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अगर जानवर नहीं कर रहा जुगाली तो हल्के में ना लें, हो सकती हैं ये गंभीर बीमारियां

अगर कोई जानवर जुगाली करना बंद कर दे, सुस्त रहने लगे या उसका वजन कम होने लगे, तो यह जॉन्स डिजीज जैसी गंभीर बीमारी का संकेत हो सकता है, जिसकी समय पर पहचान बेहद जरूरी है.

पशुपालकों के लिए उनके जानवर की सेहत सबसे बड़ी चिंता होती है, और कई छोटे-छोटे लक्षणों को नजरअंदाज कर देते हैं जो आगे चलकर एक गंभीर बीमारी का रूप ले लेते हैं. इन्हीं लक्षणों में से एक है जुगाली न करना, जिसे कई बार मामूली समझकर नजरअंदाज कर दिया जाता है.  लेकिन सच यह है कि अगर कोई जानवर लगातार जुगाली बंद कर दे, सुस्त रहने लगे और खाना कम खाए, तो यह उसके शरीर के अंदर पनप रही किसी गंभीर बीमारी का इशारा हो सकता है. ऐसी ही एक खतरनाक बीमारी है जॉन्स डिजीज, जिसका असली खतरा यह है कि यह बहुत धीरे-धीरे शरीर को कमजोर करती है और शुरुआती दौर में पकड़ में ही नहीं आती. 

क्या है जॉन्स डिजीज और इसके लक्षण?

यह बीमारी एक खास तरह के बैक्टीरिया से होती है, जिसे माइकोबैक्टीरियम एवियम सबस्पीशीज पैराट्यूबरकुलोसिस कहा जाता है, जो एक तरह से इंसानों और जानवरों में टीबी फैलाने वाले बैक्टीरिया से जुड़ा होता है. सबसे चिंता वाली बात यह है कि यह बीमारी सिर्फ एक-दो जानवरों तक सीमित नहीं है, बल्कि भेड़, बकरी, बाइसन और हिरण जैसे सभी जुगाली करने वाले जानवर भी इससे प्रभावित होते हैं. इसके लक्षण अक्सर 2 से 5 साल की उम्र में दिखते हैं. जानवर कमजोर और दुबला दिखने लगता है, लेकिन हैरानी की बात यह है कि उसे बुखार नहीं होता और भूख भी सामान्य बनी रहती है.  शुरुआत में हल्का दस्त होता है, जो धीरे-धीरे बहुत गंभीर रूप ले लेता है. 

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यह बीमारी फैलती कैसे है?

यह बीमारी फैलती कैसे है, यह जानना भी बेहद जरूरी है. यह आमतौर पर दूषित कोलोस्ट्रम, दूध, पानी या मल खाने-पीने से फैलती है, और ज्यादातर मामलों में जानवर इसे बहुत छोटी उम्र में ही, यानी जन्म के 24 घंटों के भीतर ही पकड़ लेता है. सबसे खतरनाक पहलू यह है कि संक्रमण से लक्षण दिखने तक का समय आम तौर पर 2 से 5 साल तक लंबा होता है, जो दूसरी बीमारियों से बिल्कुल अलग है, जहां यह समय 14 दिन से भी कम होता है.  यानी जानवर बाहर से बिल्कुल सेहतमंद दिख सकता है, जबकि उसके अंदर बीमारी पहले से ही फैल चुकी होती है. 

इस बीमारी से बचाव ही सबसे बड़ा उपाय

दुर्भाग्य से इस बीमारी का कोई पक्का इलाज नहीं है, इसलिए बचाव ही सबसे बड़ा हथियार है. कोई भी दवा, एंटीबायोटिक या डाइट में बदलाव इस इंफेक्शन को ठीक नहीं कर सकता, और अमेरिका में अभी इसके लिए कोई वैक्सीन भी उपलब्ध नहीं है.  कुल मिलाकर, अगर आपका जानवर जुगाली करना कम कर दे या बंद कर दे, तो इसे बिल्कुल भी हल्के में न लें, बल्कि बिना देर किए पशु चिकित्सक से सलाह लें, क्योंकि समय पर पहचान ही इस तरह की गंभीर बीमारियों से झुंड को बचाने का सबसे अच्छा तरीका है. 

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