मुसीबत में काम आई ये योजना, सरकार ने बांटे 10 करोड़ के क्लेम
Road Accident Insurance: PM-RAHAT योजना के तहत सड़क हादसे के घायलों को कैशलेस इलाज मिलता है. अब तक 62% क्लेम का भुगतान हुआ है. जानें योजना की स्थिति और किन राज्यों को सबसे ज्यादा लाभ मिला.

Road Accident Cashless Treatment: अगर सड़क हादसे में कोई व्यक्ति घायल हो जाए और इलाज के लिए तुरंत पैसे नहीं हों, तो ऐसे सिचुएशन में केंद्र सरकार की PM-RAHAT योजना मदद कर रही है. इस योजना के अनुसार रोड एक्सीडेंट में घायल को कैशलेस इलाज की सर्विस दी जाती है.लेकिन योजना शुरू होने के पांच महीने बाद भी सभी क्लेम का पेमेंट नहीं हो पाया है. सरकार ने लोकसभा में बताया कि अब तक करीब 10.1 करोड़ रुपये के क्लेम का पेमेंट दिया गया है.
62% क्लेम का ही हुआ पेमेंट
सड़क परिवहन मंत्री नितिन गडकरी ने लोकसभा में बताया कि PM-RAHAT योजना के अनुसार 28 जुलाई तक अस्पतालों द्वारा फाइल 12,727 क्लेम में से 9,601 को मंजूरी मिली, लेकिन अब तक सिर्फ 7,871 क्लेम का पेमेंट हो सका है. इसका मतलब है कि कुल क्लेम का लगभग 62% पेमेंट किया गया है. PM-RAHAT योजना के अनुसार मंजूर दावों में से ज्यादा का पेमेंट बाकी है.
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PM-RAHAT योजना को सड़क हादसों में घायल लोगों को समय पर इलाज दिलाने के लिए शुरू किया गया है. इस योजना की नोटिस मई 2025 में जारी हुई थी और 13 फरवरी 2026 को प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने इसे लॉन्च किया था.इसके हिसाब से नेशनल हाईवे पर एक्सीडेंट होने पर घायल इंसान का लिस्टेड अस्पताल में एक फिक्स लिमिट तक मुफ्त इलाज होता है. अस्पताल इस इलाज का पूरा खर्च सीधे सरकार से मांगता है, जिससे मरीज या उसके घरवालों को तुरंत पैसों का इंतजाम नहीं करना पड़ता.
इन राज्यों में सबसे ज्यादा मिला फायदा
योजना का सबसे ज्यादा इस्तेमाल गुजरात और मध्य प्रदेश में हुआ है. गुजरात में 4,308 क्लेम दर्ज हुए, जिनमें 3,355 का पेमेंट हो चुका है. वहीं मध्य प्रदेश में 3,850 क्लेम में से 2,597 का सेटलमेंट किया गया. असम, ओडिशा और छत्तीसगढ़ में भी अच्छी संख्या में क्लेम दर्ज हुए हैं.
कई बड़े राज्यों में इस योजना का फायदा अभी बहुत कम लोगों तक पहुंचा है. उत्तर प्रदेश में सड़क हादसों की संख्या ज्यादा होने के बावजूद सिर्फ 344 क्लेम दर्ज हुए और उनमें से सिर्फ 5 का पेमेंट हुआ है. राजस्थान में 144 क्लेम फाइल हुए, लेकिन 28 जुलाई तक एक भी क्लेम मंजूर नहीं हुआ था. तमिलनाडु, महाराष्ट्र, पश्चिम बंगाल, दिल्ली और पंजाब में भी योजना का इस्तेमाल काफी कम देखने को मिला है.
सरकार का कहना है कि योजना का दायरा ज्यादा करने के लिए नेशनल हाईवे के आसपास ज्यादा अस्पतालों को इसमें शामिल किया जा रहा है. साथ ही राज्यों और केंद्र शासित प्रदेशों को सड़क हादसे के घायलों को बिना देरी के इमरजेंसी इलाज कराने के लिए जरूरी कदम उठाने की सलाह दी गई है.
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