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राज की बात: नंदीग्राम सीट पर क्यों टिकी हैं BJP-TMC की निगाहें?
पश्चिम बंगाल का महासंग्राम दिन पर दिन भीषण होता जा रहा है. नेता जी सुभाषचंद्र बोस की जयंती के साथ ही पीएम मोदी के प्रवेश और ममता के सड़कों पर दिखे आवेग के बाद लड़ाई का अंदाज़ा लगाना मुश्किल नहीं. एक दूसरे को झटका देने में जुटे बीजेपी और तृणमूल के बीच सबसे भीषण महासमर का मैदान अब पूरी तरह सज चुका है. इसमें एक बात तो स्पष्ट हो गई है कि पश्चिम बंगाल का मुख्यमंत्री अब राज्य की सबसे चर्चित सीट नंदीग्राम से तय होगा. जब यह तय हो गया है तो बीजेपी ने भी अपने ट्रंपकार्ड यानी मोदी को उसी हिसाब से यहाँ खेलने का फ़ैसला कर लिया है.
लॉकडाउन के बाद जब शराब से रोक हटी तो चाहे दिल्ली हो या उत्तर प्रदेश.. कई राज्यों में शराबों की दुकानों पर लगी लंबी क़तारों ने सारे रिकार्ड तोड़ दिए. सब जानते हैं कि शराब सेहत के लिए हानिकारक है फिर भी ये बिकती है.. और सिर्फ बिकती ही नहीं है.. अकेली चीज ऐसी है कि जो बिना किसी विज्ञापन या प्रचार के भी हर साल पहले से ज्यादा बिकती है. वहीं सरकारें भी बोतल के पैकेट पर चाहे जो लिखा हो वे सभी शराब के ज़रिये आय बढ़ाने के रास्ते खोजती रहती हैं. राज की बात में आज शराब के अर्थशास्त्र की बात जो व्यक्ति या समाज की सेहत की चिंताओं पर भारी पड़ता है.
देश के तमाम अंचलों में बच्चों के खिलौने अलग-अलग तरीक़े और वस्तुओं से बनाए जाते हैं. उन्हें राष्ट्रीय और राज्य स्तर का प्लेटफ़ार्म मिलेगा. बाज़ार मिलेगा. साथ ही बच्चों को भी इसमें कैसे ज्यादा से ज्यादा शामिल किया जाए, इसके लिए स्कूलों और अभिभावकों को तैयार किया जाएगा. महाराणा प्रताप, शिवाजी, रानी लक्ष्मी बाई, अहिल्या बाई होल्कर से लेकर बिरसामुंडा जैसे पात्रों के बारे में राष्ट्रीय स्तर पर बच्चों के बीच भी प्रतियोगिता होगी और इससे ये खिलौने भी उनके जीवन का हिस्सा बनेंगे.
लॉकडाउन के बाद जब शराब से रोक हटी तो चाहे दिल्ली हो या उत्तर प्रदेश.. कई राज्यों में शराबों की दुकानों पर लगी लंबी क़तारों ने सारे रिकार्ड तोड़ दिए. सब जानते हैं कि शराब सेहत के लिए हानिकारक है फिर भी ये बिकती है.. और सिर्फ बिकती ही नहीं है.. अकेली चीज ऐसी है कि जो बिना किसी विज्ञापन या प्रचार के भी हर साल पहले से ज्यादा बिकती है. वहीं सरकारें भी बोतल के पैकेट पर चाहे जो लिखा हो वे सभी शराब के ज़रिये आय बढ़ाने के रास्ते खोजती रहती हैं. राज की बात में आज शराब के अर्थशास्त्र की बात जो व्यक्ति या समाज की सेहत की चिंताओं पर भारी पड़ता है.
देश के तमाम अंचलों में बच्चों के खिलौने अलग-अलग तरीक़े और वस्तुओं से बनाए जाते हैं. उन्हें राष्ट्रीय और राज्य स्तर का प्लेटफ़ार्म मिलेगा. बाज़ार मिलेगा. साथ ही बच्चों को भी इसमें कैसे ज्यादा से ज्यादा शामिल किया जाए, इसके लिए स्कूलों और अभिभावकों को तैयार किया जाएगा. महाराणा प्रताप, शिवाजी, रानी लक्ष्मी बाई, अहिल्या बाई होल्कर से लेकर बिरसामुंडा जैसे पात्रों के बारे में राष्ट्रीय स्तर पर बच्चों के बीच भी प्रतियोगिता होगी और इससे ये खिलौने भी उनके जीवन का हिस्सा बनेंगे.
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