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ChatGPT हर 25 से 50 सवालों का जवाब देने के लिए पीता है 500ml पानी, जानें क्‍या है माजरा?

ChatGPT: AI जहां एक तरफ हम सभी के लिए फायदेमंद है तो दूसरी तरफ इसके नुकसान भी हैं. ये पर्यावरण के लिहाज से भी चिंता का विषय है.

ChatGPT Consumes Water: पिछले साल नवंबर महीने में ओपन एआई ने चैट जीपीटी को लॉन्च किया था. इस चैटबॉट के आने के बाद कामकाज करने का तरीका बदल गया है और आज AI की मदद से कई काम-काज किए जा रहे हैं. टेलीविजन चैनलों में तो AI एंकर तक आ चुके हैं. चैट जीपीटी के सामने आने के बाद पहली बार एक आम व्यक्ति को AI की क्षमता पता लगी और किस तरह ये भविष्य बदल सकता है लोगों ने ये जाना. AI की पॉपुलैरिटी को देखते हुए सभी टेक कंपनियां इस दिशा में काम कर रही हैं. हालांकि एक्सपर्ट्स और सरकारें AI को लेकर चिंतित भी हैं क्योंकि इसका गलत इस्तेमाल लोगों के खिलाफ किया जा सकता है. साथ ही प्राइवेसी के लिए भी ये खतरा पैदा कर सकता है. इसके अलावा आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस पर्यावरण के लिए भी नुकसानदायक है. अगर आप सोच रहे हैं कैसे तो दरअसल, जिस चैट जीपीटी से आप सवाल जवाब करते हैं वह हर 20 से 50 सवालों के लिए लगभग 500 मिलीलीटर पानी पीता है. जी हां, ये सच है.

रिसर्च में हुआ खुलासा

कोलोराडो रिवरसाइड विश्वविद्यालय और टेक्सास आर्लिंगटन विश्वविद्यालय के रिसर्चर्स ने इस बात का खुलासा किया कि AI खुद के प्रोसेसिंग सिस्टम को ठंडा बनाए रखने के लिए कई लाख लीटर फ्रेश वाटर पीते हैं. रिसर्चर्स ने बताया कि माइक्रोसॉफ्ट के डाटा सेंटर में GPT-3 को ट्रेन करने के लिए 7,00,000 लीटर फ्रेश वॉटर की जरूरत पड़ती है. यह लगभग 350 बीएमडब्ल्यू और 320 टेस्ला इलेक्ट्रिक व्हीकल बनाने के बराबर है. उन्होंने बताया कि यदि GPT-3 को एशियन डाटा सेंटरो में ट्रेन किया जाए तो वॉटर कंजप्शन 3 गुना तक बढ़ जाएगा.

कोलोराडो और टेक्सास के रिसर्चर्स ने कहा कि ओपन एआई का चैट जीपीटी हर 25 से 50 सवालों का जवाब देने के लिए 500 मिलीलीटर पानी पीता है. दरअसल, ये चैटबॉट मशीन लर्निंग पर बेस्ड है और इसका डेटा सेंटर हर सेकंड कई लाख क्वेरी को प्रोसेस करता है. इसलिए डेटा सेंटर का टेम्प्रेचर ठंडा रहे और इसमें कोई परेशानी न आए, इसके लिए इन्हें पानी से ठंडा किया जाता है.

बता दें, सिर्फ चैट जीपीटी ही ऐसा नहीं है जो लाखो लीटर पानी कंज्यूम करता हो. गूगल का बार्ड भी डेटा सेंटर को ठंडा बनाए रखने के लिए खूब पानी पीता है.
ओरेगोनियन नाम के एक वेबसाइट ने खुलासा किया कि Google के वैश्विक डेटा केंद्रों ने 2022 में 15 बिलियन गैलन पानी पीया. दरअसल, इस वेबसाइट ने डलास जोकि ओरेगॉन का एक शहर है उसे ये बताने की चुनौती दी थी कि क्षेत्र में एक Google डेटा केंद्र कितना पानी उपयोग कर रहा है. जांच में पता चला कि गूगल ने अकेले 2021 में क्षेत्र में लगभग 1.25 बिलियन लीटर पानी की खपत की है जो लगभग दस लाख से अधिक घरों को एक वर्ष तक दिया जा सकता है. 

पर्यावरण को बचाने के लिए कम्पनियां कर रही काम

पानी और पर्यावरण को बचाने के लिए एक कंपनियां अपने डाटा सेंटर को ठंडी जगह में बनाने पर विचार कर रही है जिससे पानी और पैसा दोनों बचाया जा सके. माइक्रोसॉफ्ट फिलहाल एकमात्र ऐसी कंपनी है जिसने अंडर वाटर डाटा सेंटर का एक्सपेरिमेंट किया है और ये दावा किया है कि ये तकनीक कारगर है और इससे पानी बचाया जा सकता है. इधर, गूगल ने भी एक प्रेस रिलीज के दौरान कहा कि कंपनी जहां संभव हो समुद्री जल या रीसायकल्ड पानी का उपयोग करती है और अपने डेटा केंद्रों को बिजली देने के लिए नवीकरणीय ऊर्जा स्रोतों और कार्बन ऑफसेट में निवेश करती है जिससे पर्यावरण को बचाया जा सके. माइक्रोसॉफ्ट ने 2024 तक अपने डाटा सेंटरो द्वारा इस्तेमाल किए जाने वाले पानी को 95 फ़ीसदी तक कम करने की बात कही है. कंपनी जीरो वाटर फुटप्रिंट को अपनाना चाहती है और इसके लिए वह नए तरीके खोज रही है.

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