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अभी नहीं खरीदा तो पछताएंगे! 2026 में फोन-PC होंगे और महंगे, वजह जानकर हो जाएंगे हैरान

Smartphones and PC: अगर आप 2026 में नया स्मार्टफोन, लैपटॉप या PC खरीदने का प्लान बना रहे हैं तो जेब पर अतिरिक्त बोझ के लिए तैयार रहना पड़ सकता है.

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  • RAM की महंगाई 2026-2027 तक जारी रहने का अनुमान है।

Smartphones and PC: अगर आप 2026 में नया स्मार्टफोन, लैपटॉप या PC खरीदने का प्लान बना रहे हैं तो जेब पर अतिरिक्त बोझ के लिए तैयार रहना पड़ सकता है. वजह है एक ऐसा कंपोनेंट जिसके बारे में हम अक्सर सोचते भी नहीं RAM. कभी सबसे सस्ती मानी जाने वाली RAM की कीमतें अब तेजी से बढ़ रही हैं और इसका असर लगभग हर डिजिटल डिवाइस पर पड़ने वाला है.

RAM की कीमतों में अचानक उछाल क्यों आया?

अक्टूबर 2025 के बाद से RAM की कीमतें दोगुनी से भी ज्यादा हो चुकी हैं. कई मामलों में तो कंपनियों को पहले की तुलना में 4 से 5 गुना तक ज्यादा दाम बताए जा रहे हैं. यह उछाल किसी एक कारण से नहीं, बल्कि कई फैक्टर्स के मेल से हुआ है. सबसे बड़ा कारण है AI टेक्नोलॉजी का तेज़ी से फैलना.

AI और डेटा सेंटर्स ने बिगाड़ा संतुलन

आज AI को चलाने के लिए बड़े-बड़े डेटा सेंटर्स बनाए जा रहे हैं. ये डेटा सेंटर्स हाई-परफॉर्मेंस सर्वर और खास तरह की मेमोरी पर निर्भर होते हैं जिसमें RAM की खपत बहुत ज्यादा होती है. जैसे-जैसे AI का इस्तेमाल बढ़ा, वैसे-वैसे RAM की मांग भी आसमान छूने लगी.

लेकिन दिक्कत यह है कि RAM की सप्लाई उतनी तेजी से नहीं बढ़ पाई. नतीजा यह हुआ कि मांग और सप्लाई के बीच बड़ा अंतर पैदा हो गया, और कीमतें लगातार ऊपर जाने लगीं.

छोटे नहीं, बड़े हैं ये खर्चे

BBC की रिपोर्ट के अनुसार, अक्सर टेक कंपनियां छोटे-मोटे खर्च खुद ही झेल लेती हैं ताकि ग्राहकों पर असर न पड़े. लेकिन जब लागत में बढ़ोतरी बहुत ज्यादा हो जाए तो उसका बोझ आखिरकार कस्टमर तक पहुंचता ही है. कंप्यूटर बनाने वाली कई कंपनियों का कहना है कि मौजूदा हालात में कीमतें न बढ़ाना लगभग नामुमकिन हो जाएगा.

एक PC निर्माता के मुताबिक, उन्हें कुछ RAM कंपोनेंट्स के लिए हाल ही में 500% तक ज्यादा कीमतें कोट की गई हैं. ऐसे में कंपनियों के सामने या तो प्रॉफिट कम करने का विकल्प है या फिर प्रोडक्ट्स महंगे करने का.

हर डिवाइस पर पड़ेगा असर

RAM कोई सीमित चीज नहीं है. स्मार्टफोन, लैपटॉप, डेस्कटॉप, स्मार्ट टीवी, मेडिकल डिवाइस लगभग हर इलेक्ट्रॉनिक डिवाइस में इसका इस्तेमाल होता है. यही वजह है कि अगर मेमोरी महंगी होती है तो उसका असर पूरे टेक मार्केट पर दिखेगा.

कुछ कंपनियों के पास पहले से स्टॉक मौजूद है इसलिए वहां कीमतों में बढ़ोतरी थोड़ी कम दिख सकती है. लेकिन जिन निर्माताओं के पास इन्वेंट्री कम है, वे सीधे 4 से 5 गुना तक कीमतें बढ़ा चुके हैं.

2026 तक जारी रह सकती है महंगाई

टेक इंडस्ट्री के जानकारों का मानना है कि RAM की कीमतों में यह तेजी 2026 तक बनी रह सकती है, बल्कि 2027 तक भी हालात चुनौतीपूर्ण रहेंगे. AI के लिए इस्तेमाल होने वाली हाई-एंड मेमोरी ने पूरे मार्केट को प्रभावित किया है जिससे आम यूजर्स के लिए इस्तेमाल होने वाली RAM भी महंगी हो गई है.

क्लाउड सर्विस देने वाली बड़ी कंपनियां पहले ही 2026 और 2027 की जरूरतों का अंदाजा लगा चुकी हैं. इससे RAM बनाने वाली कंपनियों को साफ संकेत मिल गया है कि मांग बहुत ज्यादा रहने वाली है, जबकि सप्लाई सीमित है.

कंपनियां क्यों नहीं झेल पा रहीं लागत?

एक आम लैपटॉप में RAM कुल लागत का करीब 15 से 20 प्रतिशत हिस्सा होती थी. लेकिन मौजूदा कीमतों के चलते यह हिस्सा 30 से 40 प्रतिशत तक पहुंच गया है. कंज्यूमर इलेक्ट्रॉनिक्स में मुनाफा पहले से ही सीमित होता है, ऐसे में इतनी बड़ी लागत को कंपनियां खुद नहीं उठा सकतीं. कुछ सप्लायर्स ने तो कीमतों को लेकर कोटेशन देना ही बंद कर दिया है जो इस बात का संकेत है कि उन्हें आगे और महंगाई की पूरी उम्मीद है.

स्मार्टफोन और लैपटॉप कितने महंगे हो सकते हैं?

एक सामान्य लैपटॉप जिसमें 16GB RAM होती है उसकी मैन्युफैक्चरिंग कॉस्ट 2026 में 40 से 50 डॉलर तक बढ़ सकती है. स्मार्टफोन की बात करें तो एक फोन की लागत में करीब 30 डॉलर का इजाफा हो सकता है. यह बढ़ोतरी सीधे तौर पर कस्टमर से ही वसूली जाएगी.

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