निर्धारित सीमा से ज्यादा धान बेच सकेंगे किसान, इस सरकार ने दी राहत
किसानों को बड़ी राहत, तय सीमा से अधिक पैदावार होने पर भी न्यूनतम समर्थन मूल्य पर फसल खरीदेगी सरकार. 48 घंटे में ऑनलाइन सत्यापन के बाद मंडियों में आसानी से बिकेगी किसानों की अतिरिक्त उपज.

खरीफ सीजन के तहत धान की सरकारी खरीद के बीच हरियाणा के किसानों के लिए एक बहुत बड़ी राहत भरी खबर सामने आई है. मंडियों में फसल बेचने पहुंच रहे किसानों की व्यावहारिक दिक्कतों को ध्यान में रखते हुए हरियाणा सरकार ने एक बड़ा ऐतिहासिक फैसला लिया है.
नए सरकारी निर्देशों के मुताबिक, अब राज्य के किसान भाई खेतों में हुई वास्तविक पैदावार के आधार पर निर्धारित सीमा से ज्यादा धान भी MSP पर सरकारी केंद्रों में बेच सकेंगे. इस फैसले से हरियाणा के उन हजारों किसानों को बड़ी राहत मिली है, जिनकी इस सीजन में फसल की पैदावार तय कैपिंग से कहीं अधिक हुई है.
क्यों पड़ी इस बड़े फैसले की जरूरत?
दरअसल, हरियाणा कृषि विभाग द्वारा चालू खरीफ मार्केटिंग सीजन के लिए धान की एक अधिकतम उपज सीमा तय की गई थी. यह सीमा मेरी फसल-मेरा ब्यौरा पोर्टल पर दर्ज रिकॉर्ड के अनुसार प्रति एकड़ लगभग 22 से 28 क्विंटल के बीच बैठती थी. लेकिन इस बार अनुकूल मौसम और उन्नत बीजों के इस्तेमाल के कारण कई क्षेत्रों में वास्तविक उत्पादन इस तय सीमा से काफी ज्यादा हो गया.
ऐसे में किसान भाई परेशान थे क्योंकि वे अपनी पूरी फसल सरकारी रेट पर नहीं बेच पा रहे थे. भारतीय किसान यूनियन और राज्य के किसानों की इस जायज मांग का संज्ञान लेते हुए हरियाणा सरकार ने नियमों में ढील देने का आदेश जारी कर दिया.
सत्यापन के बाद ही मिलेगा पूरा लाभ
नियमों में दी गई इस ढील का फायदा उठाने के लिए सरकार ने एक पारदर्शी व्यवस्था भी तैयार की है. यदि किसी किसान भाई के खेत में तय सीमा से अधिक धान का उत्पादन हुआ है, तो उन्हें इसके लिए हरियाणा राज्य कृषि विपणन बोर्ड के स्थानीय सचिव को एक लिखित आवेदन देना होगा.
आवेदन मिलने के बाद मार्केट कमेटी के सचिव और कृषि कल्याण विभाग के अधिकारी 48 घंटे के भीतर किसान के खेत और पिछले रिकॉर्ड का भौतिक सत्यापन करेंगे. जैसे ही जांच टीम इस बात की पुष्टि कर देगी कि अतिरिक्त उपज वास्तविक है, किसान के ऑनलाइन गेट पास की लिमिट को बढ़ा दिया जाएगा और पूरी फसल मंडी में बेचने की अनुमति तुरंत मिल जाएगी.
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अधिकारियों को सख्त निर्देश जारी
हरियाणा के कृषि एवं किसान कल्याण विभाग के उच्च अधिकारियों ने राज्य के सभी जिला उपायुक्तों और मंडी प्रभारियों को पत्र लिखकर इस नीति को तुरंत प्रभाव से लागू करने के निर्देश दिए हैं. सरकार ने साफ कहा है कि मंडियों में आने वाले किसी भी पंजीकृत किसान को पैदावार अधिक होने का बहाना बनाकर परेशान न किया जाए.
इसके साथ ही, मंडियों में इलेक्ट्रॉनिक तौल मशीनों, बारदाने की उपलब्धता और उठान की प्रक्रिया को तेज करने को कहा गया है ताकि किसानों को अपनी उपज बेचने के बाद सीधा बैंक खातों में भुगतान समय पर मिल सके.
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