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अगर फेस रिकॉग्निशन डेटा चोरी हो जाए तो क्या होगा, जानें कितनी बड़ी मुश्किल में पड़ जाएंगे आप?

कई बार लोग किसी दुकान में एंटर होते ही कैमरे उनके चेहरे को स्कैन कर लेते हैं, चाहे उन्हें इसका एहसास हो या नहीं. यह तकनीक सुरक्षा और सुविधा के लिए उपयोगी मानी जाती है.

आज के समय में फेस रिकॉग्निशन तकनीक तेजी से हमारी रोजाना की जिंदगी का अहम हिस्सा बनती जा रही है. एयरपोर्ट से लेकर बैंक, ऑफिस, स्टेडियम और बड़े रिटेल स्टोर तक हर जगह चेहरे की पहचान करने वाले सिस्टम का इस्तेमाल बढ़ रहा है. कई बार लोग किसी दुकान में एंटर होते ही कैमरे उनके चेहरे को स्कैन कर लेते हैं, चाहे उन्हें इसका एहसास हो या नहीं. यह तकनीक सुरक्षा और सुविधा के लिए उपयोगी मानी जाती है. लेकिन इसके साथ एक बड़ा खतरा भी जुड़ा हुआ है. अगर किसी व्यक्ति का फेस रिकॉग्निशन डेटा चोरी हो जाए तो उससे जुड़ी परेशानी जिंदगी भर पीछा नहीं छोड़ सकती है.

दरअसल फेस रिकॉग्निशन सिस्टम सीधे आप की फोटो स्टोर नहीं करते यह चेहरे की बनावट, आंखों की दूरी, नाक और चेहरे के अनुपात जैसी चीजों को एक डिजिटल मैथमेटिकल टेम्पलेट में बदल देते हैं. बाद में जब कोई कैमरा दौबारा चेहरा स्कैन करता है तो सिस्टम उसे पुराने टेंपलेट से मिलाकर पहचान की पुष्टि करता है. समस्या तब शुरू होती है जब यही बायोमैट्रिक डेटा गलत हाथों में पहुंच जाए. ऐसे में चलिए अब आपको बताते हैं कि अगर आपका फेस रिकॉग्निशन डेटा चोरी हो जाए तो क्या होगा और इससे आप कितनी बड़ी मुश्किल में फंस सकते हैं. 

पासवर्ड बदला जा सकता है चेहरा नहीं 

अगर किसी का पासवर्ड चोरी हो जाए तो वह नया पासवर्ड बना सकता है. बैंक कार्ड हैक हो जाए तो कार्ड ब्लॉक कर नया कार्ड लिया जा सकता है. लेकिन चेहरा बदला नहीं जा सकता, यही वजह है कि फेस डेटा की चोरी को साइबर सुरक्षा एक्सपर्ट बहुत गंभीर खतरा मानते हैं. एक बार फेस टेम्पलेट लीक हो जाए तो उसे हमेशा के लिए इस्तेमाल किया जा सकता है. एक्सपर्ट्स के अनुसार फेस रिकॉग्निशन डेटाबेस हैक होने के बाद अपराधी उस डेटा का इस्तेमाल किसी व्यक्ति की पहचान ट्रैक करने या उसे नकली डिजिटल पहचान में बदलने के लिए कर सकते हैं. यही कारण है कि फेस डेटा को सबसे संवेदनशील बायोमेट्रिक जानकारी माना जा रहा है. 

फेस रिकॉग्निशन से कैसे ट्रैक किए जा सकते हैं लोग?

फिंगरप्रिंट या आईरिस स्कैन आमतौर पर नियंत्रित माहौल में इस्तेमाल होते हैं, जहां व्यक्ति खुद स्कैनर के सामने जाता है. लेकिन फेस रिकॉग्निशन कैमरे दूर से भी किसी का चेहरा रिकॉर्ड कर सकते हैं. कई सार्वजनिक जगहों पर लगे कैमरे लोगों की एक्टिविटी को लगातार ट्रैक करते रहते हैं और अलग-अलग डेटाबेस से जोड़कर उनके डिजिटल रिकॉर्ड तैयार करते रहते हैं. एयरपोर्ट किसी यात्री के चेहरे को पासपोर्ट डेटाबेस से मैच कर सकते हैं. स्टेडियम सिक्योरिटी वॉचलिस्ट से तुलना कर सकते हैं. वहीं कुछ रिटेल कंपनियां चोरी रोकने के लिए फेस रिकॉग्निशन का इस्तेमाल करती है. हर नया स्कैन एक और स्थायी डिजिटल रिकॉर्ड बन जाता है. 

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एआई और डीप फेक से बढ़ सकता है खतरा 

साइबर अपराधी अगर फेस टेम्पलेट को दूसरी लीक हुई जानकारी जैसे ईमेल, मोबाइल नंबर या सोशल मीडिया अकाउंट से जोड़ दे तो किसी व्यक्ति का पूरा डिजिटल प्रोफाइल तैयार किया जा सकता है. इसके बाद एआई और डीपफेक तकनीक की मदद से नकली वीडियो या 3D फेस मॉडल बनाकर किसी की पहचान की नकल की जा सकती है. कुछ मामलों में अपराधी फेस डाटा का इस्तेमाल उन सिस्टम को धोखा देने के लिए भी कर सकते हैं जो लाइव फेस वेरिफिकेशन मांगते हैं. इससे बैंकिंग, डिजिटल पेमेंट और सिक्योरिटी सिस्टम तक खतरे में पड़ सकते हैं. वहीं कई कंपनियों के पास मजबूत साइबर सुरक्षा व्यवस्था नहीं होती, वह डेटा मैनेजमेंट के लिए थर्ड पार्टी कंपनियों पर निर्भर रहते हैं. अगर ऐसे सिस्टम हैक हो जाए या अलग-अलग प्लेटफार्म के डेटा आपस में जुड़ जाए तो फेस डेटा एक स्थायी डिजिटल पहचान बन सकता है, जिसका गलत इस्तेमाल लंबे समय तक किया जा सकता है.

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कविता गाडरी बीते कुछ साल से डिजिटल मीडिया और पत्रकारिता की दुनिया से जुड़ी हुई है. राजस्थान के जयपुर से ताल्लुक रखने वाली कविता ने अपनी पढ़ाई माखनलाल चतुर्वेदी राष्ट्रीय पत्रकारिता एवं जनसंचार विश्वविद्यालय भोपाल से न्यू मीडिया टेक्नोलॉजी में मास्टर्स और अपेक्स यूनिवर्सिटी जयपुर से बैचलर ऑफ जर्नलिज्म एंड मास कम्युनिकेशन में की है. 
पत्रकारिता में अपना सफर उन्होंने राजस्थान पत्रिका से शुरू किया जहां उन्होंने नेशनल एडिशन और सप्लीमेंट्स जैसे करियर की उड़ान और शी न्यूज के लिए बाय लाइन स्टोरी लिखी. इसी दौरान उन्हें हेलो डॉक्टर शो पर काम करने का मौका मिला. जिसने उन्हें न्यूज़ प्रोडक्शन के लिए नए अनुभव दिए. 

इसके बाद उन्होंने एबीपी नेटवर्क नोएडा का रुख किया. यहां बतौर कंटेंट राइटर उन्होंने लाइफस्टाइल, करंट अफेयर्स और ट्रेडिंग विषयों पर स्टोरीज लिखी. साथ ही वह कंटेंट मैनेजमेंट सिस्टम और सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म्स पर भी लगातार सक्रिय रही. कविता गाडरी हिंदी और अंग्रेजी दोनों भाषाओं में दक्ष हैं. न्यूज़ राइटिंग रिसर्च बेस्ड स्टोरीटेलिंग और मल्टीमीडिया कंटेंट क्रिएशन उनकी खासियत है. वर्तमान में वह एबीपी लाइव से जुड़ी है जहां विभिन्न विषयों पर ऐसी स्‍टोरीज लिखती है जो पाठकों को नई जानकारी देती है और उनके रोजमर्रा के जीवन से सीधे जुड़ती है.

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