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नारों के शोर में मुद्दों को गुम करने वाली राजनीति की घंटी बजाओ
राजनीति में नारों की बड़ी अहमियत होती है. चुनाव जिताने में अहम भूमिका निभा सकते हैं और उल्टे पड़ जाएं तो गले की आफत बन सकते हैं. नारे राजनीतिक दलों को जीत दिलाएं कोई सवाल इस पर नहीं. लेकिन जनता की हार अगर नारों के शोर में हो तो घंटी बजानी जरूरी है. अब आगे आपको ये जानना जरूरी है
क्यों बीजेपी चौकीदारों के सम्मान से राहुल के चौकीदार चोर है के नारे को जोड़ रही है ?
क्या प्रधानमंत्री की भावनात्मक राजनीति से राहुल गांधी हार जाएंगे ?
क्या राहुल-बीजेपी की चौकीदार पॉलिटिक्स ने जनता के असली मुद्दों को लापता कर दिया है ?
क्यों बीजेपी चौकीदारों के सम्मान से राहुल के चौकीदार चोर है के नारे को जोड़ रही है ?
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