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Blood Moon: चंद्र ग्रहण का खगोलीय नज़ारा, ज्योतिष और विज्ञान के बड़े खुलासे!
भारत में इस साल का दूसरा और अंतिम पूर्ण चंद्र ग्रहण रात 9:58 बजे से 1:26 बजे तक लगभग साढ़े तीन घंटे चलेगा. वैज्ञानिकों के अनुसार, यह एक सामान्य खगोलीय घटना है जिसमें पृथ्वी सूर्य और चंद्रमा के बीच आ जाती है, जिससे चंद्रमा लाल रंग का दिखाई देता है, जिसे Blood Moon कहा जाता है. इसे खुली आँखों से देखा जा सकता है और इसमें अल्ट्रावॉयलेट किरणें नहीं निकलतीं. वैज्ञानिकों का कहना है कि इसका मानव और पर्यावरण पर कोई असर नहीं पड़ता. वहीं, ज्योतिष शास्त्रियों के अनुसार, पितृपक्ष में पड़ने वाला यह चंद्र ग्रहण 100 साल बाद पड़ रहा है और इसे शुभ नहीं माना जा रहा है. उन्होंने युद्ध, भूकंप, सुनामी, जमीन खिसकने, बाढ़ जैसी प्राकृतिक आपदाओं की आशंका जताई है. कुंभ राशि में शनि की साढ़े साती और राहु-मंगल योग के कारण मानसिक, भावनात्मक स्वास्थ्य, रिश्तों और महिलाओं के बड़े पदों पर असर पड़ने की संभावना बताई गई है. ग्रहण काल में मंत्र जाप और दान करने की सलाह दी गई है. चंद्र ग्रहण को लेकर विज्ञान और ज्योतिष के बीच मतभेद जारी हैं.
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