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गमले में उगाएं हरा धनिया, बाजार जाने का झंझट खत्म

Green Coriander Growing Tips: बाजार के महंगे और केमिकल वाले धनिए को कहें अलविदा. अब घर की बालकनी में ही उगेगा एकदम फ्रेश हरा धनिया. जानिए सबसे आसान घरेलू तरीका.

Green Coriander Growing Tips: भारत में किसी के घर में खाना बने और उसमें धनिया का इस्तेमाल ना हो ऐसा तो हो ही नहीं सकता. हर भारतीय रसोई में धनिया बहुत जरूरी होता है. सब्जी को सजाना हो दाल में तड़का लगाना हो या फिर कोई  चटपटी सी चटनी बनानी हो धनिया तो चाहिए ही होता है. कई बार लोग बहुत सारा धनिया लाकर फ्रिज में रखते हैं जिससे खराब हो जाता है. अगर ऐसा ना किया जाए तो फिर बार-बार बाजार जाकर लेकर आना पड़ता है. 

मगर क्या हो जवाब के घर में ही ताजा हरा धनिया रोज आपको खाने को मिल जाए. और इसके लिए आपको बाजार भी न जाना पड़े. इसके साथ ही आप धनिया इस्तेमाल करें वह बिना केमिकल के उगाया गया हो. तो आपको बता दें ऐसा बिल्कुल मुमकिन है आप अपने घर पर ही बढ़िया सा ताजा हरा धनिया उगा सकते हैं. इसके लिए आपको बहुत तामझाम की जरूरत भी नहीं पड़ेगी. जान लीजिए कैसे आपको मिलेगा घर पर ताजा फ्रेश हरा धनिया.  

इस तरीके से घर पर उगाएं धनिया

घर पर हरा धनिया उगाने के लिए आपको बाजार से किसी महंगे बीज को खरीदने की बिल्कुल भी  जरूर नहीं होती है. आपकी रसोई के मसाले वाले डिब्बे में रखा साबुत धनिया ही इसके लिए सबसे बेस्ट साबित होता है. बुवाई करने से पहले साबुत धनिए के बीजों को किसी चीज दो टुकड़ों में तोड़ लें. ध्यान रखें कि बीज कुचले न जाएं, बस दो हिस्सों में बंट जाएं. 

ऐसा करने से अंकुरण की प्रोसेस काफी तेज हो जाती है. अब गमले सिलेक्ट करने की बात करें तो धनिए के पौधे की जड़ें मिट्टी में बहुत ज्यादा गहराई तक नहीं फैलती हैं. इसलिए गहरा गमला लेने के बजाय चौड़े मुंह वाला और 6 से 8 इंच की गहराई वाला प्लास्टिक या मिट्टी का गमला या फिर बड़ा ग्रो बैग सबसे बढ़िया रहता है. गमले के तले में एक या दो ड्रेनेज होल जरूर बनाएं जिससे गमले में एक्सट्रा पानी जमा न हो सके.

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गमले में उगाएं हरा धनिया, बाजार जाने का झंझट खत्म

सही मिट्टी का मिश्रण और बीजों की बुवाई का तरीका

धनिए के स्वस्थ पौधों के विकास के लिए उपजाऊ, हल्की और भुरभुरी मिट्टी का होना बहुत जरूरी होता है. मिट्टी तैयार करने के लिए आप 50% सामान्य बगीचे की मिट्टी, 30% गोबर की खाद या वर्मीकंपोस्ट और 20% कोकोपीट या साफ रेत को आपस में अच्छी तरह मिला लें. 

इस तैयार पोंटिंग मिक्स से गमले को ऊपर से लगभग 2 इंच खाली रखते हुए भरें. इसके बाद तैयार किए गए दो टुकड़ों वाले धनिए के बीजों को मिट्टी की सतह पर बराबर दूरी पर बिखेर दें. बीजों के ऊपर लगभग आधा इंच मोटी मिट्टी या कोकोपीट की एक हल्की परत बिछा दें. 

जिससे बीज अच्छी तरह से ढक जाएं. बुवाई पूरी होने के बाद किसी वॉटर केन या स्प्रे बोतल की मदद से पानी का हल्का छिड़काव करें. तेज धार से पानी कभी न डालें, वरना बीज मिट्टी से उखड़कर बाहर बह जाएंगे या एक जगह इकट्ठे हो जाएंगे.


गमले में उगाएं हरा धनिया, बाजार जाने का झंझट खत्म

धूप-पानी का रखें बंदोबस्त

गमले में बीज बोने के बाद उसे किसी ऐसी जगह पर रखें जहां रोजाना कम से कम 4 से 5 घंटे की सीधी धूप मिलती हो. क्योंकि धनिए की अच्छी बढ़त के लिए धूप बेहद जरूरी है. मिट्टी में नमी का बैलेंस बनाए रखें जब भी ऊपर की मिट्टी हल्की सूखी नजर आए तभी हल्का पानी छिड़कें. 

जरूरत से ज्यादा पानी देने से जड़ें गल सकती हैं. लगभग 10 से 14 दिनों के भीतर छोटे-छोटे हरे अंकुर बाहर निकलने लगेंगे और 30 से 40 दिनों में धनिया इस्तेमाल के लिए पूरी तरह तैयार हो जाएगा. कटाई करते समय पौधों को कभी भी जड़ से न उखाड़ें. 

बल्कि तेज कैंची या चाकू से ऊपर की पत्तियों को काटें. इस तरीके से कटाई करने पर उसी पौधे से दोबारा नई और घनी पत्तियां निकलती रहेंगी और आपको लंबे समय तक ताजा धनिया मिलता रहेगा.

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About the author नीलेश ओझा

नीलेश ओझा पिछले पांच साल से डिजिटल पत्रकारिता में सक्रिय हैं. उनकी लेखन शैली में तथ्यों की सटीकता और इंसानी नजरिए की गहराई दोनों साथ-साथ चलती हैं.पत्रकारिता उनके लिए महज़ खबरें इकट्ठा करने या तेजी से लिखने का काम नहीं है. वह मानते हैं कि हर स्टोरी के पीछे एक सोच होनी चाहिए.  

कुछ ऐसा जो पाठक को सिर्फ जानकारी न दे बल्कि सोचने के लिए भी मजबूर करे. यही वजह है कि उनकी स्टोरीज़ में भाषा साफ़ होती है.लिखने-पढ़ने का शौक बचपन से रहा है. स्कूल की नोटबुक से शुरू हुआ यह सफर धीरे-धीरे पेशेवर लेखन और पत्रकारिता तक पहुंचा. आज भी उनके लिए लेखन सिर्फ पेशा नहीं है यह खुद को समझने और दुनिया से संवाद करने का ज़रिया है.

पत्रकारिता के अलावा वह साहित्य और समकालीन शायरी से भी गहराई से जुड़े हुए हैं. कभी भीड़ में तो कभी अकेले में ख्यालों को शायरी की शक्ल देते रहते हैं. उनका मानना है कि पत्रकारिता का काम सिर्फ घटनाएं गिनाना नहीं है. बल्कि पाठक को उस तस्वीर के उन हिस्सों तक ले जाना है. जो अक्सर नजरों से छूट जाते हैं.

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