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108 दानों की ही क्यों होती है माला? यहां जानिए मालाओं से जुड़ी अनजानी बातें
108 दानों की ही क्यों होती है माला?
सूर्य की कलाओं के हिसाब से माला में दाने होते हैं. सूर्य की 12 कलाएं और 9 मंडल हैं. कलाओं और मंडल को गुणा करने के बाद 108 नंबर आता है. हर नक्षत्र के 4 चरण हैं और 27 नक्षत्र हैं, इसके कारण चरणों की संख्या भी 108 है .ध्यान लगाकर माला का जाप करें.
किस माला से कौनसे देवता प्रसन्न होंगे?
रुद्राक्ष की माला शिव जी, हनुमान जी, मां काली और पूरे बीज मंत्रों के जाप के लिए उपयोग करें. माला को हाथ में पकड़कर महसूस करें. इससे सकारात्मक ऊर्जा मिलेगी. तुलसी की माला विष्णु जी, श्रीराम और कृष्ण जी की पूजा में उपयोग होती है. स्फटिक की माला शुक्र के मंत्र, साधना, लक्ष्मी पूजा, रुद्र अनुष्ठान के लिए प्रयोग करें.
सूर्य की कलाओं के हिसाब से माला में दाने होते हैं. सूर्य की 12 कलाएं और 9 मंडल हैं. कलाओं और मंडल को गुणा करने के बाद 108 नंबर आता है. हर नक्षत्र के 4 चरण हैं और 27 नक्षत्र हैं, इसके कारण चरणों की संख्या भी 108 है .ध्यान लगाकर माला का जाप करें.
किस माला से कौनसे देवता प्रसन्न होंगे?
रुद्राक्ष की माला शिव जी, हनुमान जी, मां काली और पूरे बीज मंत्रों के जाप के लिए उपयोग करें. माला को हाथ में पकड़कर महसूस करें. इससे सकारात्मक ऊर्जा मिलेगी. तुलसी की माला विष्णु जी, श्रीराम और कृष्ण जी की पूजा में उपयोग होती है. स्फटिक की माला शुक्र के मंत्र, साधना, लक्ष्मी पूजा, रुद्र अनुष्ठान के लिए प्रयोग करें.
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