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क्या होता है टू-फैक्टर ऑथेंटिकेशन (2FA)? जानिए क्यों सरकार इस नई टेक्नोलॉजी पर दे रही जोर

What is Two-Factor Authentication (2FA): आजकल साइबर हमले पहले से ज्यादा स्मार्ट और खतरनाक हो गए हैं. ऐसे में 2FA एक मजबूत सुरक्षा कवच की तरह काम करता है.

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  • टू-फैक्टर ऑथेंटिकेशन (2FA) सुरक्षा की दो परतें जोड़ता है, पासवर्ड के बाद अतिरिक्त वेरिफिकेशन मांगता है।
  • यह तकनीक फिशिंग और साइबर हमलों से खातों को सुरक्षित रखने में अत्यधिक प्रभावी है।
  • 2FA सक्रिय करने के लिए लॉगिन के समय पासवर्ड के साथ एक वन-टाइम कोड दर्ज करना होता है।
  • डिजिटल धोखाधड़ी रोकने के लिए सरकार और RBI 2FA अपनाने पर जोर दे रहे हैं।

What is Two-Factor Authentication (2FA): डिजिटल दुनिया में बढ़ते साइबर खतरों के बीच सिर्फ पासवर्ड के भरोसे अकाउंट सुरक्षित रखना अब काफी नहीं रह गया है. इसी समस्या का समाधान है टू-फैक्टर ऑथेंटिकेशन जिसे 2FA भी कहा जाता है. यह एक ऐसा सुरक्षा तरीका है जिसमें किसी ऐप या वेबसाइट में लॉगिन करने के लिए यूजर से दो अलग-अलग तरह की पहचान मांगी जाती है. यानी सिर्फ यूजरनेम और पासवर्ड डालने के बाद भी आपको एक और स्टेप पूरा करना होता है. यह तकनीक इस बात की पुष्टि करती है कि अकाउंट एक्सेस करने वाला व्यक्ति वही है जो होने का दावा कर रहा है. इससे हैकर्स के लिए किसी का अकाउंट तोड़ना काफी मुश्किल हो जाता है.

2FA क्यों है इतना जरूरी?

आजकल साइबर हमले पहले से ज्यादा स्मार्ट और खतरनाक हो गए हैं. ऐसे में 2FA एक मजबूत सुरक्षा कवच की तरह काम करता है. यह सिस्टम पासवर्ड पर निर्भरता को कम करता है और अकाउंट को अतिरिक्त सुरक्षा देता है. अगर किसी हैकर के पास आपका पासवर्ड भी पहुंच जाए तब भी वह आपके अकाउंट में आसानी से घुस नहीं सकता क्योंकि उसे दूसरा वेरिफिकेशन स्टेप भी पूरा करना होगा. खासकर फिशिंग जैसे हमलों को रोकने में यह तकनीक काफी मददगार साबित होती है.

टू-फैक्टर ऑथेंटिकेशन कैसे काम करता है?

जब कोई यूजर किसी वेबसाइट या ऐप में लॉगिन करने की कोशिश करता है तो सबसे पहले वह अपनी सामान्य जानकारी जैसे यूजरनेम और पासवर्ड डालता है. इसके बाद सिस्टम यह जांचता है कि दी गई जानकारी सही है या नहीं. जैसे ही पहला स्टेप पूरा होता है यूजर से दूसरी पहचान मांगी जाती है.

यह आमतौर पर एक वन-टाइम पासकोड (OTP) होता है जो उसके मोबाइल फोन पर भेजा जाता है. कुछ मामलों में यह कोड किसी ऑथेंटिकेटर ऐप या सिक्योरिटी डिवाइस के जरिए भी मिल सकता है. जब यूजर इस कोड को सही तरीके से दर्ज करता है तब जाकर उसे अकाउंट एक्सेस की अनुमति मिलती है. इस तरह दो अलग-अलग स्तर की जांच पूरी होने के बाद ही लॉगिन सफल होता है.

2FA को कैसे चालू करें?

हर वेबसाइट या ऐप में यह सुविधा उपलब्ध नहीं होती लेकिन जहां भी यह विकल्प मिले, उसे जरूर सक्रिय करना चाहिए. आमतौर पर इसे ऑन करने का तरीका काफी आसान होता है. उदाहरण के तौर पर LinkedIn जैसे प्लेटफॉर्म पर आप सेटिंग्स में जाकर साइन-इन और सिक्योरिटी सेक्शन में इसे चालू कर सकते हैं. अलग-अलग प्लेटफॉर्म पर इसके स्टेप थोड़े बदल सकते हैं लेकिन प्रोसेस लगभग एक जैसी ही रहती है.

सरकार क्यों दे रही है इस तकनीक पर जोर?

भारत में तेजी से बढ़ते डिजिटल फ्रॉड के मामलों को देखते हुए सरकार और नियामक संस्थाएं अब सुरक्षा को और मजबूत करने पर ध्यान दे रही हैं. Reserve Bank of India और अन्य एजेंसियां लगातार यूजर्स को 2FA अपनाने की सलाह दे रही हैं. इसका मुख्य कारण यह है कि सिर्फ पासवर्ड आधारित सुरक्षा अब कमजोर साबित हो रही है. हैकर्स फिशिंग, डेटा चोरी और अन्य तरीकों से पासवर्ड हासिल कर लेते हैं. लेकिन 2FA होने पर उनके लिए अकाउंट तक पहुंच बनाना बेहद मुश्किल हो जाता है. सरकार चाहती है कि बैंकिंग, डिजिटल पेमेंट और अन्य जरूरी सेवाओं में इस तकनीक का ज्यादा से ज्यादा इस्तेमाल हो ताकि आम लोगों का पैसा और डेटा सुरक्षित रह सके.

2FA के क्या फायदे हैं?

यह तकनीक यूजर्स को अतिरिक्त सुरक्षा प्रदान करती है और अकाउंट हैक होने की संभावना को काफी हद तक कम कर देती है. अगर किसी का पासवर्ड लीक भी हो जाए तब भी बिना दूसरे वेरिफिकेशन के लॉगिन संभव नहीं होता. इसके अलावा, यह फिशिंग और ऑनलाइन ठगी जैसे खतरों से बचाव में भी मददगार है. यही वजह है कि आजकल ज्यादातर बैंकिंग ऐप्स और सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म इस फीचर को जरूरी बना रहे हैं.

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