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Thackeray Unity: BMC चुनाव, हिंदी नीति और मराठी अस्मिता का 'महासंग्राम'!
महाराष्ट्र में गैर-मराठियों पर हमलों और राज ठाकरे तथा उद्धव ठाकरे के 20 साल बाद एक साथ आने के पीछे बीएमसी चुनाव मुख्य कारण है. बीएमसी देश का सबसे अमीर निकाय है और इस पर कब्जा बनाए रखना उद्धव ठाकरे के लिए एक बड़ी चुनौती है. ठाकरे बंधुओं को मराठी अस्मिता का मुद्दा उठाने का अवसर सरकार की नई शिक्षा नीति से मिला, जिसमें महाराष्ट्र में तीन भाषा नीति लागू की गई थी और हिंदी को अनिवार्य बनाया गया था. हालांकि, इस फैसले का इतना विरोध हुआ कि मुख्यमंत्री फडणवीस को अपने कदम पीछे खींचने पड़े. राज्य सरकार ने 17 अप्रैल को एक सरकारी आदेश जारी किया था जिसमें कक्षा एक से पांच तक के स्कूलों में हिंदी को अनिवार्य भाषा के तौर पर लागू करने को कहा गया था. इस तीन भाषा फॉर्मूला में मराठी, अंग्रेजी और हिंदी को शामिल करने की बात थी. सरकार के इस फैसले के खिलाफ उद्धव ठाकरे और राज ठाकरे ने मोर्चा खोल दिया. यह विरोध इतना बड़ा था कि इसने उद्धव और राज ठाकरे के बीच के मतभेदों को दूर कर दिया और उन्हें करीब ले आया. दोनों भाइयों ने 5 जुलाई को सरकार के इस फैसले के विरोध में एक बड़ी रैली का ऐलान किया था. 29 जून को फडणवीस सरकार ने हिंदी से जुड़े दोनों सरकारी प्रस्ताव वापस लेने का ऐलान कर दिया. इसके बावजूद ठाकरे बंधुओं की रैली का फैसला नहीं बदला और अब 5 जुलाई को दोनों वर्ली में 'मराठी विजय दिवस' के नाम से रैली करने जा रहे हैं. दोनों ठाकरे भाई एक मंच पर मराठी भाषा के मुद्दे पर विजय सभा करते हुए दिखाई देंगे. इस विषय पर एक सामूहिक विरोध है, खासकर हिंदी भाषा की शक्ति के खिलाफ.
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