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Voter List verification: महा में बढ़े हुए वोटरों पर सवाल,बिहार में वेरिफिकेशन से क्यों लगी मिर्ची?
चुनाव आयोग द्वारा मतदाता सूची की समीक्षा पर एक महत्वपूर्ण बहस हुई। इस समीक्षा को लेकर कई गंभीर सवाल उठाए गए हैं। जन स्वराज पार्टी के राष्ट्रीय महासचिव और प्रवक्ता पवन वर्मा ने इस प्रक्रिया में पारदर्शिता की कमी पर चिंता व्यक्त की। उन्होंने कहा कि चुनाव के ठीक दो महीने पहले यह समीक्षा की जा रही है, जबकि इसके लिए पहले भी पर्याप्त समय था। पवन वर्मा ने महाराष्ट्र में हुई पिछली समीक्षा का उदाहरण दिया, जहाँ एकाएक 34 लाख नए वोटर जुड़ गए थे और कई नाम सूची से हटा दिए गए थे। उन्होंने मांग की कि चुनाव आयोग को समीक्षा के दौरान जोड़े गए या हटाए गए नामों को सार्वजनिक रूप से प्रकाशित करना चाहिए ताकि सभी को इसकी जानकारी हो। बहस के दौरान यह भी चिंता जताई गई कि कहीं इस प्रक्रिया से 2 करोड़ वोटरों का हक न छीन लिया जाए। मुख्य मांग यह है कि चुनाव आयोग जो भी करे, वह पूरी पारदर्शिता के साथ करे। जैसा कि कहा गया, 'हमारी गुजारिश ये है कि अगर चुनाव आयोग ऐसा ऐसी समीक्षा करना चाहता है तो सबसे पहले उसमें पारदर्शिता होनी चाहिए पार्टियों के साथ।'
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