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क्या होता है DDoS अटैक? जानिए कैसे चीन ने साइबर हमलों से उड़ाई ताइवान की नींद

What is DDoS Attack: आज की दुनिया में जंग सिर्फ बंदूक और मिसाइलों से नहीं लड़ी जाती बल्कि कीबोर्ड और सर्वर से भी देशों को हिलाया जा सकता है.

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What is DDoS Attack: आज की दुनिया में जंग सिर्फ बंदूक और मिसाइलों से नहीं लड़ी जाती बल्कि कीबोर्ड और सर्वर से भी देशों को हिलाया जा सकता है. साइबर वॉरफेयर इसी का उदाहरण है और इसमें सबसे खतरनाक तरीकों में से एक है DDoS अटैक. हाल के वर्षों में चीन और ताइवान के बीच बढ़े तनाव के दौरान साइबर हमलों की खबरें सामने आईं जिनमें DDoS अटैक ने ताइवान की डिजिटल व्यवस्था को बुरी तरह प्रभावित किया. लेकिन आखिर DDoS अटैक होता क्या है और यह इतना खतरनाक क्यों माना जाता है?

DDoS अटैक क्या होता है?

DDoS का पूरा नाम है Distributed Denial of Service. आसान शब्दों में समझें तो यह ऐसा साइबर हमला होता है जिसमें किसी वेबसाइट, सर्वर या ऑनलाइन सिस्टम पर एक साथ इतनी ज्यादा रिक्वेस्ट भेज दी जाती हैं कि वह सिस्टम काम करना बंद कर देता है.

मान लीजिए किसी दुकान में एक समय में 10 लोग आराम से खरीदारी कर सकते हैं. अब अगर अचानक हजारों लोग एक साथ अंदर घुसने की कोशिश करें तो दुकान का सिस्टम ठप हो जाएगा. DDoS अटैक ठीक इसी तरह काम करता है बस फर्क इतना है कि यहां “लोग” नहीं बल्कि कंप्यूटर और बॉट्स होते हैं.

Distributed क्यों कहा जाता है DDoS?

DDoS में हमला एक जगह से नहीं, बल्कि दुनिया के अलग-अलग हिस्सों में मौजूद हजारों या लाखों संक्रमित डिवाइसेज़ से किया जाता है. इन्हें बॉटनेट कहा जाता है. हैकर्स पहले आम लोगों के कंप्यूटर, मोबाइल, CCTV कैमरे या IoT डिवाइसेज़ को मैलवेयर से संक्रमित करते हैं. बाद में इन्हीं डिवाइसेज़ को एक साथ कंट्रोल करके किसी एक टारगेट पर हमला किया जाता है. यही वजह है कि DDoS अटैक को रोकना बेहद मुश्किल हो जाता है क्योंकि ट्रैफिक एक देश या एक IP से नहीं, बल्कि पूरी दुनिया से आ रहा होता है.

DDoS अटैक का मकसद क्या होता है?

DDoS अटैक का उद्देश्य डेटा चोरी करना नहीं, बल्कि सेवा को बाधित करना होता है. इसका इस्तेमाल कई कारणों से किया जाता है:

  • सरकारी वेबसाइट्स को डाउन करने के लिए
  • बैंकिंग और फाइनेंशियल सिस्टम को बाधित करने के लिए
  • मीडिया या न्यूज पोर्टल्स की आवाज दबाने के लिए
  • किसी देश में डर और अव्यवस्था फैलाने के लिए

यानी यह हमला नुकसान से ज्यादा मानसिक दबाव और अस्थिरता पैदा करने के लिए किया जाता है.

चीन-ताइवान तनाव और साइबर अटैक का एंगल

चीन और ताइवान के बीच राजनीतिक और सैन्य तनाव कोई नई बात नहीं है. लेकिन बीते कुछ सालों में यह टकराव डिजिटल दुनिया में भी देखने को मिला है. जब भी ताइवान में कोई बड़ा राजनीतिक घटनाक्रम होता है या चीन विरोधी बयान सामने आते हैं, ताइवान की सरकारी वेबसाइट्स और महत्वपूर्ण संस्थानों पर अचानक साइबर हमलों की संख्या बढ़ जाती है. इन हमलों में DDoS अटैक सबसे ज्यादा इस्तेमाल किया गया तरीका माना जाता है क्योंकि इससे बिना गोली चलाए ही देश की डिजिटल रीढ़ को हिलाया जा सकता है.

ताइवान पर DDoS अटैक का असर

ताइवान पर हुए DDoS हमलों के दौरान कई अहम वेबसाइट्स अस्थायी रूप से बंद हो गईं. इनमें सरकारी पोर्टल, ट्रांसपोर्ट सिस्टम, एयरपोर्ट डिस्प्ले और कुछ फाइनेंशियल प्लेटफॉर्म शामिल थे. हालांकि ये हमले स्थायी नुकसान नहीं पहुंचा पाए, लेकिन कुछ घंटों तक सिस्टम ठप रहने से आम लोगों में भ्रम और घबराहट जरूर फैल गई. यही DDoS अटैक की सबसे बड़ी ताकत है यह सीधे नुकसान कम करता है लेकिन असर बहुत बड़ा छोड़ जाता है.

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