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अलग सब्जी ट्राई करने का मन है पर केमिकल वाली नहीं, तो घर पर उगाएं कद्दू

बाजार के केमिकल वाले कद्दू खाने से डर लगता है? तो फिर आप अपने घर की छत पर एकदम शुद्ध और ऑर्गेनिक कद्दू उगा सकते हैं. इसके लिए किन चीजों की होगी जरूरत. जान लीजिए पूरी प्रक्रिया.

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  • 55-65 दिन में फूल खिलने के बाद फल पकने पर कटाई करें.

आज के समय में बाजार से सब्जी लाना किसी बड़े खतरे से खाली नहीं लगता. आप मार्केट में जाते हैं वहां हरी- सब्जियां देखकर मन तो खुश हो जाता है. लेकिन क्या आपको पता है उनमें कितने केमिकल, पेस्टिसाइड और यूरिया का इस्तेमाल हुआ है. कई बार ऐसी सब्जियां खाने से लोगों की सेहत भी खराब हुई है. इसलिए अब बहुत से लोग अपने घर पर ही कई तरह की सब्जियां उगाने लगे हैं. 

इस सीजन में आपका भी कुछ हटकर और एकदम शुद्ध खाने का मन है. तो कद्दू की खेती से बढ़िया ऑप्शन दूसरा कोई हो ही नहीं सकता. कद्दू एक ऐसी देसी और ताकतवर सब्जी है जो न सिर्फ स्वाद में लाजवाब होती है. बल्कि सेहत के लिए भी वरदान मानी जाती है. सबसे बड़ी बात यह है कि इसे उगाने के लिए किसी बहुत बड़े खेत की जरूरत नहीं है, बल्कि आप इसे अपने घर के छोटे से गार्डन और गमलों में भी आसानी से उगा सकते हैं. जान लीजिए इसे उगाने का क्या है सही तरीका.

घर की छत पर उगाने का सही तरीका

आपके पास जमीन की कमी है और आप फ्लैट, छोटे मकान में रहते हैं. तो निराश होने की बिल्कुल जरूरत नहीं है. कद्दू की बेल को बहुत ज्यादा जगह नहीं चाहिए होती. बस इसे फैलने के लिए थोड़ा सा आसमान और धूप का साथ चाहिए. आप सीमेंट का बड़ा गमला लेकर उसमें बढ़िया सी मिट्टी तैयार कर लें. मिट्टी बनाते वक्त आधी सामान्य मिट्टी, आधी पुरानी सड़ी हुई गोबर की खाद और थोड़ा सा नीम की खली का पाउडर मिला लें जिससे जड़ें मजबूत रहें.

अब बाजार से और किसी अच्छी नर्सरी से कद्दू के देसी बीज लाकर उन्हें गमले की मिट्टी में एक-दो इंच की गहराई पर बो दें. बीज बोने के बाद हल्का पानी का छिड़काव कर दें और गमले को ऐसी जगह रखें जहां दिनभर में कम से कम छह से सात घंटे की अच्छी धूप मिलती रहे. कुछ ही दिनों में बीज अंकुरित होकर बाहर आ जाएंगे और तेजी से बढ़ने लगेंगे. 


अलग सब्जी ट्राई करने का मन है पर केमिकल वाली नहीं, तो घर पर उगाएं कद्दू

बेल की देखरेख के टिप्स

एक बार जब कद्दू की नन्हीं बेल गमले से बाहर निकलकर बड़ी होने लगे तो उसकी सही देखभाल करना जरूरी है. बेलदार पौधे होने की वजह से कद्दू को ऊपर चढ़ने और फैलने के लिए किसी मजबूत सहारे की जरूरत होती है, इसलिए गमले के पास कोई बांस की डंडी और जाली लगा दें जिससे बेल उस पर आसानी से फैल सके. पानी की बात करें तो कद्दू को नमी पसंद है. लेकिन गमले में पानी रुकना नहीं चाहिए, वरना जड़ें सड़ सकती हैं. गर्मियों के दिनों में रोज सुबह और शाम को हल्का पानी दें और सर्दियों में मिट्टी की नमी देखकर ही पानी डालें. 

हर पंद्रह-बीस दिन में बेल की जड़ों के पास थोड़ी सी वर्मीकम्पोस्ट और लिक्विड जैविक खाद डालते रहें. जिससे पौधे को जरूरी एनर्जी मिलती रहे. इसके अलावा जब बेल पर पीले रंग के सुंदर फूल आने लगें तो समझ जाइए कि फल बनने का वक्त आ गया है. इस दौरान थोड़ी सी ऑर्गेनिक नीम ऑयल की स्प्रे कर देने से इल्लियां और कीड़े कोसों दूर रहते हैं. जिससे बेल एकदम हरी-भरी और स्वस्थ बनी रहती है.


अलग सब्जी ट्राई करने का मन है पर केमिकल वाली नहीं, तो घर पर उगाएं कद्दू

यह भी पढ़ें: पाइनएप्पल की खेती में ये बातें ध्यान रखें, होगी बढ़िया कमाई

कब आएंगे फल?

अब बात करते हैं आखिर पौधे पर कद्दू के फल कब नजर आएंगे? बीज बोने के करीब 55 से 65 दिन बाद कद्दू की बेल पर पहले नर और मादा फूल खिलना शुरू हो जाते हैं. फूलों के आने के लगभग 15 से 20 दिनों के भीतर छोटे-छोटे कद्दू बनने लगते हैं और देखते ही देखते वे तेजी से बढ़ने लगते हैं. जब कद्दू का साइज पूरा बड़ा हो जाए. 

उसका छिलका थोड़ा सख्त महसूस होने लगे और रंग गहरा हो जाए. तो समझो फल पूरी तरह पककर तैयार है. कैंची और चाकू की मदद से उसे डंठल से काटकर अलग कर लें. घर पर उगाए गए इस ऑर्गेनिक कद्दू की सब्जी का स्वाद बाजार वाले केमिकल वाले कद्दू से कहीं बेहतर होता है. और यह काफी सेहत के लिए अच्छा होता है.

यह भी पढ़ें: खेत में कभी नहीं घुसेगा गोयरा, इन आसान तरीकों से करें बचाव

About the author नीलेश ओझा

नीलेश ओझा पिछले पांच साल से डिजिटल पत्रकारिता में सक्रिय हैं. उनकी लेखन शैली में तथ्यों की सटीकता और इंसानी नजरिए की गहराई दोनों साथ-साथ चलती हैं.पत्रकारिता उनके लिए महज़ खबरें इकट्ठा करने या तेजी से लिखने का काम नहीं है. वह मानते हैं कि हर स्टोरी के पीछे एक सोच होनी चाहिए.  

कुछ ऐसा जो पाठक को सिर्फ जानकारी न दे बल्कि सोचने के लिए भी मजबूर करे. यही वजह है कि उनकी स्टोरीज़ में भाषा साफ़ होती है.लिखने-पढ़ने का शौक बचपन से रहा है. स्कूल की नोटबुक से शुरू हुआ यह सफर धीरे-धीरे पेशेवर लेखन और पत्रकारिता तक पहुंचा. आज भी उनके लिए लेखन सिर्फ पेशा नहीं है यह खुद को समझने और दुनिया से संवाद करने का ज़रिया है.

पत्रकारिता के अलावा वह साहित्य और समकालीन शायरी से भी गहराई से जुड़े हुए हैं. कभी भीड़ में तो कभी अकेले में ख्यालों को शायरी की शक्ल देते रहते हैं. उनका मानना है कि पत्रकारिता का काम सिर्फ घटनाएं गिनाना नहीं है. बल्कि पाठक को उस तस्वीर के उन हिस्सों तक ले जाना है. जो अक्सर नजरों से छूट जाते हैं.

उन्होंने स्पोर्ट्सविकी, क्रिकेट एडिक्टर, इनशॉर्ट्स और जी हिंदुस्तान जैसे प्रमुख प्लेटफॉर्म्स के साथ काम किया है.

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