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GM Crop: ICAR ने 8 रिसर्च इंस्टीट्यूट को भेजी थी जीएम सरसों, इन 6 जगहों पर लहलहाने लगी फसल

जीएम सरसों के बीज के विरोध के बावजूद इस फसल की पैदावार शुरू हो गई है. देश के 6 शोध संस्थानों में इन फसलों को बोया जा रहा है. 20 से 25 दिन में पफसल लहलहाने लगी हैं.

GM Crop Benefit: जेनेटिकली मॉडीफाइड तकनीक से पैदा हुई जीएम सरसों को लेकर एक धड़ा विरोध कर रहा है तो दूसरा इसकी उपज बढ़ाने के पक्ष में हैं. लेकिन देश में इसके पैदा करने की कवायद शु़रू कर दी गई है. अच्छी बात यह है कि जीएम सरसों को जिन स्थानों पर बोया गया है. वहां खूब लहलहाने लगी है. पर्यावरण सुरक्षा संबंधी तकनीकी समिति की सहमति के बाद अलग अलग रिसर्च इंस्टीटयूट में जीएम सरसों की खेती की जा रही है. खेती का यह काम ट्रायल फार्म में हो रहा है. 

आईसीएआर ने 8 शोध संस्थानों को भेजे बीज
मीडिया रिपोर्ट के अनुसार, वन व पर्यावरण मंत्रालय की जेनेटिक इंजीनियरिंग अप्रैजल कमेटी (जीईएसी) की सहमति मिलने के बाद जीएम सरसों की फार्म ट्रायल होना तय कर दिया गया था. कृषि मंत्रालय के अधीन इंडियन काउंसिल आफ एग्रीकल्चरल रिसर्च (ICAR) ने देश के 8 रिसर्च इंस्टीटयूट को जीएम सरसों का बीज भेजकर बोआई करने के निर्देश दिए हैं. 

6 संस्थानों में लहलहा रही फसल
बीज सभी 8 शोेध संस्थानों को भेजे गए. लेकिन इनमें से 6 जगह ही फसल बोई गई है. वैज्ञानिक ने बताया कि बीजों की बुवाई के लिए भरतपुर, बनारस, लुधियाना, झांसी, कानपुर और दिल्ली के कृषि अनुसंधान संस्थान (IARI) भेजा गया था. इन सभी के रिसॉर्स फार्मों पर इसकी खेती हो रही है. बुआई किए हुए करीब 20 से 25 दिन हो चुके हैं. इसेक अलावा हरियाणा और मध्य प्रदेश (मुरैना) का रिसर्च सेंटर में बीज भेजा गया है. यहां बीज बुवाई को असहमति जता दी गई है. 

सुरक्षा के किए कड़े बंदोबस्त
जीएम सरसों फसल का शुरू से विरोध हो रहा है. इसके लिए साइंटिस्ट अलर्ट हैं. सभी रिसर्च सेंटरों में हाइटेक कैमरों की निगरानी में जीएम फसलों की खेती की जा रही है. इसके अलावा सिक्योरिटी पर्सनल की संख्या बढ़ा दी गई है. 

क्या होती हैं जीएम फसलें
जीएम फसलें वो होती हैं. इन फसलों को साइंटिफिकली मॉडीफाइड कर तैयार किया जाता है. इसमें पौधों की दो अलग अलग प्रजातियों को मिलाकर हाइब्रिड वेरायटी तैयार की जाती है. ऐसी क्रासिंग से मिलने वाली फर्स्ट जेनरेशन हाइब्रिड वेरायटी की उपज मूल प्रजाति से अधिक होने की संभावना रहती है. साइंटिस्ट ने जेनेटिक माडिफिकेशन के जरिए सरसों की हाइब्रिड वेरायटी तैयार कर ली है. इसका नाम DMH-11 रखा गया है. इस किस्म को पैदा करने के लिए भारतीय सरसों की प्रजाति वरुणा और पूर्वी यूरोप की किस्म अर्ली हीरा-2 की क्रासिंग कराई गई है. मूल सरसों से इसका उत्पादन कहीं अधिक बताया जा रहा है.  
 

Disclaimer: खबर में दी गई कुछ जानकारी मीडिया रिपोर्ट्स पर आधारित है. किसान भाई, किसी भी सुझाव को अमल में लाने से पहले संबंधित विशेषज्ञ से सलाह जरूर लें.

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