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Urad Cultivation: मक्का-ज्वार के साथ करें उड़द की सह-फसली खेती, मानसून की 2-3 बारिश पड़ने पर करें बुवाई

Kharif Urad Farming: वैसे तो उड़द की फसल में ज्यादा सिंचाई की जरूरत नहीं पड़ती, लेकिन बेहतर पैदावार के लिये फसल और मिट्टी में नमी बनाये रखना जरूरी है.

Co-Cropping Of Pulses: खरीफ सीजन में किसानों द्वारा प्रमुख दलहनी फसलों की खेती को खास तवज्जो दी जाती है, क्योंकि बारिश के चलते मिट्टी को नमी के साथ पोषण मिल जाता है और खेत में अलग से सिंचाई करने की जरूरत नहीं पड़ती. खासकर उड़द की खेती की बात करें, तो खरीफ सीजन में नमी और बारिश के बीच इसकी खेती करने से अच्छी क्वालिटी की दाल मिलती है, जिसका बाजार में काफी अच्छा दाम मिल जाता है.

उड़द की खेती मुख्य रूप से महाराष्ट्र, आंधप्रदेश, उत्तरप्रदेश, हरियाणा, पंजाब, राजस्थान, मध्यप्रदेश, पश्चिम बंगाल, तमिलनाडू और बिहार आदि राज्यों में की जाती है. इसकी फसल लेने से पहले खेत में जल निकासी की व्यवस्था कर देनी चाहिये. जिससे बारिश में जल भराव के कारण फसल को कोई नुकसान न पहुंचे. 

ऐसे करें  खेत की तैयारी
उड़द से बेहतर उत्पादन लेने के लिये अच्छी जल निकासी वाली हल्की रेतीली या दोमट बेहतर रहती है. इसकी खेती से पहले खेत में 3-4 गहरी जुताईयां करके गोबर की खाद को मिट्टी में मिला देना चाहिये. आखिरी जुताई के बाद खेत का समतलीकरण करके 2-3 अच्छी बारिश होने दें. खेत को बारिश के नमी मिलने के बाद ही बीजों की बुवाई का काम शुरु करना ठीक रहता है. इसके अलावा, दलहनी फसलों से अच्छी उपज के लिये उचित मात्रा में गंधक युक्त उर्वरक जैसे सिंगल सुपर फास्फेट, अमोनियम सल्फेट, जिप्सम आदि का भी प्रयोग लाभकारी रहता है.

जानें बुवाई की सही तकनीक
उड़द की बिजाई के लिये एक हैक्टेयर खेत में 15-20 किग्रा बीज दर का प्रयोग होता है, लेकिन उड़द की सह-फसली खेती करने पर 6-8 किग्रा. प्रति एकड़ के हिसाब से बीज काफी रहते हैं. बुवाई से पहले बीजों का उपचार जरूर करें, इससे फसल में कीड़े लगने और बीमारियों के पनपने की संभावना कम हो जाती है. 

  • जून के अंतिम सप्ताह में अच्छी बारिश होने के बाद उड़द की बुवाई का काम करें.
  • बुवाई के समय खेत में बीजों के नीचे गोबर की खाद डालें और फिर बीजों को 4-6 इंच गहराई में दबायें.
  • उड़द की बुवाई कतारों में करें, जिससे निराई-गुड़ाई और पोषण प्रबंधन में आसानी रहे.
  • इस बीच कतार से कतार के बीच 30 सेमी. और पौध से पौध के बीच 10 सेमी. का फासला रखें.
  • वैसे तो उड़द की फसल में ज्यादा सिंचाई की जरूरत नहीं पड़ती, लेकिन फसल और मिट्टी में नमी बनाये रखना जरूरी है.
  • बेहतरीन उत्पादन के लिये फलियां बनते समय हल्की सिंचाई का काम कर देंना चाहिये.

Disclaimer: यहां मुहैया सूचना सिर्फ कुछ मीडिया रिपोर्ट्स और जानकारियों पर आधारित है. ABPLive.com किसी भी तरह की जानकारी की पुष्टि नहीं करता है. किसी भी जानकारी को अमल में लाने से पहले संबंधित विशेषज्ञ से सलाह लें.

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