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WhatsApp Username Feature... सुनने में अच्छा लेकिन इसमें छिपा है बड़ा खतरा! प्राइवेसी बढ़ेगी या फर्जी अकाउंट?

WhatsApp Username Feature: अभी तक WhatsApp की पूरी व्यवस्था मोबाइल नंबर पर टिकी हुई है. किसी को मैसेज भेजना है तो उसका नंबर होना जरूरी है. लेकिन नए फीचर में यूजर अपने लिए एक यूनिक Username चुन सकेगा.

WhatsApp Username Feature: मोबाइल नंबर... आज WhatsApp पर आपकी सबसे बड़ी पहचान है. कोई नया व्यक्ति आपसे बात करना चाहता है तो उसे आपका नंबर चाहिए. लेकिन अब यह पूरी व्यवस्था बदलने वाली है. जल्द ही WhatsApp पर सिर्फ Username के जरिए भी लोगों से जुड़ा जा सकेगा. यानी मोबाइल नंबर सामने वाले को बताए बिना बातचीत शुरू हो सकेगी.

सुनने में यह फीचर काफी अच्छा लगता है. आखिर कौन नहीं चाहता कि उसका निजी मोबाइल नंबर हर किसी के पास न पहुंचे, लेकिन इसी फीचर ने भारत सरकार की चिंता भी बढ़ा दी है. सरकार को डर है कि कहीं यह सुविधा साइबर ठगों के लिए नया हथियार न बन जाए. यही वजह है कि इलेक्ट्रॉनिक्स और सूचना प्रौद्योगिकी मंत्रालय यानी MeitY ने Meta को नोटिस भेजा है और तीन दिन में जवाब मांगा है और फिलहाल भारत में इस फीचर को लॉन्च न करने के लिए कहा है. अब सवाल यही है कि क्या WhatsApp लोगों की प्राइवेसी बढ़ाने जा रहा है या फिर अनजाने में फर्जी पहचान और ऑनलाइन ठगी का नया रास्ता खोल रहा है?

पहले समझिए... आखिर Username फीचर है क्या?

अभी तक WhatsApp की पूरी व्यवस्था मोबाइल नंबर पर टिकी हुई है. किसी को मैसेज भेजना है तो उसका नंबर होना जरूरी है. लेकिन नए फीचर में यूजर अपने लिए एक यूनिक Username चुन सकेगा. इसके बाद सामने वाला आपका नंबर देखे बिना सिर्फ Username के जरिए आपसे बातचीत शुरू कर सकेगा. Meta का कहना है कि इसका मकसद लोगों की Privacy बढ़ाना है. खासकर उन लोगों के लिए जो बिजनेस करते हैं, ऑनलाइन सामान खरीदते-बेचते हैं, किसी कम्युनिटी का हिस्सा हैं या ऐसे लोगों से बात करते हैं जिन्हें वे अपना निजी मोबाइल नंबर नहीं देना चाहते. हालांकि, एक बात यहां साफ कर देना जरूरी है कि अभी सिर्फ Username रिजर्व करने की घोषणा हुई है. Username से चैट करने की सुविधा अभी लाइव नहीं हुई है. Meta के मुताबिक इसे इस साल चरणबद्ध तरीके से शुरू किया जाएगा.

सरकार को किस बात को लेकर चिंता है?

यहीं से पूरी कहानी शुरू होती है. सरकार की सबसे बड़ी चिंता सिर्फ एक शब्द है... 'Impersonation' यानी किसी दूसरे व्यक्ति, बैंक, सरकारी संस्था या कंपनी की तरह खुद को पेश करना. MeitY को डर है कि अगर लोग मोबाइल नंबर की बजाय सिर्फ Username देखकर भरोसा करने लगेंगे तो साइबर ठगों के लिए लोगों को धोखा देना पहले से आसान हो सकता है. सरकार के नोटिस में साफ लिखा गया है कि यह फीचर ऑनलाइन फ्रॉड, फिशिंग, डिजिटल अरेस्ट, पहचान छिपाकर ठगी और नकली अकाउंट के मामलों को बढ़ा सकता है. इसे एक आसान उदाहरण से समझिए...

मान लीजिए किसी बैंक का असली Username है...@SBIHelp. अब कोई ठग इससे मिलता-जुलता Username बना सकता है...@SBI_Help या फिर @SBIHelp_. पहली नजर में आम आदमी शायद फर्क ही न समझ पाए. अगर ऐसे अकाउंट से मैसेज आए कि..."आपका बैंक अकाउंट बंद होने वाला है...", "KYC अपडेट कीजिए..." या फिर "आपका UPI ब्लॉक हो जाएगा..." ऐसे में कई लोग उसे असली समझकर भरोसा कर सकते हैं. यही सबसे बड़ा खतरा है.

भारत में यह डर और बड़ा क्यों है?

भारत पहले से ही साइबर ठगी की बड़ी चुनौती का सामना कर रहा है. इसमें फर्जी कस्टमर केयर, डिजिटल अरेस्ट, निवेश के नाम पर ठगी, KYC अपडेट, बिजली बिल, कूरियर के नाम पर ठगी के कई मामले हैं. इन सभी मामलों में ठग सबसे पहले भरोसा जीतने की कोशिश करते हैं. अगर उन्हें किसी बैंक, सरकारी विभाग या अधिकारी जैसा दिखने वाला Username मिल गया तो लोगों को भ्रमित करना और आसान हो सकता है.

सरकारी आंकड़े भी बताते हैं कि पिछले कुछ वर्षों में साइबर फ्रॉड की शिकायतें तेजी से बढ़ी हैं और हजारों करोड़ रुपये की ठगी दर्ज की गई है. ऐसे में सरकार इस फीचर को सिर्फ एक तकनीकी बदलाव नहीं बल्कि कानून व्यवस्था और साइबर सुरक्षा के नजरिए से भी देख रही है.

सरकार ने नोटिस में क्या कहा?

MeitY ने Meta को भेजे नोटिस में कई अहम सवाल उठाए हैं. सरकार ने पूछा है कि अगर मोबाइल नंबर छिप जाएगा तो फर्जी पहचान कैसे रोकी जाएगी? अगर कोई व्यक्ति सरकारी विभाग, बैंक या किसी मशहूर व्यक्ति जैसा Username रख ले तो उसे कैसे रोका जाएगा? जरूरत पड़ने पर कानून प्रवर्तन एजेंसियां असली व्यक्ति तक कैसे पहुंचेंगी?

क्या यह फीचर IT Act 2000 और IT Rules 2021 का पालन करता है?

नोटिस में Meta को तीन दिन में जवाब देने के लिए कहा गया है. साथ ही यह भी कहा गया है कि जब तक सरकार इस मुद्दे पर संतुष्ट नहीं होती तब तक भारत में इस फीचर को रोलआउट न किया जाए. लेकिन क्या सरकार ने इस फीचर पर पूरी तरह रोक लगा दी है? नहीं. यह समझना बहुत जरूरी है. सरकार ने WhatsApp के Username फीचर पर स्थायी प्रतिबंध नहीं लगाया है. फिलहाल सरकार सुरक्षा पहलुओं की समीक्षा करना चाहती है. यानी मामला अभी बातचीत और जांच के चरण में है.

WhatsApp क्या कह रहा है?

Meta ने ABP News को बताया है कि Username फीचर अभी लाइव नहीं हुआ है. फिलहाल लोगों को सिर्फ अपना पसंदीदा Username रिजर्व करने का विकल्प दिया गया है. चैटिंग की सुविधा बाद में चरणबद्ध तरीके से शुरू होगी. Meta का दावा है कि उसने शुरुआत से ही Impersonation को ध्यान में रखकर कई सुरक्षा इंतजाम किए हैं. कंपनी के मुताबिक, सार्वजनिक हस्तियों, सरकारी संस्थाओं, मशहूर हस्तियों और Meta के वेरिफाइड अकाउंट्स के नाम पहले से सुरक्षित रखे गए हैं. उनसे मिलते-जुलते कई Lookalike Username भी रिजर्व किए जाएंगे ताकि कोई उनका गलत इस्तेमाल न कर सके.

WhatsApp ने यह भी साफ किया है कि मोबाइल नंबर पूरी तरह खत्म नहीं हो रहा. WhatsApp इस्तेमाल करने के लिए नंबर पहले की तरह जरूरी रहेगा. फर्क सिर्फ इतना होगा कि हर नए व्यक्ति को आपका नंबर दिखाई नहीं देगा. कंपनी का कहना है कि किसी को आपको मैसेज भेजने के लिए आपका Exact Username पता होना चाहिए.

बार-बार Username का अनुमान लगाने की कोशिशों को सिस्टम ब्लॉक करेगा. नए अकाउंट कितने लोगों से संपर्क कर सकते हैं उस पर भी सीमा होगी. साथ ही फर्जी पहचान और दुरुपयोग के पैटर्न पहचानकर उन्हें हटाने के लिए ऑटोमेटेड सिस्टम लगाए गए हैं. जब कोई पहली बार Username के जरिए आपको मैसेज करेगा तो WhatsApp यह भी बताएगा कि वह नया अकाउंट है या नहीं, आपके कॉन्टैक्ट में है या नहीं, कोई साझा ग्रुप है या नहीं और वह किस देश से मैसेज कर रहा है, ताकि जवाब देने का फैसला यूजर खुद कर सके.

क्या सिर्फ WhatsApp की सुरक्षा व्यवस्था काफी होगी?

यही इस पूरे विवाद का सबसे अहम सवाल है. साइबर एक्सपर्ट मानते हैं कि कोई भी तकनीकी सुरक्षा व्यवस्था सौ प्रतिशत सुरक्षित नहीं होती. हर नया फीचर अपने साथ नए खतरे भी लेकर आता है. इसलिए असली चुनौती फीचर लाने की नहीं बल्कि उसके दुरुपयोग को रोकने की है. अगर Meta के सुरक्षा उपाय प्रभावी साबित होते हैं तो Username फीचर लोगों की प्राइवेसी बढ़ा सकता है. लेकिन अगर फर्जी पहचान रोकने में थोड़ी भी कमी रह गई तो यही फीचर साइबर ठगों के लिए नया हथियार बन सकता है.

दूसरा पक्ष भी समझिए

कुछ डिजिटल अधिकार संगठनों का मानना है कि किसी फीचर का गलत इस्तेमाल होने की आशंका भर से उसे रोक देना सही तरीका नहीं है. उनका कहना है कि असली कार्रवाई अपराधियों के खिलाफ होनी चाहिए न कि नई तकनीक पर. वहीं सरकार का तर्क है कि करोड़ों भारतीयों की सुरक्षा को देखते हुए पहले जोखिम समझना जरूरी है. अब सबकी नजर Meta के जवाब पर होगी. क्योंकि आने वाले दिनों में यही तय करेगा कि भारत में WhatsApp का Username फीचर किस रूप में और किन सुरक्षा शर्तों के साथ लॉन्च होगा.

यह भी पढ़ें: WhatsApp Usernames फीचर को लेकर क्या चिंताएं, जिनके कारण सरकार को भेजना पड़ा नोटिस? जानें

About the author वरुण भसीन

वरुण भसीन एबीपी न्यूज़ में प्रिंसिपल कॉरेस्पॉन्डेंट हैं. पिछले 9 साल से पत्रकारिता कर रहे हैं. वे एयरलाइंस, रेलवे और सड़क-परिवहन से जुड़ी खबरें कवर करते हैं. इससे पहले वे कई संस्थानों में काम कर चुके हैं. वरुण न्यूज जगत से जुड़ी डॉक्यूमेंट्री फिल्में भी बनाते आए हैं. वरुण ने MBM यूनिविर्सिटी जोधपुर से पढ़ाई की है. संपर्क करने के लिए मेल आईडी है- varunb@abpnetwork.com

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