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अदरक की खेती से हर साल होगी लाखों की कमाई, बस इन बातों को ध्यान में रख करें बुवाई

Ginger Farming Tips: अदरक की खेती कम लागत में बंपर मुनाफे का बेस्ट जरिया है. सही समय पर बुवाई और मॉडर्न तकनीक अपनाकर किसान हर साल लाखों कमा सकते हैं.

Ginger Farming Tips: आज के दौर में खेती सिर्फ पेट भरने का जरिया नहीं. बल्कि एक शानदार बिजनेस आइडिया बन चुकी है. अगर आप भी खेती के जरिए मोटा मुनाफा कमाना चाहते हैं. तो अदरक की खेती पर दांव लगा सकते है. अदरक एक ऐसी चीज है जिसकी डिमांड चाय की चुस्की से लेकर रसोई के खानों और आयुर्वेदिक दवाओं तक 12 महीने बनी रहती है.

सबसे मजेदार बात यह है कि इसे आप गन्ने जैसी दूसरी फसलों के साथ इंटरक्रॉपिंग करके भी उगा सकते हैं. जिससे आपकी कमाई डबल हो जाती है. बस जरूरत है सही समय पर बुवाई और कुछ मॉडर्न तकनीक अपनाने की जिससे कम लागत में बंपर पैदावार ली जा सके.

मई के महीने में करें बुवाई

अदरक की बुवाई के लिए मई का महीना सबसे बेस्ट माना जाता है. क्योंकि मानसून आने से पहले का यह समय इसे सेट होने के लिए जरूरी गर्मी देता है. अदरक एक ट्रॉपिकल फसल है. जिसे शुरुआत में 25 से 35 डिग्री के बीच का तापमान और नमी बहुत पसंद आती है. हालांकि जब इसकी गांठें यानी कंद बनने लगते हैं. 

तब इसे थोड़ा ठंडा और सूखा मौसम चाहिए होता है. मिट्टी की बात करें तो दोमट या हल्की दोमट मिट्टी इसके लिए स्वर्ग जैसी है. बस ध्यान रहे कि खेत में पानी जमा न हो क्योंकि जलभराव इसकी जड़ों को गला सकता है. खेत तैयार करते समय दो-तीन बार गहरी जुताई करें और मिट्टी का पीएच लेवल 5.5 से 6.5 के बीच रखें.

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बीज का सही चुनाव

खेती में सफलता का असली राज बीज की क्वालिटी में छिपा होता है. एक एकड़ के लिए करीब 10-12 क्विंटल स्वस्थ और रोगमुक्त कंद की जरूरत पड़ती है. बीज के लिए अदरक के टुकड़ों को 20-25 ग्राम के साइज में काटें. जिसमें कम से कम एक-दो अंकुरित होने वाली आंखें जरूर हों. 

बोने से पहले इन टुकड़ों को 30 मिनट तक मैनकोजेब के घोल में भिगोकर छाया में सुखा लेना चाहिए. जिससे फंगस और बीमारियों का खतरा खत्म हो जाए. बुवाई हमेशा बेड या मेड़ बनाकर करें. जिसमें लाइन से लाइन की दूरी 30-45 सेमी और पौधों के बीच 15-20 सेमी का गैप हो. कंदों को 5-7 सेमी गहराई पर लगाकर ऊपर से खाद या मिट्टी से ढक दें.

इन बातों का रखें ध्यान

अदरक को ताकत देने के लिए ऑर्गेनिक खाद यानी गोबर की खाद का भरपूर इस्तेमाल करें. कम से कम 2-3 टन प्रति एकड़. रासायनिक खाद में एनपीके का सही अनुपात (50:40:40) पौधों की ग्रोथ के लिए जरूरी है. सिंचाई का खास ख्याल रखें. गर्मी में हर हफ्ते पानी दें और बारिश में जल निकासी का सिस्टम मजबूत रखें. करीब 8-9 महीने बाद जब पत्तियां पीली पड़ने लगें. तो समझ लीजिए कि आपकी मेहनत रंग ला चुकी है. 

इतनी हो सकती है कमाई

एक हेक्टेयर से 150-200 क्विंटल तक पैदावार मिल सकती है और बाजार में इसकी अच्छी कीमत होने के कारण आप आसानी से लाखों का मुनाफा कमा सकते हैं. मार्केट में अदरक का भाव अक्सर 60 से 80 रुपये किलो के बीच रहता है. जिससे आपकी ग्रॉस इनकम 10 से 15 लाख रुपये तक पहुंच सकती है. लागत और मजदूरी निकालकर भी आप साल भर में 7 से 8 लाख रुपये का शुद्ध मुनाफा कमा सकते हैं. 

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About the author नीलेश ओझा

नीलेश ओझा पिछले पांच साल से डिजिटल पत्रकारिता में सक्रिय हैं. उनकी लेखन शैली में तथ्यों की सटीकता और इंसानी नजरिए की गहराई दोनों साथ-साथ चलती हैं.पत्रकारिता उनके लिए महज़ खबरें इकट्ठा करने या तेजी से लिखने का काम नहीं है. वह मानते हैं कि हर स्टोरी के पीछे एक सोच होनी चाहिए.  

कुछ ऐसा जो पाठक को सिर्फ जानकारी न दे बल्कि सोचने के लिए भी मजबूर करे. यही वजह है कि उनकी स्टोरीज़ में भाषा साफ़ होती है.लिखने-पढ़ने का शौक बचपन से रहा है. स्कूल की नोटबुक से शुरू हुआ यह सफर धीरे-धीरे पेशेवर लेखन और पत्रकारिता तक पहुंचा. आज भी उनके लिए लेखन सिर्फ पेशा नहीं है यह खुद को समझने और दुनिया से संवाद करने का ज़रिया है.

पत्रकारिता के अलावा वह साहित्य और समकालीन शायरी से भी गहराई से जुड़े हुए हैं. कभी भीड़ में तो कभी अकेले में ख्यालों को शायरी की शक्ल देते रहते हैं. उनका मानना है कि पत्रकारिता का काम सिर्फ घटनाएं गिनाना नहीं है. बल्कि पाठक को उस तस्वीर के उन हिस्सों तक ले जाना है. जो अक्सर नजरों से छूट जाते हैं.

उन्होंने स्पोर्ट्सविकी, क्रिकेट एडिक्टर, इनशॉर्ट्स और जी हिंदुस्तान जैसे प्रमुख प्लेटफॉर्म्स के साथ काम किया है.

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