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एक एकड़ में केले की खेती से कितनी होगी कमाई, जानें पूरा हिसाब

केले की डिमांड बाजार में लगभग पूरे साल बनी रहती है. ऐसे में एक एकड़ जमीन भी किसानों के लिए कमाई का अच्छा जरिया बन सकती है. एक एकड़ में केले की केती से कितना पैसा बचेगा जानें पूरा हिसाब.

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  • एक एकड़ में करीब 1200 से 1800 केले के पौधे लगाए जा सकते हैं.
  • केले की खेती पर करीब 80 हजार से 1.20 लाख रुपये तक खर्च आ सकता है.
  • सही उत्पादन और बेहतर भाव मिलने पर करीब 2 से 4 लाख रुपये तक मुनाफा हो सकता है.

अगर आप खेती के लिए ऐसी फसल तलाश रहे हैं जिसकी मार्केट में लगभग पूरे साल मांग बनी रहती है. तो केला अच्छा ऑप्शन बन सकता है. गांव से लेकर शहरों तक में के फल बाजार में केला रोज बिकने वाले फलों में शामिल है. इसकी खासियत यह है कि इसकी कीमत ज्यादा नहीं होती और आम आदमी भी इस फल को खूब खरीदता है. इसलिए इसकी खेती कभी घाटे में नहीं जाती है. आप भी अगर अपनी जमीन पर इसकी खेती करते हैं तो उससे बढ़िया उत्पादन ले सकते हैं.

एक एकड़ में केले की खेती शुरू करने से पहले खर्च का हिसाब समझना भी जरूरी है. पौधे, सिंचाई, खाद, मजदूरी, बांस के सहारे और कटाई जैसे कामों पर कितना पैसा लगता है. अच्छी फसल मिलने के बाद बाजार भाव सही रहा तो लागत निकालकर किसान के हाथ में अच्छा मुनाफा आता है. चलिए आपको बताते हैं इसका पूरा हिसाब-किताब.

एक एकड़ में कितने पौधे लगाए जा सकते हैं?

केले की खेती के लिए खेत में पानी की निकासी अच्छी होनी चाहिए. क्योंकि लंबे समय तक पानी जमा रहने से पौधों की जड़ों को नुकसान पहुंच सकता है. खेत तैयार करते वक्त गहरी जुताई के बाद मिट्टी को भुरभुरा कर लेना बेहतर रहता है. पौधों के बीच करीब 1.5 से 1.8 मीटर की दूरी रखी जा सकती है. दूरी और अपनाई गई रोपाई पद्धति के हिसाब से एक एकड़ में तकरीबन 1200 से 1800 पौधे लगाए जा सकते हैं. 

किसान टिश्यू कल्चर वाले अच्छी क्वालिटी के पौधे चुन सकते हैं जिससे खेत में पौधों की ग्रोथ लगभग एक जैसी रखने में मदद मिलती है. ग्रैंड नैन जैसी किस्में कमर्शियल खेती में काफी इस्तेमाल होती हैं. रोपाई के बाद सिंचाई पर खास ध्यान देना पड़ता है. ड्रिप सिस्टम से पौधे की जड़ के पास जरूरत के हिसाब से पानी पहुंचाया जा सकता है. पौधों की रेगुलर निगरानी और सही न्यूट्रिशन मैनेजमेंट अच्छी क्वालिटी के गुच्छे तैयार करने में मदद करता है.


एक एकड़ में केले की खेती से कितनी होगी कमाई, जानें पूरा हिसाब

एक एकड़ की खेती पर कितना आ सकता है खर्च?

अब सबसे जरूरी सवाल लागत का है. एक एकड़ केले की खेती में खर्च किसान के इलाके, पौधों की कीमत, मजदूरी और पहले से मौजूद सिंचाई सुविधा के हिसाब से बदल सकता है. मान लीजिए किसान करीब 1500 टिश्यू कल्चर पौधे लगाता है. पौधों की खरीद पर लगभग 20 से 30 हजार रुपये तक खर्च हो सकते हैं. खेत तैयार करने, गड्ढे बनाने, खाद और उर्वरक देने, सिंचाई, निराई और मजदूरी को जोड़ने पर खर्च बढ़ जाता है.

पौधों पर फल आने के बाद भारी गुच्छों को गिरने से बचाने के लिए बांस के सहारे की जरूरत भी पड़ सकती है. बीमारी और कीट मैनेजमेंट के साथ कटाई और फल मंडी तक पहुंचाने का खर्च भी जोड़ना जरूरी है. इस तरह एक एकड़ में केले की फसल तैयार करने पर करीब 80 हजार से 1.20 लाख रुपये तक लागत आ सकती है. वहीं अगर आप ड्रिप सिंचाई व्यवस्था इस्तेमाल करते हैं तो शुरुआती खर्च इससे ज्यादा हो सकता है.

यह भी पढ़ें: इस राज्य में कृषि यंत्रों पर 80% छूट, जानें कैसे उठा सकते हैं फायदा

कितनी हो सकती है टोटल कमाई?

केले की फसल आमतौर पर रोपाई के करीब 11 से 15 महीने के भीतर कटाई के लिए तैयार हो सकती है. कमाई का असली हिसाब प्रति पौधा मिलने वाले गुच्छे के वजन और बाजार में केले के भाव पर टिका रहता है. अगर खेत में करीब 1500 पौधे लगाए गए हैं और पौधों से औसतन 20 से 25 किलो का गुच्छा मिलता है तो कुल उत्पादन करीब 30 से 37 टन के आसपास पहुंच सकता है. 


एक एकड़ में केले की खेती से कितनी होगी कमाई, जानें पूरा हिसाब

अब मान लीजिए किसान को औसतन 10 से 15 रुपये प्रति किलो का भाव मिलता है तो ग्रॉस इनकम करीब 3 लाख से 5.5 लाख रुपये तक पहुंच सकती है. इसमें से करीब 80 हजार से 1.20 लाख रुपये की अनुमानित लागत निकालने के बाद किसान के पास लगभग 2 लाख से 4 लाख रुपये तक बच सकते हैं. हालांकि उत्पादन, क्वालिटी, मौसम, फसल नुकसान और रेट बदलने से असली मुनाफा कम या ज्यादा हो सकता है.

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About the author नीलेश ओझा

नीलेश ओझा पिछले पांच साल से डिजिटल पत्रकारिता में सक्रिय हैं. उनकी लेखन शैली में तथ्यों की सटीकता और इंसानी नजरिए की गहराई दोनों साथ-साथ चलती हैं.पत्रकारिता उनके लिए महज़ खबरें इकट्ठा करने या तेजी से लिखने का काम नहीं है. वह मानते हैं कि हर स्टोरी के पीछे एक सोच होनी चाहिए.  

कुछ ऐसा जो पाठक को सिर्फ जानकारी न दे बल्कि सोचने के लिए भी मजबूर करे. यही वजह है कि उनकी स्टोरीज़ में भाषा साफ़ होती है.लिखने-पढ़ने का शौक बचपन से रहा है. स्कूल की नोटबुक से शुरू हुआ यह सफर धीरे-धीरे पेशेवर लेखन और पत्रकारिता तक पहुंचा. आज भी उनके लिए लेखन सिर्फ पेशा नहीं है यह खुद को समझने और दुनिया से संवाद करने का ज़रिया है.

पत्रकारिता के अलावा वह साहित्य और समकालीन शायरी से भी गहराई से जुड़े हुए हैं. कभी भीड़ में तो कभी अकेले में ख्यालों को शायरी की शक्ल देते रहते हैं. उनका मानना है कि पत्रकारिता का काम सिर्फ घटनाएं गिनाना नहीं है. बल्कि पाठक को उस तस्वीर के उन हिस्सों तक ले जाना है. जो अक्सर नजरों से छूट जाते हैं.

उन्होंने स्पोर्ट्सविकी, क्रिकेट एडिक्टर, इनशॉर्ट्स और जी हिंदुस्तान जैसे प्रमुख प्लेटफॉर्म्स के साथ काम किया है.

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