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सुपरफूड ब्लूबेरी की खेती से बदलेगी किस्मत, कम पानी और कम मेहनत में बंपर पैदावार

Blueberry Cultivation Tips: अब विदेशी सुपरफूड ब्लूबेरी उगाकर किसान अपनी किस्मत बदल सकते हैं. कम पानी और बेहद कम मेहनत में तैयार होने वाली इस फसल की मार्केट में भारी डिमांड है.

Blueberry Cultivation Tips:  अक्सर जब पारंपरिक खेती में लागत के मुकाबले मुनाफा कम होने लगता है. तो हमारे बहुत से किसान निराश हो जाते हैं. लेकिन आज हम आपको एक ऐसे जादुई फल के बारे में बताने जा रहे हैं जो आपकी किस्मत को पूरी तरह बदल सकता है. हम बात कर रहे हैं विदेशी सुपरफूड ब्लूबेरी की जिसकी नई किस्में अपने देश के मौसम में बंपर पैदावार देने के लिए बिल्कुल मुफीद हैं.

एंटी-ऑक्सीडेंट से भरपूर होने के कारण मार्केट में इसकी डिमांड बहुत ज्यादा है और सप्लाई बेहद कम जिसके चलते यह फल 800 रुपये से 1000 रुपये प्रति किलो के ऊंचे रेट पर बिकता है. सबसे अच्छी बात यह है कि इसकी खेती में न तो ज्यादा पानी खर्च होता है और न ही दिन-रात की हाड़-तोड़ मेहनत की जरूरत पड़ती है. जान लें इसकी खेती का तरीका.

ऐसे करें ब्लूबेरी की स्मार्ट शुरुआत

अगर आप भी ब्लूबेरी की खेती शुरू करना चाहते हैं. तो इसके लिए मिट्टी की सही तैयारी सबसे ज्यादा जरूरी है. ब्लूबेरी के पौधों को एसिडिक यानी अम्लीय मिट्टी की जरूरत होती है. जिसका पीएच (pH) लेवल 4.5 से 5.5 के बीच होना चाहिए. इसके लिए आप मिट्टी में कोकोपीट, पाइन बार्क या जिप्सम मिलाकर उसे तैयार कर सकते हैं.

इस तरह करें सिंचाई

पानी की बचत के लिए ड्रिप इरिगेशन यानी टपक सिंचाई का तरीका सबसे बेस्ट रहता है क्योंकि इसके पौधों को लगातार नमी तो चाहिए होती है पर जड़ों में पानी बिल्कुल भी नहीं जमा होना चाहिए. शुरुआत में आप इसके पौधों को बड़े गमलों या ग्रो बैग्स में भी लगा सकते हैं. जिससे इनकी देखभाल करना और भी आसान हो जाता है.

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एक बार लगाएं और सालों-साल कमाएं

ब्लूबेरी की खेती को किसानों के लिए एक बेहतरीन इन्वेस्टमेंट माना जाता है. क्योंकि इसका पौधा एक बार लगाने के बाद लगभग 10 से 15 सालों तक लगातार फल देता रहता है. पौधा लगाने के दूसरे साल से ही इसमें फूल और फल आने शुरू हो जाते हैं और समय के साथ इसकी पैदावार लगातार बढ़ती जाती है. चूंकि भारत में इसका प्रोडक्शन अभी बहुत शुरुआती स्टेज में है. 

हर जगह रहती है मांग

इसलिए आपको लोकल मंडियों से लेकर बड़े-बड़े सुपरमार्केट्स और ऑनलाइन ग्रोसरी ऐप्स पर इसके बहुत ही कड़क दाम मिलेंगे. कम लागत और कम मेहनत में लाखों का तगड़ा मुनाफा देने वाला यह कृषि मॉडल आज के दौर में किसानों को लखपति बनाने का सबसे धांसू जरिया साबित हो रहा है.

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About the author नीलेश ओझा

नीलेश ओझा पिछले पांच साल से डिजिटल पत्रकारिता में सक्रिय हैं. उनकी लेखन शैली में तथ्यों की सटीकता और इंसानी नजरिए की गहराई दोनों साथ-साथ चलती हैं.पत्रकारिता उनके लिए महज़ खबरें इकट्ठा करने या तेजी से लिखने का काम नहीं है. वह मानते हैं कि हर स्टोरी के पीछे एक सोच होनी चाहिए.  

कुछ ऐसा जो पाठक को सिर्फ जानकारी न दे बल्कि सोचने के लिए भी मजबूर करे. यही वजह है कि उनकी स्टोरीज़ में भाषा साफ़ होती है.लिखने-पढ़ने का शौक बचपन से रहा है. स्कूल की नोटबुक से शुरू हुआ यह सफर धीरे-धीरे पेशेवर लेखन और पत्रकारिता तक पहुंचा. आज भी उनके लिए लेखन सिर्फ पेशा नहीं है यह खुद को समझने और दुनिया से संवाद करने का ज़रिया है.

पत्रकारिता के अलावा वह साहित्य और समकालीन शायरी से भी गहराई से जुड़े हुए हैं. कभी भीड़ में तो कभी अकेले में ख्यालों को शायरी की शक्ल देते रहते हैं. उनका मानना है कि पत्रकारिता का काम सिर्फ घटनाएं गिनाना नहीं है. बल्कि पाठक को उस तस्वीर के उन हिस्सों तक ले जाना है. जो अक्सर नजरों से छूट जाते हैं.

उन्होंने स्पोर्ट्सविकी, क्रिकेट एडिक्टर, इनशॉर्ट्स और जी हिंदुस्तान जैसे प्रमुख प्लेटफॉर्म्स के साथ काम किया है.

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