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Deepfake पर सरकार का सबसे बड़ा एक्शन! इन AI प्रोजेक्ट्स को मिली मंजूरी

Deepfake AI: इलेक्ट्रॉनिक्स एवं सूचना प्रौद्योगिकी मंत्रालय (MeitY) ने सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म्स जैसे Meta, X और दूसरे डिजिटल इंटरमीडियरी के लिए नए दिशा-निर्देश जारी किए हैं.

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  • आईआईटी संस्थान स्वदेशी डीपफेक पहचान तकनीकें विकसित करेंगे।

Deepfake AI: आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस पूरी दुनिया में काफी तेजी से विस्तार कर रहा है. इसी के साथ अब साइबर ठग भी लोगों को ठगने के लिए एआई का इस्तेमाल कर रहे हैं. पूरे देश में साइबर फ्रॉड का मामला काफी तेजी से बढ़ रहा है. एआई की मदद से डीपफेक वीडियो, फर्जी फोटो और नकली ऑडियो का खतरा भी बढ़ता जा रहा है. इनका इस्तेमाल लोगों की पहचान चुराने, ऑनलाइन ठगी, गलत जानकारी फैलाने और साइबर अपराधों में किया जा रहा है. इसी कड़ी में सराकर ने इस चुनौती से निपटने के लिए बड़ा कदम उठाया है.

सोशल मीडिया कंपनियों के लिए सख्त नियम

मीडिया रिपोर्ट के अनुसार, इलेक्ट्रॉनिक्स एवं सूचना प्रौद्योगिकी मंत्रालय (MeitY) ने सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म्स जैसे Meta, X और दूसरे डिजिटल इंटरमीडियरी के लिए नए दिशा-निर्देश जारी किए हैं. इन नियमों को सोशल मीडिया पर बढ़ते AI से बने हुए भ्रामक और गैरकानूनी कंटेंट के प्रसार को रोकना है. इसके साथ ही सरकार इंटरनेट यूजर्स की सेफ्टी की ओर भी काफी ध्यान दे रही है. इसीलिए उनकी सुरक्षा के लिए ये बड़ा कदम उठाया गया है.


Deepfake पर सरकार का सबसे बड़ा एक्शन! इन AI प्रोजेक्ट्स को मिली मंजूरी

इलेक्ट्रॉनिक्स एवं आईटी राज्य मंत्री जितिन प्रसाद के मुताबिक, AI टेक्नोलॉजी के कारण नकली वीडियो, फोटो और ऑडियो बनाना पहले के मुकाबले कहीं ज्यादा आसान हो गया है. यही वजह है कि सरकार ने मौजूदा कानूनों को और मजबूत बनाने का फैसला किया है.

AI कंटेंट पर लेबल

आपकी जानकारी के लिए बता दें कि नए नियमों के तहत जिन प्लेटफॉर्म्स पर AI से तैयार कंटेंट शेयर किया जाएगा उन्हें ऐसे कंटेंट पर पूरी तरह से एआई से बना हुआ है ये लेबल लगाना होगा जिससे यूजर्स को आसानी से पता लग सके कि जो वो कंटेंट देख रहे हैं वो असली नहीं है बल्कि एआई की मदद से तैयार किया गया है.

मात्र 3 घंटे में हटाना होगा गैरकानूनी AI कंटेंट

सरकार ने आईटी (इंटरमीडियरी गाइडलाइंस एंड डिजिटल मीडिया एथिक्स कोड) नियम, 2021 में बदलाव किया है. सबसे बड़ा बदलाव ये है कि अब सोशल मीडिया कंपनियों को यूजर्स की शिकायत को तुरंत सुनना होगा और उसपर एक्शन भी लेना होगा.


Deepfake पर सरकार का सबसे बड़ा एक्शन! इन AI प्रोजेक्ट्स को मिली मंजूरी

इतना ही नहीं, इस नियम के अनुसार, अब अगर किसी सोशल मीडिया कंपनी को सरकार की ओर से गलत कंटेंट दिखाने या उसे हटाने के लिए लीगल नोटिस जाता है तो उसे 3 घंटे के अंदर सही करना होगा. बता दें कि पहले कंपनियों को इसका जवाब देने या एक्शन लेने के लिए 36 घंटों का समय मिलता था.

IIT संस्थान तैयार करेंगे स्वदेशी डीपफेक डिटेक्शन टेक्नोलॉजी

मीडिया रिपोर्ट के मुताबिक, सरकार ने जिन 13 रिस्पॉन्सिबल AI प्रोजेक्ट्स को मंजूरी दी है उनमें देश के कई मेन शैक्षणिक संस्थान शामिल हैं. इन परियोजनाओं का लक्ष्य भारत में ऐसी टेक्नोलॉजी को तैयार करना है जो तुरंत डीपफेक की पहचान करें और उसे सही तरीके से सभी प्लेटफॉर्म से हटाए.

Saakshya प्रोजेक्ट

आपको बता दें कि आईआईटी जोधपुर और आईआईटी मद्रास मिलकर एक मल्टी-एजेंट डीपफेक डिटेक्शन फ्रेमवर्क तैयार कर रहे हैं जिसका नाम साक्ष्य हैं. बता दें कि ये सिस्टम AI से तैयार नकली वीडियो और फोटो की ज्यादा सटीक तरीके से पहचानने का काम करेंगे.

AI विश्लेषक

एआई विश्लेषक एक ऐसा प्रोजेक्ट है जो फर्जी ऑडियो और वीडियो की पहचान के लिए तैयार की जा रही है. इसमें AI की मदद से मीडिया फाइलों को चेक किया जाएगा और ये पता लगाया जाएगा कि उनमें किसी तरह की छेड़छाड़ या बदलाव किया गया है या नहीं.

फर्जी AI कंटेंट पकड़ने के लिए नया सिस्टम

जानकारी के मुताबिक, सरकार ने सोशल मीडिया कंपनियों को ये भी निर्देश दिया है कि वे AI बेस्ड ऑटोमेटेड टूल्स और दूसरे टेक्नोलॉजी वाले तरीकों का इस्तेमाल करें जिससे गैरकानूनी AI कंटेंट की पहचान समय रहते हो सके और उसे तुरंत प्लेटफॉर्म से हटाया जा सके.

डीपफेक के खिलाफ मजबूत होगी भारत की तैयारी

आपको बता दें कि सरकार का मानना है कि इन स्वदेशी AI प्रोजेक्ट्स और नए नियमों के जरिए भारत डीपफेक जैसी खतरों से पहले के मुकाबले ज्यादा बेहतर तरीके से निपट सकेगा. इसके अलावा तुरंत कार्रवाई, AI कंटेंट की ठीक पहचान और एडवांस डिटेक्शन तकनीकों के जरिए ऑनलाइन दुनिया को ज्यादा सुरक्षित और भरोसेमंद बनाने की दिशा में ये एक जरूरी कदम माना जा रहा है.

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स्मार्टफोन, गैजेट्स, आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस, साइबर सिक्योरिटी और इंटरनेट टेक्नोलॉजी की दुनिया में मेरा इंटरेस्ट काफी ज्यादा है. मैं यानी हिमांशु तिवारी, ABP LIVE में टेक और डिजिटल सेक्शन का हिस्सा हूं. मैं नई टेक्नोलॉजी को आसान और दिलचस्प अंदाज में पाठकों तक पहुंचाने का काम करता हूं. स्मार्टफोन लॉन्च, वायरल टेक ट्रेंड्स, AI अपडेट्स, सोशल मीडिया फीचर्स और साइबर फ्रॉड जैसे विषयों पर मेरी पकड़ मजबूत है.

टेक्नोलॉजी से जुड़ी खबरों को सिर्फ जानकारी तक सीमित नहीं रखता, बल्कि उन्हें आम लोगों की जरूरत और रोजमर्रा की जिंदगी से जोड़कर पेश करता हूं. खासतौर पर ऐसी खबरों पर काम करना पसंद करता हूं, जो लोगों के डिजिटल एक्सपीरियंस को सीधे प्रभावित करती हैं.

इसके अलावा मुझे नई टेक्नोलॉजी एक्सप्लोर करना, स्मार्टफोन फीचर्स को समझना और डिजिटल ट्रेंड्स पर रिसर्च करना पसंद है. मैं आसान भाषा और आकर्षक अंदाज में लिखने के लिए जाना जाता हूं, जिससे कठिन टेक्निकल बातें भी पाठकों के लिए समझना आसान हो जाती हैं. मैंने परास्नातक माखनलाल चतुर्वेदी राष्ट्रीय पत्रकारिता एवं संचार विश्वविद्यालय से उत्तीर्ण की है.

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