उड़द की खेती के लिए मिलेगी सरकारी मदद, जानें कैसे मिलेगा फायदा?
उड़द की खेती करने वाले किसानों के लिए लागत कम करने का अच्छा मौका है. सरकारी मदद पाने के लिए कुछ जरूरी शर्तें पूरी करनी होंगी और सही तरीके से आवेदन करना होगा. छोटी सी गलती से फायदा रुक सकता है.

- उत्तर प्रदेश सरकार उड़द बीज पर 50% सब्सिडी देगी.
- सब्सिडी के लिए किसानों को रजिस्ट्रेशन करके ऑनलाइन आवेदन करना होगा.
- प्रमाणित बीज बेहतर क्वालिटी का होगी लेकिन अच्छी पैदावार के लिए सही बुवाई भी जरूरी.
खेती में बीज से लेकर खाद, सिंचाई और मजदूरी हर चीज का खर्च लगातार बढ़ता रहा है. खर्च बढ़ने का सीधा असर किसानों की कमाई पर पड़ता है. सबसे ज्यादा परेशानी छोटे किसानों को होती है जिनके पास हर सीजन नई फसल लगाने के लिए बड़ा बजट नहीं होता. ऐसे किसानों के लिए दलहन की खेती एक अच्छा ऑप्शन मानी जाती है. उड़द कम समय में तैयार हो जाती है और इसकी बाजार में डिमांड भी बनी रहती है.
अब उत्तर प्रदेश में उड़द की खेती करने वाले किसानों को बीज खरीदने में सरकारी मदद मिलेगी. कृषि विभाग की ओर से सब्सिडी पर बीज देने के लिए ऑनलाइन बुकिंग शुरू की गई है. इसके तहत किसान तय क्वालिटी का बीज कम कीमत में ले सकते हैं. इससे खेती की शुरुआती लागत कम करने में मदद मिलेगी. हालांकि सब्सिडी का फायदा लेने के लिए किसान का रजिस्ट्रेशन पूरा होना जरूरी है. जान लीजिए क्या इसके लिए आवेदन की पूरी प्रोसेस
बीज पर मिलेगी 50 प्रतिशत सब्सिडी
उत्तर प्रदेश के किसान उड़द का प्रमाणित बीज 50 प्रतिशत सब्सिडी पर खरीद सकते हैं. बीज की तय कीमत का आधा हिस्सा किसान को देना होगा और बाकी हिस्सा सरकार की मदद से कवर किया जाएगा. सब्सिडी की फाइनल रकम बीज की वैरायटी, पैकेट के वजन और विभाग की तय कीमत पर निर्भर करेगी. किसान को कितनी मात्रा में बीज मिलेगा यह उसकी जमीन और योजना की लिमिट के हिसाब से तय हो सकता है.
सब्सिडी पर मिलने वाला प्रमाणित बीज बेहतर क्वालिटी और सही अंकुरण के लिए तैयार किया जाता है. इससे खराब और नकली बीज खरीदने का रिस्क कम हो सकता है. हालांकि सिर्फ अच्छा बीज मिलने से ज्यादा पैदावार की गारंटी नहीं होती. किसान को सही समय पर बुवाई, पानी की निकासी और कीटों से बचाव पर भी ध्यान देना होगा. उड़द के लिए ऐसी जमीन बेहतर रहती है. जहां बारिश का पानी जमा न हो. बीज लेने से पहले स्थानीय कृषि अधिकारी से अपने इलाके के लिए सही वैरायटी की जानकारी जरूर लें.

फार्मर रजिस्ट्री होना जरूरी
सरकारी सब्सिडी पाने के लिए किसान की फार्मर रजिस्ट्री पूरी होनी चाहिए. इसमें किसान की पहचान और जमीन से जुड़ी जानकारी एक रिकॉर्ड में जोड़ी जाती है. जिन किसानों ने अभी तक फार्मर रजिस्ट्री नहीं कराई है. उन्हें बीज बुक करते समय परेशानी हो सकती है. किसान अपने नजदीकी जनसेवा केंद्र, कृषि विभाग के कार्यालय और फार्मर रजिस्ट्री पोर्टल के जरिए यह प्रोसेस पूरा कर सकते हैं.
रजिस्ट्री के लिए आधार कार्ड, आधार से लिंक मोबाइल नंबर और जमीन से जुड़े रिकॉर्ड की जरूरत पड़ सकती है. किसान का नाम आधार और जमीन के रिकॉर्ड में अलग है. तो पहले उसे सही कराना होगा. बैंक खाते की जानकारी भी अपडेट होनी चाहिए. क्योंकि कुछ मामलों में सब्सिडी की रकम डीबीटी के जरिए भेजी जा सकती है. आवेदन से पहले किसान अपने रजिस्ट्रेशन का स्टेटस जरूर चेक कर लें. गलत जानकारी भरने पर आवेदन रुक सकता है.
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ऐसे करें उड़द के बीज की बुकिंग
उड़द के बीज की बुकिंग के लिए किसान उत्तर प्रदेश कृषि विभाग के ऑफिशियल पोर्टल पर विजिट कर सकते हैं. पोर्टल पर बीज बुकिंग का ऑप्शन चुनने के बाद किसान रजिस्ट्रेशन नंबर और मांगी गई दूसरी जानकारी भरनी होगी. इसके बाद जिला, ब्लॉक, फसल, बीज की वैरायटी और जरूरी मात्रा सिलेक्ट करें. सभी जानकारी चेक करने के बाद आवेदन सबमिट कर दें. बुकिंग पूरी होने पर मिलने वाला नंबर और रसीद अपने पास रखें.
ऑनलाइन प्रोसेस समझ नहीं आने पर किसान जनसेवा केंद्र और राजकीय कृषि बीज भंडार से मदद ले सकते हैं. बीज का स्टॉक हर जिले में एक जैसा नहीं हो सकता. इसलिए बुकिंग के बाद यह जरूर पता करें कि बीज किस सेंटर से और किस तारीख तक मिलेगा. बीज लेते समय पैकेट की सील, वैरायटी, बैच नंबर और एक्सपायरी डेट चेक करें. किसी अनजान व्यक्ति को नकद पैसे देकर बुकिंग न कराएं. ऑफिशियल पोर्टल से ही बुकिंग करें.
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