चांद पर जाना हो या पनडुब्बी बनाना, स्मॉल मॉड्यूलर रिएक्टर से परमाणु क्रांति मुमकिन, क्या है 'भारत SMR' पहल?
Nuclear Revolution: अंतरिक्ष में गर्मी पैदा करने के लिए परमाणु ऊर्जा चाहिए. सैटेलाइट और पनडुब्बी से लेकर जहाजों के लिए भी न्यूक्लियर रिएक्टर जरूरी हैं. अब भारत इसमें बड़ी महारत हासिल करने वाला है.

अडाणी ग्रुप उत्तर प्रदेश सरकार के साथ पब्लिक-प्राइवेट पार्टनरशिप में स्मॉल मॉड्यूलर रिएक्टर (SMR) बनाने के लिए बातचीत कर रहा है. यह भारत में न्यूक्लियर एनर्जी सेक्टर को प्राइवेट इन्वेस्टमेंट के लिए खोलने का हिस्सा है. अडाणी ग्रुप राज्य में 200 मेगावाट क्षमता वाले आठ SMR बनाने की योजना बना रहा है. अगर यह डील हो गई, तो अडाणी को कुल 1.6 गीगावाट की न्यूक्लियर क्षमता मिलेगी और वह भारत के न्यूक्लियर डेवलपमेंट में सबसे आगे होगा.
कई भारतीयों कंपनियों को SMR में रुची
भारत का न्यूक्लियर सेक्टर अब प्राइवेट कंपनियों के लिए खुल रहा है. रिलायंस इंडस्ट्रीज, टाटा पावर, अडाणी पावर, हिंडल्को, JSW एनर्जी और जिंदल स्टील एंड पावर जैसी बड़ी कंपनियां 'भारत SMR' इनिशिएटिव के तहत SMR डेवलप करने में इंटरेस्ट दिखा रही हैं. हाल ही में कानूनी बदलावों से प्राइवेट इन्वेस्टमेंट पहली बार संभव हुआ है, जिससे क्षमता बढ़ाने और इनोवेशन को बूस्ट मिलेगा.
2047 तक न्यूक्लियर एनर्जी क्षमता बढ़ाने का टारगेट
SMR टेक्नोलॉजी भारत की अलग-अलग और दूर-दराज की एनर्जी जरूरतों के लिए परफेक्ट है. भारत का लक्ष्य 2047 तक न्यूक्लियर एनर्जी क्षमता को 100 गीगावाट तक पहुंचाना है, जो बड़े रिएक्टरों और SMR की तेज डिप्लॉयमेंट पर निर्भर करेगा. इस साल की शुरुआत में पावर मिनिस्ट्री की एक पैनल ने रिपोर्ट में कहा कि मौजूदा 8.8 गीगावाट से 100 गीगावाट तक पहुंचने के लिए 19.28 ट्रिलियन रुपए (वर्तमान एक्सचेंज रेट पर 214 बिलियन डॉलर) की जरूरत होगी.
मोदी सरकार SMR रिसर्च और डेवलपमेंट पर तुरंत 2.23 बिलियन डॉलर (200 बिलियन रुपए) खर्च करने की योजना बना रही है. भारत पहले अमेरिका, रूस और फ्रांस के साथ SMR टेक्नोलॉजी कोऑपरेशन पर बात कर चुका है. सरकारी एजेंसियां अकेले न्यूक्लियर पावर टारगेट हासिल नहीं कर सकतीं. अब भारत प्राइवेट सेक्टर को टैप करना चाहता है, जहां पैसा ज्यादा है और समय पर कंस्ट्रक्शन और इनोवेशन की क्षमता है. अडाणी के साथ पब्लिक-प्राइवेट पार्टनरशिप से कंपनी को भारत के नए न्यूक्लियर पावर इंडस्ट्री में पहले आने का फायदा मिलेगा.
छोटे न्यूक्लियर पावर रिएक्टर क्या हैं?
इंटरनेशनल एटॉमिक एनर्जी एजेंसी (IAEA) 'छोटे' को 300 मेगावाट इलेक्ट्रिक (MWE) तक की क्षमता वाला मानती है, जो ट्रेडिशनल न्यूक्लियर पावर रिएक्टरों की एक-तिहाई है. 'मॉड्यूलर' का मतलब है कि सिस्टम और कंपोनेंट्स को फैक्ट्री में असेंबल करके यूनिट के रूप में लोकेशन पर ट्रांसपोर्ट किया जा सकता है. 'रिएक्टर' न्यूक्लियर फिशन से हीट जेनरेट करके एनर्जी बनाते हैं.
छोटे रिएक्टरों को स्पेशल टेक्नोलॉजी चाहिए, लेकिन वे ट्रांसमिशन के लिए कम खर्चीले हैं. चार तरह के छोटे रिएक्टर डेवलप हो रहे हैं- लाइट वॉटर रिएक्टर, फास्ट न्यूट्रॉन रिएक्टर, ग्रेफाइट-मॉडरेटेड हाई टेम्परेचर रिएक्टर और कुछ तरह के मोल्टन सॉल्ट रिएक्टर.
SMR पर कौन से देश काम कर रहे हैं?
अमेरिका में वेस्टिंगहाउस, बैबकॉक एंड विलकॉक्स, होल्टेक और न्यूस्केल पावर जैसे बड़े प्लेयर्स हैं. चीन में कुछ सबसे एडवांस्ड SMR हैं. चीन उत्तरी हिस्सों में कोल-बेस्ड हीटिंग प्लांट्स को रिप्लेस करने के लिए 100 से 200 MWT क्षमता वाले छोटे डिस्ट्रिक्ट-लेवल हीटिंग रिएक्टर डेवलप कर रहा है. भारत के 220 MWE प्रेशराइज्ड हेवी वॉटर रिएक्टर (PHWR) भी SMR हैं.
न्यूक्लियर पावर कॉरपोरेशन ऑफ इंडिया (NPCIL) 220 और 540 MWE वर्जन इंटरनेशनली ऑफर कर रहा है. पाकिस्तान के चश्मा में चाइनीज 300-325 MWE PWR (CNP-300) SMR है. यूके, कनाडा, रूस, जापान, साउथ कोरिया, डेनमार्क और साउथ अफ्रीका भी प्लेयर्स हैं.
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