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Coconut Day 2022: हर पेड़ से 80 फल और 80 साल में लाखों का मुनाफा देगा नारियल, इन 21 राज्यों में कर सकते हैं खेती

Coconut Cultivation: नारियल के पेड़ों पर कीटनाशकों के छिड़काव और महंगी खाद के इस्तेमाल की आवश्यकता नहीं होती, बल्कि जैविक विधि से खेती करके फलों का काफी अच्छा उत्पादन ले सकते हैं.

Coconut Farming in India: दुनियाभर में नारियल की मांग और खपत (Demand & Supple of Coconut)काफी ज्यादा है. ज्यादातर लोग अपनी सुबह की शुरुआत नारियल से ही करते हैं. ये स्वास्थ्य के लिहाज से फायदेमंद तो है ही, किसानों के लिये भी इसकी खेती (Coconut Cultivation) मुनाफे का सौदा साबित हो रही है. जानकारी के लिये बता दें कि नारियल का पेड़ (Coconut Tree) करीब 80 साल तक फल देता है. सिर्फ सालभर के अंदर इसके एक ही पेड़ से 80 नारियलों का उत्पादन (Coconut Production) मिलता है, जो बाजार में 40 से 100 रुपये प्रति फल के दाम (Coconut Price) पर बेचे जाते हैं.

भारत को नारियल का सबसे बड़ा उत्पादक देश कहते हैं. यहां फूड प्रोसेसिंग यूनिटों (Coconut Processing) में नारियल से कई खाद्य पदार्थ, कॉस्मेटिक्स, नारिलय का तेल (Coconut Oil) और नारियल पानी (Coconut Water) की भी खूब ही मांग रहती है. सिर्फ खान-पान के लिहाज से ही नहीं, इसका इस्तेमाल पूजा-पाठ में भी किया जाता है. इससे बनी खाद का इस्तेमाल (Coconut Fertilizer) भी शहरी खेती और फल के बागों में बड़े पैमाने पर होता है. यही कारण है कि पारंपरिक फसलों के मुकाबले नारियल की खेती (Coconut Farming) से किसान करीब 80 साल तक करोड़ों की आमदनी भी ले सकते हैं. 

इन बातों का रखें ध्यान
वैसे तो नारियल की बागवानी करना बेहद आसान है, लेकिन इस बीच कुछ खास बातों का ध्यान रखेंगे तो किसान कम समय में अच्छा मुनाफा भी कमा सकते हैं. इसकी खेती करने से पहले मौसम की जानकारी, मिट्टी की जांच और खेती की सही तकनीक का चुनाव करना चाहिये. इसके अलावा भारत में नारियल की कई उन्नत किस्में भी पाई जाती हैं, जिनमें से कुछ किस्मों के पेड़ साल भर फलों का उत्पादन देते हैं. इन पेड़ों से एक बार नारियल की तुड़ाई के बाद दोबारा फलत होने लगती है. बता दें कि नारियल का एक ही पेड़ सालभर में करीब 80 फलों का उत्पादन दे सकता है.

नारियल की खेती 
किसानों को इसलिए भी नारियल की खेती करने के लिए प्रोत्साहित किया जा रहा है, क्योंकि इसमें लागत कम और आमदनी कहीं ज्यादा होती है. दरअसल नारियल के पेड़ों पर कीटनाशकों के छिड़काव और महंगी खाद के इस्तेमाल की आवश्यकता नहीं होती, बल्कि जैविक विधि से खेती करके फलों का काफी अच्छा उत्पादन ले सकते हैं. कभी-कभी मौसम बदलते समय नारियल के पेड़ पर एरियोफाइट और सफेद कीड़ों का प्रकोप मंडराने लगता है, जिसकी रोकथाम के लिए नीम और गोमूत्र से बने जैविक कीटनाशकों का प्रयोग भी कर सकते हैं. बता दें नारियल के बागों में वर्षा आधारित सिंचाई की जाती है. नारियल की खेती के साथ-साथ दूसरी फसलों की अंतरवर्ती खेती करके अतिरिक्त आमदनी का इंतजाम भी कर सकते हैं.


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नारियल की खेती के लिए मिट्टी
नारियल की फसल से बेहतर उत्पादन लेने के लिए बलुई दोमट मिट्टी को सबसे बेहतर माना जाता है लेकिन काली पथरीली जमीन में इसकी खेती करने की मनाही रहती है इसके अलावा नारियल के बागों में पानी का जमाव भी नहीं होना चाहिए इसके लिए किसानों को जल निकासी व्यवस्था भी सुनिश्चित करनी चाहिए

नारियल की किस्में
वैसे तो दुनिया भर में नारियल की कई प्रकार की किस्मों को उगाया जाता है, लेकिन भारत में मिट्टी और जलवायु लिहाज से व्यवसायिक खेती करने के लिये 3 प्रजातियां काफी मशहूर है. इसमें लंबी, बौनी और संकर प्रजाति शामिल है.

  • लंबी प्रजाति के नारियल आकार में काफी बड़े होते हैं. इनकी उम्र भी बाकी किस्मों के मुकाबले थोड़ी ज्यादा होती है .इनका सबसे बड़ा फायदा यही है कि गैर परंपरागत इलाकों में भी इस किस्म के पौधों की रोपाई आराम से कर सकते हैं और नारियल के पेड़ों से बेहतर उत्पादन ले सकते हैं
  • लंबी प्रजाति के मुकाबले बोनी किस्मों की अवधि कम होती है. इस प्रजाति के फलों का आकार भी छोटा होता है. इनकी खेती के लिए सिंचाई और देखभाल में समय और श्रम की आवश्यकता होती है.
  • संकर प्रजाति यानी हाइब्रिड नारियल के पौधों को बौनी और लंबी किस्मों के मिश्रण से तैयार किया जाता है. संकर प्रजाति के नारियल पेड़ों पर फलों की संख्या काफी अधिक होती है. यदि अच्छी देखभाल की जाए तो संकर प्रजाति के नारियलों से किसान ज्यादा फायदा मिल सकता है.


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नारियल के पौधों की रोपाई
मानसून यानी बरसात के मौसम में नारियल के पौधे लगाना ज्यादा फायदेमंद रहता है, क्योंकि इस समय पौधों का विकास तेजी से होता है. इस मौसम में खेतों को जैविक विधि से तैयार किया जाता है. सबसे पहले गड्ढे बनाकर उनमें नीम की खली, गोबर की खाद और कंपोस्ट डाली जाती है, जिसके बाद नारियल के पौधों की रोपाई कर सकते हैं. इसकी खेती से बेहतर उत्पादन लेने के लिए 9 से 12 महीने पुराने पौधों की रोपाई करनी चाहिये. इस दौरान उन्नत किस्म के पौधों का चुनाव करना चाहिए, जिनमें 6 से 8 पत्तियां लगी हो. प्रति हेक्टेयर खेत में नारियल का पौधा रोपण करने के लिए 15 से 20 फीट की दूरी पर पौधे लगाए जा सकते हैं.

नारियल के पौधों की देखभाल
शुरुआत में रोपाई के बाद नारियल के पौधों को खास देखभाल (Coconut Plant Management) की जरूरत होती है. शुरुआत में पौधों की जड़ों में हल्की नमी बनाई जाती है, जिसके लिए किसान ड्रिप सिंचाई विधि (Drip Irrigation in Coconut Tree) का प्रयोग कर सकते हैं. बता दें कि गर्मियों में हर 3 दिन के बाद नारियल के पौधों को सींचना चाहिए. वहीं सर्दियों में 7 दिन में एक बार नारियल के पौधों की सिंचाई करना फायदेमंद रहता है. नारियल के बागों में 3 से 4 साल तक अच्छी देखभाल और प्रबंधन की जरूरत होती है, जिसके बाद 4 साल के अंदर पेड़ों से भरपूर फलों का उत्पादन (Coconut Production in India) ले सकते हैं. इस तरह कम लागत में करीब 80 सालों तक नारियल के बागों (Coconut Farm) से किसानों की आर्थिक स्थिति मजबूत हो सकती है.


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Disclaimer: यहां मुहैया सूचना सिर्फ कुछ मीडिया रिपोर्ट्स और जानकारियों पर आधारित है. ABPLive.com किसी भी तरह की जानकारी की पुष्टि नहीं करता है. किसी भी जानकारी को अमल में लाने से पहले संबंधित विशेषज्ञ से सलाह लें.

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