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ये मज़दूर ही कल के भारत का निर्माण करेंगे !माहौल क्या है? देखिये वीरेश पाण्डेय के साथ
ऐसा लग रहा है कि लॉकडाउन की मार सबसे ज्यादा मजदूरों पर पड़ी है। दो जून की रोटी के लिए मजदूरों ने गांव छोड़ा तो शहर ने भी अपनाया नहीं। कोरोना महामारी ने मजदूरों के सपने को चकनाचूर कर दिया। मजदूर, मजबूर और घर लौटने के लिए सहारा ढूंढ रहे हैं। देखिए माहौल क्या है में इन मजदूरों की दर्दभरी दास्तां।
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