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पुलिसकर्मियों के खिलाफ युवक का सुसाइड नोट
एक बार फिर लगा है खाकी पर दाग...इस बार जगह है ललितपुर का खेड़ागंव...जहां कानून के रखवाले ने किया है शर्मसार...कानून के रखवालों पर लगा है एक कलंक जिसको मिटा पाना शायद अब किसी के हाथ में नहीं...क्योंकि अब उमाशंकर इस दुनिया में नहीं है...उसने मौत को बेहतर समझा जिंदगी से...क्योंकि खाकी ने उसे मजबूर कर दिया था..वो किसके पास जाता क्योंकि हर जगह उसे खाकी में दरिदें नजर आ रहे थे...
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श्रीप्रकाश सिंह, प्रोफेसरकुलपति, हेमवती नंदन बहुगुणा गढ़वाल विश्वविद्यालय, गढ़वाल उत्तराखंड
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