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इलाज से ज्यादा चुनाव जरूरी? देखिये स्वस्थ लोकतंत्र के अस्वस्थ तंत्र की कहानी
क्या देश में इलाज से ज्यादा चुनाव जरूरी है? लोकतंत्र का पर्व माने जाने वाले चुनाव की रैलियों में न सोशल डिस्टैन्सिंग थी और न ही कोरोना से रोकथाम पर जोर. नतीजा यह है कि चुनाव के बाद इन राज्यों में कोरोना का ऐसा विस्फोट हुआ जो संभाले नहीं संभल रहा.
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