घर के किचन गार्डन में भी उगाई जा सकती है मटर, ये रहा तरीका
बाजार की मिलावटी मटर को कहें अलविदा अब अपने घर के किचना गार्डन में ही उगाएं ताजी और 100% ऑर्गेनिक हरी मटर. जानिए गमले के साइज, मिट्टी की तैयारी से लेकर तुड़ाई तक की पूरी प्रोसेस.

मानसून के बाद सर्दियों की आमद होती है. इस मौसम की शुरुआत होते ही हर घर में हरी मटर की मांग अचानक बढ़ जाती है. चाहे मटर-पनीर बनाना हो, पुलाव या फिर गरमा-गरम कचौड़ी, ताजी मटर का स्वाद हर रेसिपी में चार चांद लगा देता है. लेकिन बाजार में मिलने वाली मटर अक्सर प्रिजर्वेटिव्स और केमिकल स्प्रे के साथ तैयार होकर आती है, जिससे उसकी ओरिजनल वाली मिठास और न्यूट्रिशन दोनों गायब हो जाते हैं.
लेकिन अगर आप मटर का असली स्वाद चाहते हैं. तो इसे अपनी छत के किचन गार्डन में बड़ी आसानी से उगा सकते हैं. अगर आप अपनी खुद की फ्रेश और 100% ऑर्गेनिक मटर उगाना चाहते हैं. तो बस सही गमला, उपजाऊ मिट्टी और गार्डनिंग की कुछ बारीकियां समझ लीजिए. जब आप अपने घर पर उगी मटर अपने हाथों से छीलकर खाएंगे तो उसका स्वाद भी दोगुना हो जाएगा. तो चलिए आपको बताते हैं इसके लिए क्या होगी पूरी प्रोसेस.
इस तरह तैयार करें पौधे का बेस
घर पर मटर उगाने के लिए सबसे पहले आपको उपजाऊ मिट्टी तैयार करनी होती है. हरी मटर मुख्य रूप से ठंडे मौसम की फसल है. इसलिए अक्टूबर से लेकर नवंबर का महीना इसके बीज बोने के लिए सबसे सही माना जाता है. मिट्टी तैयार करने के लिए 50% सामान्य बगीचे की मिट्टी, 30% अच्छी तरह सड़ी हुई गोबर की खाद चाहिए होती है. अगर मौजूद है तो वर्मीकम्पोस्ट भी इस्तेमाल कर सकते हैं. इसके अलावा 20% रेत लेकर एक हल्का और भुरभुरा मिक्सचर तैयार कर लें.

मटर के पौधे की जड़ें ज्यादा गहरी नहीं जातीं इसलिए 9 से 12 इंच गहरा और चौड़ा गमला या फिर आप चाहें तो एक रेक्टैंगल ग्रो-बैग भी ले सकते हैं. गमले के नीचे की साइड पानी निकलने के लिए ड्रेनेज होल जरूर कर लें ताकि उसमें पानी जमा न हो. बीजों को बोने से पहले 6 से 8 घंटे हल्के गुनगुने पानी में भिगोकर रख दें इससे बीजों का अंकुरण बहुत तेजी से होता है और पौधे जल्दी बाहर निकलते हैं.
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पौधों को दें सही सहारा
बीज तैयार होने के बाद गमले की मिट्टी में लगभग 1 से 1.5 इंच की गहराई पर 2 से 3 इंच की दूरी रखते हुए बीजों को दबा दें और ऊपर से हल्की मिट्टी से ढक दें. इसके बाद स्प्रे बोतल से हल्का पानी छिड़कें जिससे मिट्टी में नमी बनी रहे. करीब 5 से 7 दिनों के भीतर छोटे-छोटे हरे अंकुर फूटने लगेंगे. मटर एक बेल वाली फसल है. इसलिए जब पौधे 6 से 8 इंच के हो जाएं तो उन्हें ऊपर चढ़ने के लिए सहारे की जरूरत होती है.
इसके लिए गमले के किनारों पर पतली बांस की खपच्चियां, लकड़ी की डंडियां या फिर नायलॉन की रस्सी का छोटा मचान भी बना सकते हैं. जब यह बेलें ऊपर चढ़कर फैलती हैं. तो उन्हें चारों तरफ से बराबर धूप और हवा मिलती है. जिससे पौधों में बीमारियां नहीं लगतीं और फलियों का साइज भी काफी बड़ा और भरा हुआ बनता है.
दो महीनों में हरी मटर तैयार
मटर के गमले को घर की ऐसी जगह पर रखें जहां रोजाना कम से कम 5 से 6 घंटे की सीधी और अच्छी धूप आती हो क्योंकि बिना सही मात्रा में धूप के फलियों में दाने अच्छे से नहीं भर पाते. पानी देते वक्त ध्यान रखें कि मिट्टी हमेशा हल्की नम रहे. लेकिन गमले में पानी जमा बिल्कुल न होने दें. जब पौधे में फूल आने लगें तो हर 15 दिन में थोड़ी सी वर्मीकम्पोस्ट डालें जिसमें पोटैशियम और फास्फोरस होता है.

और इसके अलावा कीटों से बचाव के लिए 10 दिन में एक बार नीम के तेल का हल्का स्प्रे करते रहें. बुवाई के करीब 60 से 75 दिनों के भीतर फलियां दानों से भर जाएंगी और एकदम हरी-भरी तैयार हो जाएंगी. जब फलियां मोटी और गोल दिखने लगें तो उन्हें हल्के हाथों से तोड़कर अपनी ताजी मटर की सब्जी बनाएं या फिर पुलाव में डालें.
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