Google AI Tool Rollback : 24 घंटे भी नहीं चला Google का AI टूल, कंपनी ने हटाया फीचर
Google AI Tool Rollback : लॉन्च के 24 घंटे भी पूरे नहीं हुए थे कि Google ने इस फीचर को वापस लेने का फैसला कर लिया.कंपनी का कहना था कि यह फीचर लोगों की कल्पना को नई उड़ान देगा.

Google AI Tool Rollback : Google ने हाल ही में Google Earth पर एक नया AI फीचर लॉन्च किया था, जिसकी मदद से यूजर्स सिर्फ एक क्लिक में सैटेलाइट फोटो के आधार पर AI से नई इमेज बना सकते थे. कंपनी का कहना था कि यह फीचर लोगों की कल्पना को नई उड़ान देगा और कुछ ही सेकंड में मनचाही फोटो तैयार कर देगा. हालांकि, लॉन्च के 24 घंटे भी पूरे नहीं हुए थे कि Google ने इस फीचर को वापस लेने का फैसला कर लिया. दरअसल, कई रिसर्चर्स और ओपन सोर्स इंटेलिजेंस एक्सपर्ट्स ने आशंका जताई कि इस फीचर का गलत इस्तेमाल कर फर्जी सैटेलाइट फोटो बनाई जा सकती हैं और इससे गलत जानकारी तेजी से फैल सकती है. इसके बाद Google ने इस फीचर पर फिलहाल रोक लगा दी.
क्या था Google Earth का नया AI फीचर?
Google ने 30 जुलाई को Google Earth में Create Image नाम का नया फीचर शुरू किया था. यह फीचर Google की Nano Banana 2 इमेज जनरेशन तकनीक पर आधारित था. इसकी मदद से यूजर Google Earth पर किसी भी जगह को चुनकर Create Image पर क्लिक करते और फिर जो फोटो बनानी होती, उसका विवरण लिखते, इसके बाद AI कुछ ही सेकंड में Google Earth की सैटेलाइट, एरियल और 3D मैपिंग डेटा के आधार पर नई फोटो तैयार कर देता है.
Google ने 24 घंटे में ही क्यों हटाया फीचर?
फीचर लॉन्च होने के कुछ ही घंटों बाद कई विशेषज्ञों ने इसकी आलोचना शुरू कर दी. उनका कहना था कि इस तकनीक का यूज करके ऐसी सैटेलाइट फोटो बनाई जा सकती हैं, जो देखने में बिल्कुल असली लगें, लेकिन सच में AI से तैयार की गई हों. इससे गलत जानकारी फैलने और लोगों के भ्रमित होने का खतरा बढ़ सकता है. इन चिंताओं के बाद Google ने फैसला लिया कि जब तक इस फीचर के लिए मजबूत सुरक्षा व्यवस्था तैयार नहीं हो जाती, तब तक इसे Google Earth से हटा दिया जाएगा.
AI फोटो की पहचान कैसे होगी?
Google ने कहा कि इस फीचर से बनाई गई हर फोटो में SynthID डिजिटल वॉटरमार्क लगाया जाता है. यह एक ऐसा डिजिटल पहचान चिन्ह है, जिससे पता लगाया जा सकता है कि फोटो AI से बनाई गई है. अगर किसी यूजर को किसी फोटो पर शक हो, तो वह Gemini ऐप या Google Lens की मदद से जांच सकता है कि उस फोटो में SynthID मौजूद है या नहीं, कंपनी का कहना है कि वह गलत जानकारी को गंभीरता से लेती है और ऐसे फीचर्स के लिए और मजबूत सुरक्षा उपाय लागू करेगी.
Google ने क्या कहा?
फीचर हटाने की घोषणा करते हुए Google ने कहा कि लोग Google Earth पर दुनिया की सही और भरोसेमंद फोटो देखने के लिए भरोसा करते हैं. कंपनी ने माना कि कई जियोस्पेशियल प्रोफेशनल्स इस फीचर का यूज अच्छे कामों के लिए कर रहे थे, लेकिन कंपनी ने ऐसे स्क्रीनशॉट भी देखे जो उसकी नीतियों का उल्लंघन करते हुए दिखाई दिए. इसी वजह से Google ने इस फीचर को अस्थायी रूप से हटा दिया है. कंपनी ने यह भी साफ किया कि AI से बनाई गई फोटो Google Earth के मुख्य प्लेटफॉर्म पर सार्वजनिक रूप से दिखाई नहीं देती थीं और उन पर AI से तैयार होने का वॉटरमार्क भी मौजूद था.
यह भी पढ़ें - Gmail भूल जाइए! ये 5 प्राइवेट Email सर्विस आपकी Privacy रखेंगी सुरक्षित
विशेषज्ञों ने क्या चिंता जताई?
ओपन सोर्स रिसर्चर हेन्क वैन एस ने सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म X पर बताया कि उन्होंने इस फीचर से मैक्सिको सीमा पर शरणार्थियों, ईरान के परमाणु संयंत्र, एम्स्टर्डम में विमान दुर्घटना और गाजा के अस्पताल जैसे कई संवेदनशील विषयों पर फोटो बनाने की कोशिश की, लेकिन किसी भी अनुरोध को रोका नहीं गया. वहीं, सैटेलाइट इमेज विश्लेषण से जुड़े रिसर्च एनालिस्ट ब्रैडी अफ्रिक ने कहा कि यह फीचर ऐसी नकली सैटेलाइट फोटो बनाना आसान कर सकता है, जो तेजी से सोशल मीडिया पर फैल सकती हैं और लोगों को गुमराह कर सकती हैं. उनका मानना है कि इससे फ्यूचर में असली सैटेलाइट फोटो पर लोगों का भरोसा भी कमजोर पड़ सकता है और शोधकर्ताओं के लिए सही जानकारी की पुष्टि करना और मुश्किल हो जाएगा.
यह भी पढ़ें - क्या पानी में डूबने से खराब हो जाएगी Apple Watch? जानिए क्या है सच्चाई























