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Facebook पर एक Like बता देता है आपकी जाति और धर्म?

व्हिसल ब्लोअर क्रिस्टोफर वाइली ने CNN से कहा कि कैसे एक एप फेसबुक की मदद कर रहा है जिसमें न केवल यूजर्स के प्रोफाइल बल्कि उसके पूरे दोस्तों के नेटवर्क से भी पूरा डेटा खींचा जा रहा है.

नई दिल्ली: यह सच है कि करनी कथनी से ताकतवर होती है, तब भी जब आप उसे नहीं करना चाहते हो. पिछले महीने कैंब्रिज एनालिटिका डेटा फर्म के एक पूर्व कर्मचारी ने खुलासा किया कि लाखों फेसबुक यूजर्स के डेटा पर कब्जा किया गया है, जिसका इस्तेमाल 2016 में होने वाले अमेरिकी राष्ट्रपति चुनाव को प्रभावित करने के लिए किया गया था.

व्हिसल ब्लोअर क्रिस्टोफर वाइली ने CNN से कहा कि कैसे एक एप फेसबुक की मदद कर रहा है जिसमें न केवल यूजर्स के प्रोफाइल बल्कि उसके पूरे दोस्तों के नेटवर्क से भी डेटा खींचता है.

वाइली ने आगे कहा कि, " अगर हम एप को डाउनलोड करते हैं , तो वो हमारे 200 से 300 रिकॉर्ड्स को खींच कर तुरंत स्केल करने लगता है."

आपके जानकारी के बिना आपका डेटा चोरी करता है फेसबुक

फेसबुक यूजर के जानकारी के बिना आपके सारे डेटा को खींच लिया जाता है. तो वहीं इस मामले में फेसबुक भी कह चुका है कि वो अपने यूजर्स के डेटा चुराता था और इस बारे में उसे जानकारी भी थी. जिसके बाद कंपनी पर आरोप भी लगें की वो यूजर्स के डेटा का दुरूपयोग करता है.

वाइली ने कहा कि, " फेसबुक ने एप को अनुमति दी, वो जानते थे कि एप क्या कर रहा है. लेकिन वो शायद ये नहीं जानते थे कि ये एप किस लिए है. "

लेकिन ये जानकारी सिर्फ इतनी ही नहीं थी जितना कैंब्रिज एनालिटिका द्वारा बताया गया था या फिर जितना लोगों ने अपने प्रोफाइल्स के जरिए महसूस किया. बल्कि इसके अंदर तो ये भी था कि लोगों को क्या खाना पसंद है, कौन सा संगीत सुनना पसंद है, कौन सी फिल्म देखना या किताब पढ़ना पसंद है और अन्य चीजें.

फेसबुक से जुड़ी कंपनियां चुरा रही हैं आपका डेटा

मैरीलैंड कॉलेज ऑफ इन्फ़ॉर्मेशन स्टडीज में आंत्रप्रेन्योरशिप और इंगेजमेट, इनोवेशन के डायरेक्टर टिमोथी समर्स ने कहा कि, '' फेसबुक एक अद्भुत जगह है जहां आप बिना कुछ सोचे समझे अपना डेटा शेयर करते हैं, क्योंकि वो डेटा आप सिर्फ अपने दोस्तों या फिर अपने परिवार वालों के साथ ही शेयर कर रहे हैं. हैं न? लेकिन ऐसा नहीं है, दरअसल आप अपना डेटा उन सभी कंपनियों के साथ शेयर कर रहे हैं जो फेसबुक के साथ जुड़ा हुआ है. "

कम्प्यूटेशनल साइकोलोजिस्ट और बड़े डेटा वैज्ञानिक माइकल कोसिंस्की और अन्य लोगों द्वारा 2013 में किए गए एक अध्ययन के मुताबिक, ''फेसबुक की लाइक का प्रयोग बेहद संवेदनशील व्यक्तिगत गुण को सही ढंग से अनुमान लगाने के लिए किया जा सकता है.'' कोसिंस्की का एल्गोरिदम 95% सटीकता के साथ ये पता लगाने में सक्षम था कि व्यक्ति काला है या गोरा, 93% सटीकता के साथ पुरूष है या महिला या फिर समलैंगिक, 88% सटीकता के साथ डेमोक्रेट है या रिपब्लिकन.

लाइक करते ही आपका सारा डेटा ले लेता है फेसबुक

कोसिंस्की द्वारा 2015 में प्रकाशित एक शोध के अनुसार, सिर्फ 10 लाइक के साथ एक कंप्यूटर मॉडल आपको एक सहयोगी से ज्यादा जानने लगता है. तो वहीं 70 लाइक्स के साथ कंप्यूटर आपको आपके रूममेट और मित्र से ज्यादा बेहतर तरीके से जानने लगता है. जबकि 150 लाइक्स के साथ आपके परिवार से भी ज्यादा. बिग डेटा आपके पति और पत्नी से भी ज्याद अच्छे से आपको जानता है.

फेसबुक पर प्रोफाइल यूजर्स के लिए इस्तेमाल की जाने वाली क्विज़ के अनुसार, मैरीलैंड कॉलेज पार्क के इनफार्मेशन स्ट्डीज कॉलेज के वर्कर्स लैब ने भी एक पर्सनालिटी क्विज़ को बनाया जो यूजर्स की सारी जानकारी देता है कि वो कैसा फैसला लेते हैं और ऑनलाइन उनका व्यवहार कैसा है.

क्लिक करने पर मजबूर करता है फेसबुक

समर्स, जो कोसिंस्की के शोध से जुड़े नहीं थे उन्होंने कहा कि, '' आपके फेसबुक से डेटा इसलिए लिया जाता है ताकि ये पता लगाया जा सके की आप कौन हैं. उन्होंने उदाहरण देते हुए कहा कि, '' प्रोत्साहन और कल्पना के साथ मैं ये जानना चाहता हूं कि जॉन स्मिथ कौन हैं और जॉन स्मिथ क्या फैसला लेगा. ''

समर्स ने पुराने तरीके से सोचने के लिए कहा, '' कैसे टाउन स्क्वायर के रूप में लोगों को टारगेट किया जाता था." किसी ने खूब जोर से चिल्लाया, उम्मीद के मुताबिक उतने लोग ही उस संदेश को सुनेंगे. और हर कोई उस मैसेज को प्राप्त कर पाएगा.''

समर्स ने आगे कहा कि माइक्रो टारगेटिंग के इस नए युग में लोगों को ' कानाफूसी अभियान ' के अधीन किया जा रहा है. जो मैसेज हर व्यक्ति देख या सुन रहा है वो सटीक ट्रिगर के अनुरूप हो सकता है जो उन्हें एक निश्चित पेज पर क्लिक करने, किसी विशेष प्रोडक्ट को खरीदने और और किसी राजनीतिक उम्मीदवार को वोट देने में इस्तेमाल किया जा सकता है.

क्या कुछ लोग हैं जो दूसरों की तुलना में अधिक प्रेरक हैं?

समर्स ने कहा कि, '' बिल्कुल यह वही जगह है जहां मनोचिकित्सा आता है.''

समर्स ने आगे कहा कि, ''सही कल्पना और सही कंटेंट, कंटेक्स्ट और बारीकियों के साथ और सही सोशल मीडिया अभियान के साथ आप किसी को भी किसी भी चीज पर क्लिक करने पर मजबूर कर सकते हैं.''

एक अध्ययन जिसे 2017 में कोसिंस्की द्वारा प्रकाशित किया गया था उसमें कई ऐसे उदाहरण दिए गए हैं जिसमें ये बताया गया है कि कैसे एक विज्ञापन अलग तरह के यूजर्स को टारगेट करता है.

स्मार्टफोन और ई- मेल के जरिए कंपनियां चुरा रही हैं आपका डेटा

समर्स ने कहा कि, '' अगर आप डिजिटल ब्रेडक्रंब छोड़ रहे हैं और एक डिजिटल जीवन जी रहें हैं, तो आप लगातार हर रूप में अपना डेटा प्वाइंट दे रहे हैं.'' हमारे स्मार्टफोन, हमारे कंप्यूटर, हमारे ई- मेल्स, बड़ी कंपनियां जैसे एमेजॉन, गूगल, फेसबुक ये सारे इन चीजों की मदद से हमारे डेटा इक्ट्ठा कर रही हैं.

समर्स ने सभी लोगों को अपना फेसबुक डेटा डाउनलोड करने के लिए प्रोत्साहित किया. आप डेटा आसानी से डाउनलोड कर सकते हैं. बस आपको अकाउंट क्लिक कर सेटिंग्स में जाना होगा और वहां से आप 70 प्रकार के अलग अलग डेटा निकाल सकते हैं.

उन्होंने आगे कि जाईए और पता लगाईए कि कौन आपको देख रहा है, कौन मनोविज्ञान रूप से आपका प्रोफाइल चेक कर रहा है तो वहीं कौन आपके व्यवहार का पता लगाने की कोशिश कर रहा है.?''

इन सभी चीजों तक पहुंचने के बाद ही आप ये पता लगा सकते हैं कि कौन आपको टारगेट कर रहा है या कौन आपके डेटा पर नजर रख रहा है और आप इन सबका सामना कैसे कर सकते हैं.

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