रिया में किसान को ज्यादा कुछ नहीं बताया जाता और सारा मुनाफा बिचौलियों और आढ़ती कमा लेते हैं. इस बीच किसानों को उपज के सही दाम मिलना तो छोड़िये मेहनत के बराबर पैसा भी नहीं मिल पाता.

कैसे काम करता है ई-नाम
वहीं राष्ट्रीय कृषि बाजार ( ई-नाम ) योजना के तहत देशभर में मंडी व्यापारियों, डीलरों और आढ़तियों के भी लाइसेंस बनाये जाते हैं, जो सभी कृषि बाजारों में वैलिड होते हैं. इस तरह किसान अपनी उपज को अपने ही राज्य में और दूसरे राज्य में भी बेच सकते हैं. 

  • यहां सबसे पहले रजिस्टर्ड व्यापारी और डीलर उपज की गुणवत्ता की जांच करता है और उसी आधार पर फसल की कीमत तय की जाती है. 
  • रजिस्टर्ड व्यापारी, डीलर या आढ़ती द्वारा तय की गई कीमत को ई-नाम के पोर्टल पर चढ़ाया जाता है. 
  • इसके बाद ई-नाम के पोर्टल पर सुबह से 10 बजे से लेकर दोपहर 2 बजे तक किसान की उपज की बोली लगवाई जाती है. 
  • बता दें कि उपज की सही बोली लगाने के लिये राज्य के साथ-साथ दूसरे राज्यों के खरीददार भी ई-नाम के ऑनलाइन प्लेटफॉर्म पर इकट्ठा होते हैं.
  • जो खरीददार उपज की सबसे ज्यादा कीमत लगाता है, किसान भी अपनी उपज उसी खरीददार को बेच सकता है और फसल की ज्यादा से ज्यादा कीमत हासिल कर सकते हैं.

अच्छे दामों पर बिक सकती है उपज
जानकारी के लिये बता दें कि ई-नाम के ऑनलाइन ट्रेडिंग पोर्टल पर सभी रजिस्टर्ड किसान, व्यापारी, डीलर और आढ़ती होते हैं, इसलिये धोखाधड़ी और शोषण का कोई रिस्क ही नहीं बनता. अब किसान ई-नाम का प्लेटफॉर्म की मदद से अच्छी बोली लगाने वाले व्यापारी से सीधा जुड़ सकते हैं और उपज की खरीद-फरोख्त में कीमत निर्धारित करने के साथ-साथ अंतिम बोली का मूल्य भी बदल सकते हैं. इस तरह किसान को उसकी उपज की गुणवत्ता के आधार पर सही दाम मिल जाते हैं और खरीददार खुद ही किसान के पास आकर उपज को खरीदकर ले जाता है. इससे किसान को ट्रांसपोर्टेशन या भंडारण पर भी खर्च नहीं करना पड़ता.

किसानों को मिलते हैं ये फायदे
ई-नाम यानी राष्ट्रीय कृषि बाजार का ऑनलाइन ट्रेडिंग पोर्टल (Online Trading Portal) पर पूरे भारत के किसान, व्यापारी, डीलर और आढ़तियों का एक रजिस्टर्ड नेटवर्क है. 

  • किसान को भी  ई-नाम पर फसल की बेहतर कीमत मिल जाती है, क्योंकि एक मंडी का दायरा नहीं होता, बल्कि किसानों को देशभर की मंडियों से जोड़ा जाता है.
  • किसानों के पास उपज को बेचने के लिये कई ऑपशन होते हैं. ई-नाम के ऑनलाइन ट्रेडिंग पोर्टल पर सारा काम किसानों के सामने ही होता है, इसलिये शोषण का मुद्दा ही नहीं रहता.
  • ये पूरी प्रक्रिया पारदर्शी होती है और किसान खुद उपज की बिक्री, व्यापारी और खरीददार की हर हरकत पर नजर रख सकता है.
  • इस तरह ई-नाम (E-NAM) पर किसान को उपज की क्वालिटी के मुताबिक कीमत मिल जाती है और खरीददार से समय पर पेमेंट की गारंटी भी होती है.

Disclaimer: यहां मुहैया सूचना सिर्फ कुछ मीडिया रिपोर्ट्स और जानकारियों पर आधारित है. किसी भी जानकारी को अमल में लाने से पहले संबंधित विशेषज्ञ से सलाह लें.

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