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कैसे बढ़ाई जाती है 5G टावर की क्षमता, कितना पैसा होता है खर्च?

5G टावर की क्षमता बढ़ाने के लिए कई टेक्नोलॉजी का इस्तेमाल किया जाता है. ऐसे में आज हम आपको बताने जा रहे हैं कि टावर अपग्रेड कैसे होता है और इसकी क्षमता बढ़ाने में कितना खर्च आता है.

आज के समय में 5G नेटवर्क तेजी से फैल रहा है. लेकिन किसी इलाके में 5G की शुरुआत कर देना ही काफी नहीं होता. जैसे-जैसे यूजर्स की संख्या बढ़ती है और इंटरनेट पर डेटा की खपत बढ़ती है, वैसे-वैसे मोबाइल नेटवर्क की क्षमता बढ़ाने की जरूरत पड़ती है. इसके लिए टेलीकॉम कंपनियां टावर और नेटवर्क इंफ्रास्ट्रक्चर में कई तरह के अपग्रेड करती हैं.

5G टावर की क्षमता बढ़ाने की जरूरत क्यों पड़ती है?

एक मोबाइल टावर की क्षमता अनलिमिटेड नहीं होती है. किसी इलाके में कम यूजर्स होने पर मौजूदा नेटवर्क आसानी से काम कर सकता है लेकिन यूजर्स बढ़ने के साथ टावर पर डेटा ट्रैफिक भी बढ़ जाता है.

खासकर वीडियो स्ट्रीमिंग, ऑनलाइन गेमिंग, वीडियो कॉल और 5G पर बड़ी फाइल डाउनलोड करने से नेटवर्क पर लोड बढ़ता है. इसका असर इंटरनेट स्पीड और नेटवर्क की स्थिरता पर दिखाई दे सकता है. ऐसे में ऑपरेटर को मौजूदा साइट की क्षमता बढ़ानी पड़ती है.

ज्यादा स्पेक्ट्रम से बढ़ती है क्षमता

5G नेटवर्क की क्षमता बढ़ाने का एक आसान तरीका एक्सट्रा स्पेक्ट्रम का इस्तेमाल है. टेलीकॉम कंपनियों के पास अलग-अलग बैंड में स्पेक्ट्रम होता है. किसी इलाके में ज्यादा ट्रैफिक होने पर उपलब्ध स्पेक्ट्रम को बेहतर तरीके से इस्तेमाल किया जा सकता है.

कई मामलों में ऑपरेटर अलग-अलग 5G बैंड को एक साथ इस्तेमाल करके ज्यादा क्षमता हासिल करते हैं. इसे स्पेक्ट्रम एग्रीगेशन जैसी टेक्नोलॉजी के जरिए किया जाता है.

टावर पर नए डिवाइस लगाए जाते हैं

क्षमता बढ़ाने के लिए केवल टावर की ऊंचाई बढ़ाना जरूरी नहीं होता है. कई बार मौजूदा साइट पर नए रेडियो यूनिट, एंटीना या अन्य नेटवर्क डिवाइस लगाए जाते हैं.

एडवांस 5G नेटवर्क में Massive MIMO जैसे सिस्टम का इस्तेमाल भी किया जाता है. इसमें कई एंटीना एलिमेंट एक साथ काम करते हैं जिससे एक ही साइट से ज्यादा यूजर्स को बेहतर तरीके से सर्व किया जाता है.

बैकहॉल भी होना चाहिए मजबूत

आपकी जानकारी के लिए बता दें कि टावर की क्षमता बढ़ाने के बाद उसका बैकहॉल कमजोर हो तो कोई फायदा नहीं होता है. बैकहॉल वह कनेक्शन है जो मोबाइल साइट को ऑपरेटर के मेन नेटवर्क तक कनेक्ट करता है.

इसके लिए फाइबर ऑप्टिक कनेक्शन का इस्तेमाल किया जाता है. ज्यादा ट्रैफिक वाले टावर पर फाइबर लिंक की क्षमता बढ़ाई जा सकती है ताकि टावर से आने-जाने वाला बड़ा डेटा ट्रैफिक आसानी से संभाला जा सके.

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जरूरत पड़ने पर छोटे सेल लगाए जाते हैं

अगर किसी इलाके में एक टावर पर लगातार बहुत ज्यादा ट्रैफिक रहता है तो वहां एक्सट्रा Small Cells लगाए जाते हैं. ये छोटे नेटवर्क स्टेशन कम दूरी के क्षेत्र में नेटवर्क क्षमता बढ़ाते हैं.

शॉपिंग मॉल, स्टेडियम, बाजार, एयरपोर्ट और घनी आबादी वाले इलाकों में इस तरह का नेटवर्क ज्यादा काम आते हैं. इससे मेन टावर पर दबाव कम होता है.

कितना पैसा होता है खर्च?

आपको बता दें कि 5G नेटवर्क की क्षमता बढ़ाने का खर्च किसी एक तय रकम में नहीं बताया जा सकता. ये इस बात पर निर्भर करता है कि ऑपरेटर को केवल सॉफ्टवेयर अपग्रेड करना है या नए रेडियो, एंटीना, फाइबर और दूसरे डिवाइस लगाने हैं.

एक नॉर्मल साइट पर मामूली अपग्रेड का खर्च कम होता है जबकि नए रेडियो डिवाइस, Massive MIMO सिस्टम, पावर सिस्टम और फाइबर बैकहॉल लगाने पर लागत लाखों रुपये तक पहुंच सकती है. नई साइट बनाने पर खर्च और बढ़ जाता है. इसके अलावा साइट का किराया, बिजली, मेंटेनेंस, परमिट और बैकहॉल जैसे लगातार होने वाले खर्च भी शामिल होते हैं.

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स्मार्टफोन, गैजेट्स, आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस, साइबर सिक्योरिटी और इंटरनेट टेक्नोलॉजी की दुनिया में मेरा इंटरेस्ट काफी ज्यादा है. मैं यानी हिमांशु तिवारी, ABP LIVE में टेक और डिजिटल सेक्शन का हिस्सा हूं. मैं नई टेक्नोलॉजी को आसान और दिलचस्प अंदाज में पाठकों तक पहुंचाने का काम करता हूं. स्मार्टफोन लॉन्च, वायरल टेक ट्रेंड्स, AI अपडेट्स, सोशल मीडिया फीचर्स और साइबर फ्रॉड जैसे विषयों पर मेरी पकड़ मजबूत है.

टेक्नोलॉजी से जुड़ी खबरों को सिर्फ जानकारी तक सीमित नहीं रखता, बल्कि उन्हें आम लोगों की जरूरत और रोजमर्रा की जिंदगी से जोड़कर पेश करता हूं. खासतौर पर ऐसी खबरों पर काम करना पसंद करता हूं, जो लोगों के डिजिटल एक्सपीरियंस को सीधे प्रभावित करती हैं.

इसके अलावा मुझे नई टेक्नोलॉजी एक्सप्लोर करना, स्मार्टफोन फीचर्स को समझना और डिजिटल ट्रेंड्स पर रिसर्च करना पसंद है. मैं आसान भाषा और आकर्षक अंदाज में लिखने के लिए जाना जाता हूं, जिससे कठिन टेक्निकल बातें भी पाठकों के लिए समझना आसान हो जाती हैं. मैंने परास्नातक माखनलाल चतुर्वेदी राष्ट्रीय पत्रकारिता एवं संचार विश्वविद्यालय से उत्तीर्ण की है.

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